दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की

इस चिट्ठी में, ‘डिसकवरी साइंस’ (Discovery Science) चैनल पर आ रही ‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) श्रृंखला की आर्थर सी क्लार्क पर कड़ी पर चर्चा है।

प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन की आर्थर सी कलार्क कड़ी से

आर्थर सी क्लार्क, पिछली शताब्दी के महानतम विज्ञान कहानी लेखकों में थे। उनका जन्म १६ दिसंबर १९१७ को हुआ था बाद में उन्हंने लंका को अपना घर मान लिया ता वहीं उनकी मृत्यु १९ मार्च २००८ में हो गयी।

क्लार्क ने, दूसरे महायुद्ध के बाद, भविष्यवाणी की थी किस तरह सैटेलाइट के द्वारा संवाद  संभव हो सकेगा। आज यह सब हो गया है और इसके बिना जीवन सोच पाना असंभव है।

आर्थर सी कलार्क - चित्र विकिपीडिया से

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां‘ श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त‘ लिखते समय मैंने उनके लेख ‘Hazards of Prophecy: The Failure of Imagination’ का हवाला देते हुऐ इसमें उनके द्वारा भविष्य के लिये प्रतिपपादित निम्न तीन सिद्धान्तों का जिक्र किया था।

  1. When a distinguished but elderly scientist states that something is possible, he is almost certainly right. When he states that something is impossible, he is very probably wrong. जब कोई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कहे कि कुछ संभव है तो वह निश्चित तौर पर सही होते हैं पर जब वे कहते हैं कि यह असंभव है तो सम्भावना यह है कि वे गलत हैं।
  2. The only way of discovering the limits of the possible is to venture a little way past them into the impossible. क्या संभव है जानने के लिये, केवल रास्ता है कि संभव से हटकर असंभव की तरफ देखें।
  3. Any sufficiently advanced technology is indistinguishable from magic. किसी भी पर्याप्त विकसित तकनीक और जादू में फर्क कर पाना नामुमकिन है।
हांलाकि बाद में, इसमें उन्होंने एक नियम और जोड़ा था।
विज्ञान कहानियां, उनके द्वारा प्रतिपादित,   तीसरे नियम का अनुकरण करती हैं और क्लार्क की विज्ञान कहानियां इस नियम से भरपूर हैं। उनकी विज्ञान कहानियों में दर्शन का भी पुट है। वे यह सवाल उठाती हैं कि हम कौन  हैं; हम यहां क्यों हैं; सृष्टि में हमारी क्या जगह है? वे अक्सर बात करती हैं कि क्या दूसरे ग्रह के प्राणियों से मिलेंगें तो क्या होगा; दूसरे ग्रहों मानव जीवन कैसा होगा; क्या दूसरे ग्रहों पर, मानव बसेरा बना सकेंगे?
यदि आप ‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां‘ की अन्य कड़ियां पढ़ना चाहें तब नीचे लिखे लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।। विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार।। उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में।। धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या होते हैं।। हैली धूमकेतु।। पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां।। बेथलेहम का तारा – ग्रह पास आ गये थे।। ग्रहण पर आधारित कहानियां।। जब रात हुई।। तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं।। तारों का अन्त कैसे होता है।। वह तारा।। निष्कर्ष: बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा क्या था।।

अन्य ग्रहों का रास्ता

मेरा स्कूली जीवन, और विश्विद्यालय का जीवन उनकी पुस्तकों को पढ़ते बीता। बाद में उन्होंने बहुत से उपन्यास जेन्टरी ली (Gentry Lee) के साथ लिखे। मैंने यह सब पढ़े। उनकी लिखी पुस्तकें पढ़ने योग्य हैं। यदि आपने या आपके मुन्ने, मुन्नी ने नहीं पढ़ा तो उन्हे अवश्य पढ़ने के लिये प्रोत्साहित करें। हांलाकि उनकी लिखे उपन्यासों में दर्शन का पुट होने के कारण, समझने कुछ मुश्किल होती है।

‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां’ की श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार‘ में मैंने ह्यूगो पुरुस्कार की चर्चा की थी। क्लार्क को यह पुरुस्कार १९५८ में उनकी कहानी ‘द स्टार’ (The Star) के लिये मिला था। मैंने इस कहानी की चर्चा ‘वह तारा‘ नामक चिट्ठी में की है। इसको आप यहां सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने देखें।

उनकी बेहतरीन पुस्तकों, उनकी स्टैनली क्यूबरिक  (Stanley Kubrick) के साथ ‘२००१ स्पेस ऑडेसी’ फिल्म के लिये पटकथा {यह उनकी कहानी ‘द सेन्टीनल’ (The Sentinel) को विस्तार कर लिखी गयी है}, और उनकी अन्य भविष्यवाणियों के बारे में जानने के लिये ‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) टीवी श्रृंखला की आर्थर सी क्लार्क की कड़ी देखना न भूलें।
मेरे विचार से उनके लिखे उपन्यासों में सबसे रोचक द सिटी एण्ड द स्टारस् (The City and the Stars) है। लेकिन टीवी की इस कड़ी में उसका जिक्र नहीं है😦
‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) श्रृंखला पर मेरे द्वारा लिखी अन्य कड़ियां

उन्मुक्त चिट्ठे पर विज्ञान कहानियों पर लिखी गयीं चिट्ठियां

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, 

सांकेतिक शब्द
Arthur C Clark, Gentry Lee, 2001 Space Odyssey, Stanley Kubrick,The Sentinel, The City and the Stars, Hugo award,
Discovery Science, Prophets of Science Fiction, Prophets of Science Fiction, Ridley Scott,
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के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

One Response to दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की

  1. विज्ञान कथाओं के प्रति आपके लगाव और योगदान की ब्लागजगत में कोई सानी नहीं है ……आर्थर सी क्लार्क ने उपग्रहों के जरिये संचार की परिकल्पना १९४५ के आस पास ही कर ली थी !

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