उफ, क्या मैं कभी चैन से सो सकूंगी

यह चिट्ठी एक महिला वकील के बचपन के अनुभवों का जिक्र करती हुई, यौन शिक्षा पर जोर देती है।

‘काश मैं एक रात भी, उन हाथों को सपनो में देखे बिना सो सकती’,

यह कहना है चेन्नाई की एक २४ वर्षीय सफल महिला वकील का।

वे किसके हाथ हैं, वे  सपनो क्यों न आयें, क्या हाथ भी सपनो में किसी को तंग कर सकते हैं?

क्या आप समझ नहीं पाये वे किसके हाथ हैं और वह वकील महिला उनसे क्यों डरती है?

वे हाथ हैं उसके बड़े भाई के, वे हाथ हैं उसके पड़ोसी के।

वे हाथ हैं उसके बड़े भाई के, वे हाथ हैं उसके पड़ोसी के, जिसके यहां वह बचपन में,  अपनी हम उम्र सहेली के यहां लुका छिपी खेलने जाया करती थी।

क्या आप अब भी नहीं समझ नहीं पाये कि वह वकील महिला उनसे क्यों डरती है?

मैं तहलका (Tehlka) पत्रिका का नियमित ग्राहक हूं। हमारे पास इसका अंग्रेजी भाषा का संस्करण आता है। इसमें एक स्तंभ है व्यक्तिगत इतिहास (Personal History) का। १३ सितम्बर के अंक के इस कॉलम के अन्तर्गत इसी महिला  ने इस बारे में

‘I pray that some day I will sleep without seeing those hands in my dreams’

नाम के शीर्षक से लिखे हैं आप इस अंक के लेख को पढ़ें या अन्तरजाल में यहां पढ़ें।

वे मुझेउस जगह छू रहे थे जहांं उन्हें नहीं छूना चाहिये था। वे मुझसे वह करवा रहे थे जो मुझे नहीं करना चाहिये था।


आपको क्या लगता है कि यह महिला झूट बोल रही है?

मुन्ने की मां के अनुसार जो भी इसके साथ हुआ वह अक्सर होता है। यह काम परिवार के लोग या फिर जान पहचान के लोग ही करते हैं।

यह महिला अपने अनुभव में कुछ हद तक अपने को भी को दोषी मानती है।  आपको क्या लगता है क्या वह दोषी है?

लड़की छोटी थी पर उसका भाई बड़ा था। उसका पड़ोसी भी उम्र में बड़ा था। क्या गलती उन दोनो की नहीं है? उन्होंने ऐसा क्यों किया? क्या उन्हें यह सब नहीं समझना चाहिये था? क्या गलती उनके माता पिता की, यह उस समाज की नहीं है जिसने,

  • न तो बड़े भाई को न उस पड़ोसी को उचित यौन शिक्षा दी
  • न ही उस महिला बच्ची को इस मुसीबत से बचाया।

मेरे विचार में शायद उन्हें  ठीक प्रकार से शिक्षा नहीं मिली। उन्हें यह ठीक प्रकार से मिली होती तो वे समझ पाते कि ६ साल की बच्ची पर उनकी हरकतों का क्या असर पड़ेगा।

आपको क्या लगता है कि क्या यौन शिक्षा नहीं होनी चाहिये?

मेरे विचार से यौन शिक्षा होनी चाहिये। मैं इसका पक्षधर हूं। अक्सर लोग इसका विरोध इसलिये करते हैं क्योंकि वे इसका अर्थ गलत समझते हैं। वे समझते हैं कि इसका सम्बन्ध केवल सम्भोग  या फिर प्रजनन से है। यह सोच ठीक नहीं है। यौन शिक्षा का अर्थ कुछ और है।  इस तरह की बातें परिवार समाज में होती हैं। मैंने पिछले साल लिखा था कि,

  • मेरी मां ने किस प्रकार से मुझे किस तरह से इससे दूर रखा
  • किस तरह से इस सच्चाई से अवगत कराया,
  • मुझे किस तरह यौन शिक्षा मिली, और
  • मैंने अपनी अगली पीढ़ी को इसके बारे में बताया।

मेरे विचार में यौन शिक्षा जरूरी है और यह किस तरह से हो उसके बारे में विचार जरूरी है।

क्या वह लड़की कभी ठीक से सो सकेगी? आशा करता हूं कि उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।

तहलका में लिखे लेख को पढ़ने के लिये इस चित्र पर चटका लगायें।

उन्मुक्त की पुस्तकों के बारे में यहां पढ़ें।

इस चिट्ठी पर सारे चित्र तहलका के सौजन्य से हैं।

यौन शिक्षा क्या है और वह क्यों जरूरी है – कुछ लेख

यौन शिक्षा।। यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है: हमने जानी है जमाने में रमती खुशबू।। यौन शिक्षा जरूरी है।। Trans-gendered – सेक्स परिवर्तित पुरुष या स्त्री।। मैं लड़के के शरीर में कैद थी।। मां को दिल की बात कैसे बतायें।।  क्या, अंतरजाल तकनीक पर काम करने वालों पर, वाई क्रोमोसोम हावी है?।।

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi

(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)

  • नानी पालकीवाला – एक जीवनी
  • वह तारा 

यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप –

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।

बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।

सांकेतिक शब्द

culture, life, Sex education, जीवन शैली, समाज, कैसे जियें, जीवन दर्शन, जी भर कर जियो, दर्शन, यौन शिक्षा,

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

6 Responses to उफ, क्या मैं कभी चैन से सो सकूंगी

  1. achchi jankaari liye sadhuwaad

  2. rachna says:

    You have been continuosly bloging on issues that others will just hate to discuss. I am one of your admirers for writing so clearly and with just one intention to share the knowledge that you have with others.

    Unmukt ji, in this hindi blogging when people blog to kill time your contribution is too great to even discuss.
    I read every article of yours and every time I want to comment I feel there is nothing more that I can add to the content..

    Hats of to you and your contribution to hindi bloging is remarkable.

    रचना जी, मेरे बारे में अच्छे विचार रखने के लिये शुक्रिया – उन्मुक्त।

  3. lovely says:

    मैंने आपके पहले वाले आलेख जो इस विषय पर थे, पढ़े थे ..पढ़ कर अच्छा लगा..बस और कुछ नही कहना है ..आपके इस जज्बे को मेरा सलाम.

  4. बहुत जागरुक करता आलेख. निश्चित ही योन शिक्षा आवश्यक है, चाहे वह स्कूल के माध्यम से हो या माँ बाप द्वारा. कितने ही लोग ऐसी ही कुंठाओं और गंथियों को पाले हैं. आपका आभार इस आलेख के लिए.

  5. उन्मुक्त जी आप हिन्दी में बहुत से विषयों पर लिखने और चर्चा करने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह आज सभी बच्चों के साथ हो रहा है। लेकिन ये बातें खुल कर सामने नहीं आ रही हैं और चर्चा नहीं हो रही है। किसी भी बुराई को दबाना वस्तुतः उसे संरक्षण देना है।

  6. पिंगबैक: हमने जानी है रिश्तों में रमती खुशबू « लेख

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