एक नया प्रयोग

कुछ दिन पहले, रवी जी ने अरुणा ठाकुर को भेजी गयी ईमेल की कॉपी मुझे भेजी। इसमें लिखा था कि

‘Oh!, I just missed Unmukt. He is an active podcaster. He can brief you about Podcast in detail.’

इसके बाद मेरी अरुणा जी से ईमेल पर बात हुई। आप दिल्ली के एक महाविद्यालय में जर्नलिज़म और मास कम्यूनिकेशन विभाग में अध्यापिका हैं और प्रो. अशोक चक्रधर के साथ जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी साइबर पत्रकारिता की प्रकृति और इसके आयाम’ पर शोध कर रहीं हैं। वे इसी के संबन्ध में पॉडकास्ट से जुड़ी सूचना चाहती थी।

अरुणा जी देश की राजधानी दिल्ली में रहती हैं और मैं भारत के एक कोने में, एक छोटे से कसबे में। यह सूचना पॉडकास्ट से जुड़ी है इसीलिये हमने पॉडकास्ट के द्वारा एक नया प्रयोग करने की सोची। वे ईमेल द्वारा सवाल पूछेंगी और मैं पॉडकास्ट के द्वारा उनका जवाब दूंगा। इसके कई फायदे हैं।

  • इस तरह से हम सब इस प्रयोग में योगदान कर सकते हैं। आप मेरी गलती को टिप्पणी द्वारा ठीक कर या अपने चिट्टे पर लिख कर अरुणा जी के शोध कार्य में सहायता कर सकते हैं। ऐसे मैं तो चाहूंगा कि आप मेरे चिट्ठे पर ही टिप्पणी करें – कम से कम कुछ टिप्पणी तो आयेगी🙂 ;
  • इस समय हिन्दी पॉडकास्टिंग नहीं के बराबर है। हो सकता है कि आपको भी पॉडकास्टिंग का जोश आ जाये और यह संख्या बढ़ जाय। सागर जी चिट्ठाचर्चा में यहां पॉडकास्टिंग के बारे में बता रहें हैं और कुछ भविष्यवाणियां भी कर रहें हैं। आने वाले पॉडकास्ट में, इन सब भविष्यवाणियां पर भी चर्चा करेंगे।

अरुणा जी का पहला सवाल है,

‘क्या आप हिन्दी के पहले पॉडकास्टर हैं और आपने कब, तथा क्यों पॉडकास्टिंग करनी शुरू की?’

इसका जवाब आप मेरे बकबक चिट्ठे पर यहां सुन सकते हैं। अरुणा जी के सवालों के जवाब के पॉडकास्ट की सूचना, मेरे इसी छुटपुट चिट्ठे पर आयगी। ऐसे हिन्दी की नवीनतम पॉडकास्ट तथा की नवीनतम हिन्दी चिट्ठों की चिट्ठियों की सूचना हिन्दी चिट्ठे एवं पॉडकास्ट Beta पर आती है। इसकी RSS फीड भी है। इसे आप अपने कंप्यूटर में स्थापित कर सकते हैं या फिर इस वेबसाइट पर जा कर देख सकते हैं।

हिन्दी में पॉडकास्ट के इतिहास बारे में गूगल चिट्ठाकार समूह की यह कड़ी महत्वपूर्ण है। मैंने बकबक पॉडकास्ट क्यों शुरू किया और अलग, अलग औपरेटिंग सिस्टम पर कौन कौन से text to sppech प्रोग्राम हैं इन सब की सूचना यहां है। मेरा पहला पॉडकास्ट ८ जुलाई २००६ को था और यह अठ्ठारवां पॉडकास्ट है – यानि कि दो पॉडकास्ट प्रति माह।

अरुणा जी, हम सब आपके अगले सवाल के इन्तजार में हैं।

बकबक चिट्ठे की सारी ऑडियो क्लिपें, ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

  • Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;
  • Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity में,

सुन सकते हैं। मैंने इसे ogg फॉरमैट क्यों रखा है यह जानने के लिये आप मेरी शून्य, जीरो, और बूरबाकी की चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं। बकबक की सारी ऑडियो क्लिपें भी बाकी चिट्ठों की तरह कॉपीलेफ्टेड हैं। आपको इनका प्रयोग व संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या इस पॉडकास्ट को दें और अच्छा हो कि उस पोस्ट से लिंक दे दें। मुझे और भी प्रसन्नता होगी यदि इनका उपयोग ऐसे लोगों के लिये किया जा सके, जिनकी आखें कमज़ोर हैं।

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

4 Responses to एक नया प्रयोग

  1. उन्मुक्त जी, नमस्कार!

    आपने याद दिलाया तो हमें याद आया।

    मैने पहली ब्लॉग प्रविष्टि लिखी थी १० दिसम्बर २००५ को।

    पहली पोस्ट जिसमे ध्वनि समाहित की थी, सुनियेगा; उम्मीद है पसन्द आयेगी।

    और फ़िर

    एक प्राचीन दुःस्वप्न का बयान

    उसी ने आगे चल के दिये बेशुमार ग़म, जिसने…………..

    आडिओ ब्लागर से मेरा आडिओब्लाग (पोड्कास्ट)|

    विजय का तहे दिल से शुक्रिया

    स्पीकर और साउन्ड इफ़ेक्ट::केरल की राजनीति

    Podcast के लिये, Evoca और Audio Blogger का भी प्रयोग किया था, Audio Blogger से सम्बन्धित एक प्रविष्टि रमण कौल जी ने भी लिखी है।

    Evoca के बारे में देबाशीष जी से सुना था।

    इसी दौरान एक पन्गा भी हुआ..कभी उसके बारे मे भी बोलूंगा, याद करके अच्छा लग रहा है।

    पूरे ७ मिनट लग गये ये टिप्पणी करने में🙂

  2. RC Mishra says:

    यहाँ भी Moderation है 😦

  3. अच्छा है। अनुरोध है कि अपनी बातचीत को बकबक कहना बंद कर दें। मेरे ख्याल में यह गैरजरूरी है। बकबक माने तो होता है बिना मतलब की बातचीत, बकवास। ऐसा शायद आप अपने बातचीत को, सहज विनम्रतावश साधारण बताने , बताने के लिये लिखते हैं। लेकिन यह गैरजरूरी है, मेरी समझ में। आप इसे बकबक के स्थान पर बातचीत लिखिये। फिर यह श्रोता पर है कि वह इसे बकबक समझता है या महान प्रवचन! है कि नहीं!🙂

  4. आशीष says:

    उन्मुक्त जी,

    ये टेम्पलेट बदलीये !पढने मे तकलीफ हो रही है, फांट बडा चाहिये और रंग गहरा चाहिये ! ये अनुरोध नही है मांग है… अन्यथा स्पैम मे टिप्पणी करना शुरू कर दूंगा ॒

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