अज्ञात चिट्ठेकारों की खैर नहीं

इस समय दुनिया का सबसे चर्चित मुकदमा लिनेक्स से सम्बन्धित है। इसमें शक नहीं कि इस मुकदमे का फैसला सूचना प्रद्योकिकी की दिशा बदल देगा। इसके बारे में मैंने विस्तार से चर्चा लिनेक्स की कहानी लिखते समय की है। यह मुकदमा सैंटा क्रुस़ ऑपरेशन (एससीओ) और आईबीएम के बीच है। इस मुकदमे के शुरु होते समय ग्रॉक लॉ नाम की एक वेबसाईट शुरु हुई। इसकी प्रमुख लेखिका सुश्री पॉला जोनस् हैं। यह पैरा लीगल हैं वे इस मुकदमे के हर कदम पर दुनिया को सूचना देती रहती हैं। पर इस सूचना पर हमेशा आईबीएम का ही पहलू रहता है। इसलिये कुछ लोग कहते थे कि वे आईबीएम की तरफ से ही यह चिट्ठा लिख रही हैं।

एससीओ ने न्यायालय के समक्ष आवेदन पत्र दे कर इनहें गवाही देने के लिये सम्मन भिजवाया है। लेकिन यह सम्मन इन पर तामील नहीं हो पाया। वे घर पर नहीं मिली और गॉक लॉ से, कुछ महीने के लिये बिमारी के कारण छुट्ठी ले रखी है।

क्या वे कोई वास्तविक महिला हैं या फिर कोई कल्पना का नाम, क्या मालुम। कुछ इसके बारे में विस्तार से पढ़ना चाहें तो वह यहां, यहां, और यहां है।
अब अज्ञात चिट्ठेकारों की खैर नहीं – कहां जाओगे बच्चू।

मैं! मैं तो हिन्दुस्तान के हर कस्बे में रहने वाला एक आम व्यक्ति हूं। मेरे जैसे तो हर गली में मिल जाते हैं।

सच?

जी हां, बिलकुल सच, खास तो यहां पाये जाते है🙂

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

9 Responses to अज्ञात चिट्ठेकारों की खैर नहीं

  1. Jitu says:

    थीम बहुत शानदार दिख रही है। अच्छी है।

    मै भी गुमनाम नही हूँ, सारी जानकारी इन्टरनैट पर है, ढूंढ सको तो ढूंढ लो।

  2. अच्छा पहचनवायें हैं खास लोगों को. बहुत खूब.. 🙂 🙂

  3. Divyabh says:

    सच है!!! उन्मुक्त जी, लिनेक्स पर तो लिखा है मैं चाहता हूँ मुझे Mac Ox के बारे में भी बताएँ हाँ मैं यह जानता हूँ कि इसपर आप काम नहीं करते है किंतु आशा आपसे ही है…।

  4. सही है लेकिन आपने अपना लेखन का फांट छोटा काहे कर लिया? होली मुबारक!

  5. Tarun says:

    उन्मुक्त जी, थीम तो सही है लेकिन क्या आप मेन एरिया यानि कि पोस्ट वाला एरिया की चौडाई बडा सकते हैं और उसके बाद थोडा सा फोंट साईज भी (ऐसा मेरा मानना है, बाकि तो पसंद अपनी अपनी)। इसके बाद थीम चकाचक हो जायेगी।🙂

  6. उन्मुक्त जी, हम तो बरी हैं। भली-भांति ज्ञात। अरे यहाँ उत्तर प्रदेश में तो आजकल हर गली-मुहल्ले वाले आम लोग ही खास हो रहे हैं – शायद चुनाव तक ही। तो आप यदि उ.प्र. में हैं तो खास ही मानें अपने आप को!

  7. यह Theme के लिये जो सुझाव हैं। उनसे मैं भी सहमत हूँ। फ़ॉंट कुछ बड़ा और मुख्य Area की चौड़ाई दोनों ही कम लगती हैं।

    दाहिने के तीनों कालमों के Contents को एक अथवा दो कॉलमों में रखें तो भी ठीक लगे शायद।

  8. अब क्या मीन-मेख निकालें. मगर फोंट कुछ छोटे लग रहे है.

    अज्ञात रहने वालों की खैर नहीं यह आप लिख रहें है?🙂

  9. थीम बढिया है, राजीवजी के सुझावों पर ध्यान दें। उ प्र का आम तो खास ही होता है, कनाडा के खास की तो बात ही कुछ और!!

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