छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

यौन शिक्षा जरूरी है

मैं समलैंगिक रिश्तों का हिमायती नहीं हूं पर ऐसे लोगो को हेय दृष्टि से देखना, या उनके साथ भेदभाव करना, गलत समझता हूं।

कुछ व्यक्ति, दो लिंगों के बीच फंस (intersex) जाते हैं। मैं ऐसे लोगों का मजाक बनाना गलत समझता हूं। मेरे विचार से लिंग डिज़िटल नहीं होता। इसे दो भागों में नहीं बांटा जा सकता हैं। इसके कुछ और रूप भी हैं। जो हर युग में, हर जगह, हर सभ्यता में पाये जाते हैं। मेरे विचार से ईश्वर – शायद प्रकृति कहना उचित होगा – इन्हें इसी तरह से बनाया है। इन्हे हास्य का पात्र बनाना अनुचित है। हमें इन्हें ऐसे ही स्वीकर करना चाहिये।

इस सब के साथ, मैं यौन शिक्षा का भी हिमायती हूं। मेरे विचार से, इसकी प्ररंभिक शिक्षा घर में ही होनी चाहिये। यह आजकल खास तौर से जरूरी है जब अंतरजाल में सब तरह की ब्लू फिल्म देखने को आसानी से मिल जाती है। टीवी के प्रोग्राम भी कुछ कम नहीं हैं।

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यही कारण है कि मैंने अपने उन्मुक्त चिट्ठे पर चार चिट्ठियां ‘Trans-gendered – सेक्स परिवर्तित पुरुष या स्त्री‘, ‘यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है‘, ‘यौन शिक्षा‘,’ यौन शिक्षा और सांख्यिकी‘, नाम से लिखीं। छुट-पुट चिट्ठे पर भी तीन चिट्ठियां ‘चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…‘, ‘आईने, आईने, यह तो बता – दुनिया मे सबसे सुन्दर कौन‘, ‘मां को दिल की बात कैसे बतायें‘ लिखीं। हां, ‘मां को को दिल की बात पता चली‘।
इन चिट्ठियों का संदर्भ कुछ अलग, अलग है। इसलिये यह यौन शिक्षा, जैसा हम समझते हैं, वैसी नहीं हैं पर इनमें यौन शिक्षा का महत्व या भ्रांतियों को अलग, अलग तरह से बताने का प्रयत्न किया है।

यौन शिक्षा‘ की चिट्ठी पर मैं एक कविता पर दुख, आक्रोश प्रगट कर, यह कहने का प्रयत्न कर रहा था कि बच्चों को ही नहीं, पर बड़ो को भी यौन शिक्षा की जरूरत है और महिला या बालिका शोषण का हल, बालक शोषण नहीं है। बालक भी, उतने ही यौन शोषण के शिकार होते हैं जितना कि बालिकायें या फिर महिलायें – शायद उनसे ज्यादा। आज के दैनिक जागरण की यह खबर कुछ इस तरफ इशारा करती है।

सांकेतिक शब्द

culture, life, जीवन शैली, समाज, कैसे जियें, जीवन दर्शन, जी भर कर जियो,

February 1, 2008 - Posted by उन्मुक्त | दर्शन, यौन शिक्षा, विचार | , | 4 Comments

4 Comments »

  1. aap kii har post gyaan vardhk aur balanced hotee hae

    Comment by rachna | February 1, 2008

  2. मैं आप की बात व नजरिए का समर्थन करता हूँ। इस विषय पर गंभीरता से काम होना चाहिए।

    Comment by दिनेशराय द्विवेदी | February 2, 2008

  3. really its very very necessary for the youth to be well educated with the sex educaton along with the professional education so that they can well improve their personility in various ways…

    Comment by umesh mahilani | February 12, 2008

  4. [...] हमने जानी है जमाने में रमती खुशबू।। यौन शिक्षा जरूरी है।। Trans-gendered – सेक्स परिवर्तित पुरुष या [...]

    Pingback by उफ क्या मैं चैन से सो सकूंगी « छुट-पुट | September 20, 2008


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