छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

वर्ड प्रेस डाट कॉम के चिट्ठे पर फॉन्ट का आकार कैसे बढ़ांये

मैं वर्ड प्रेस दो चिट्ठे छुट-पुट और लेख लिखता हूं। छुट-पुट पर छुटपुट बातें रहती हैं इसलिये मैं चाहता था कि मैं ऐसी थीम का चयन करूं जिसके कॉलम की चौड़ाई कम हो। एक नयी थीम Fjords04 आयी। यह चार कॉलम में है और इसलिये हर में कॉलम की चौड़ाई कम है। यह थीम मेरे इस चिट्ठे के लिये उपयुक्त है। मैंने इसे प्रयोग कर अज्ञात चिट्ठेकारों की खैर नहीं नामक चिट्टी पोस्ट की। इस पर टिप्पणियां आयीं की फॉन्ट का आकार छोटा है इसको बड़ा करू।

मेरी समझ में नहीं आया कि यह मैं कैसे करूं। मैंने अपनी यह मुश्किल गूगल हिन्दी समूह चिट्टाकार में रखी। इसके बारे में चर्चा यहां देख सकते हैं। इसमे सबसे अच्छा हल जगदीश भटिया जी ने बताया है। इसके लिये आपको चिट्टी की शुरूवात में कोड मोड पर जा कर <font size =”3″> का टैग लगाना है और अन्त में इसे </font> के टैग से बन्द कर देना है। है न कितना आसान। मैंने कुछ और चिट्ठियों के फॉन्ट का आकार बड़ा कर दिया पर अधिकतर का आकार वैसे ही है। आप उन चिट्ठियों को देख कर पहले के आकार का अन्दाज लगा सकते हैं।

इससे यह भी पता चलता है कि हिन्दी चर्चा समूहों का कितना फायदा है और हम एक दूसरी की कितनी जलदी सहायता करते हैं।

यदि मुन्ने की मां के साथ जापान की यात्रा करना चाहें तो उसकी सायोनारा… जापान चिट्ठी यहां पढ़ सकते हैं।

March 20, 2007 - Posted by उन्मुक्त | Blog Problems | | 3 Comments

3 Comments »

  1. और मैं सोचता था कि इस चार खंबों वाली थीम को कौन लेना चाहेगा, पर सच आपने इसका सही प्रयोग किया है।
    आपको मालूम है मुझे HTML का क ख ग भी नहीं पता।
    शुरू में मैं एक डेस्कटाप साफ्टवेयर से पोस्ट करता था। एक बार जब बड़े फोंट में की एक पोस्ट को एडिट करने लगा तब इस टैग को देखा। इसके बाद हमेशा इस टैग का प्रयोग करता हूं :)

    Comment by जगदीश भाटिया | March 20, 2007

  2. इससे यह भी पता चलता है कि हिन्दी चर्चा समूहों का कितना फायदा है और हम एक दूसरी की कितनी जलदी सहायता करते हैं।

    लीजिये मुझॆ आज ही जरूरत थी इस HTML कोड की क्यों कि मेरे चिट्ठे का फोंट अचानक छॊटा हो गया था। और आपने मेरी मदद कर दी। :)
    नई थीम खास अच्छी नहीं लगी। अगर फॉटो लगाने हों तो बड़ी मुश्किलें आयेगीइस थीम में।

    Comment by सागर चन्द नाहर | March 20, 2007

  3. उनमुक्तजी,
    नया टेम्पलेट पसंद नही आया :(

    Comment by आशीष | March 21, 2007


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