छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

इंटरनेट (अन्तरजाल) का प्रयोग – मौलिक अधिकार है

अन्तरजाल पर कॉपीराइट का उल्लंघन रोकना मुश्किल है। इसको रोकने के लिये नये नये तरीके ढूंढे जा रहे नये नये कानून भी बन रहे हैं। नये कानूनों की वैधता को भी न्यायालयों में चुनौती दी जा रही है। तकनीक के विकास के साथ, कानून का भी विकास हो रहा है। internet_dog

(Cartoon by Peter Steiner. The New Yorker, July 5, 1993
issue [Vol.69 no. 20] page 61 – taken from here.)

फ्रांस ने कुछ दिन पहले, अन्तरजाल पर कॉपीराइट का उल्लंघन रोकने के लिये थ्री स्ट्राईक कानून (three strike law) बनाया। मोटे तौर से, थ्री स्ट्राईक कानून उन कानूनों को कहा जाता है जो तीन बार या उससे अधिक बार कानून तोड़ने वालों के लिये कड़ी सजा का प्रावधान करते हैं। इन तरह के कानून को अभ्यस्त अपराधी कानून (Habbitual Offender Laws) भी कहा जाता है।

फ्रांस के कानून के अन्दर निम्न सजा देने का प्रावधान था:

  • पहली बार कॉपीराइट का उल्लंघन करने पर चेतावनी;
  • दूसरी बार उल्लंघन करने पर अन्तरजाल की सुविधा से निलंबन; और
  • तीसरी बार उल्लंघन करने पर अन्तरजाल की सुविधा से एक साल का प्रतिबंध,

इस कानून के अन्दर,

  • इस काम को अन्ज़ाम देने की ज़िम्मेदारी, हादोपी (La Haute Autorité pour la diffusion des œuvres et la protection des droits sur Internet, or HADOPI) नामक सरकारी संस्था को सौंपी गयी थी; और
  • आरोपी को सिद्ध करना था कि उसने उल्लंघन नहीं किया है।

कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल (Constitutional council) फ्रांस की सबसे ऊंची संस्था है जो सरकारी काम की वैधता देखती है। इसके सामने, थ्री स्ट्राईक कानून की वैधता को चुनौती दी गयी। इसके मुताबिक ,

यह चित्र कॉन्स्टित्यूसन काउंसिल की वेबसाइट से है।

  1. मानव एवं नागरिक अधिकार घोषणा १७८९ (Declaration on the Rights of Man and of the Citizen 1789) (घोषणा) का अनुच्छेद ११ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of communication and expression) देता है। अन्तरजाल का व्यापक विकास हुआ है और लोकतांत्रिक जीवन में भाग लेने के लिए एवं विचारों और राय की व्यक्त करने के लिये, इसका अपना महत्व है। इसलिये अन्तरजाल का प्रयोग, घोषणा के अन्दर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
  2. घोषणा का अनुच्छेद ९, आपराधिक मामलों व्यक्ति के बेगुनाही का सिद्धान्त (principle of presumption of innocence) स्थापित करता है। यह किसी को कसूरवार नहीं मानता। लेकिन थ्री स्ट्राईक कानून, आरोपित व्यक्ति कसूरवार मानता है और उसे ही अपने को बेगुनाह साबित करने की बात करता है।
  3. इन दो महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकारों को देखते हुऐ, इस तरह की शक्ति सरकारी संस्था हादोपी को नहीं दी जा सकती। इस तरह की शक्ति केवल न्यायालय को ही दी जा सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस फैसले को देते समय, कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल ने कहा कि अन्तरजाल का प्रयोग, घोषणा के अन्दर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। अथार्त यह मौलिक अधिकार है।

क्या अपने देश के न्यायालय भी इसी तरह का फैसला देगें? क्या अपने देश में भी,अन्तरजाल का प्रयोग, अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकारों के अन्दर है? देखिये, यदि यह सवाल अपने देश में उठता है तो न्यायलय का परला किस तरफ भारी होता है।

अंतरजाल की मायानगरी में

टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।।  वेब क्या होता है।। वेब २.०।। सॅमेंटिक वेब क्या है और विकिपीडिया का महत्व।। इंटरनेट (अन्तरजाल) का प्रयोग – मौलिक अधिकार है।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना – यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी – क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी – कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। गोलमाल है भाई गोलमाल।। गाना, विडियो अपलोड करने वालों – सावधान।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा।। कज़ा केस।। ग्रॉकस्टर केस।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।।

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  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
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सांकेतिक चिन्ह
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July 2, 2009 Posted by उन्मुक्त | कानून, सॉफ्टवेयर | , , , , , , | 2 Comments

गाना, विडियो अपलोड करने वालों – सावधान

मैंने कुछ समय पहले उन्मुक्त चिट्ठे पर अंतरजाल की मायानगरी में नामक एक श्रंखला लिखी थी। इस चिट्ठी में वेब के इतिहास, उसके आविष्कार, उसके भविष्य, उसके कारण उठ रही मुश्किलों, सवालों और कानूनी अड़चनों के बारे में चर्चा की गयी है। इसकी एक कड़ी ‘गोलमाल है भाई गोलमाल‘ में बताया था

‘बाज़ार में हर तरह की सीडी मिलती – कानूनी, गैर कानूनी। यदि आप कानूनी वीडियो या संगीत की सीडी खरीदते हैं तो उसे आप सुन तो सकते हैं पर उसे या उसके भाग को किसी वेबसाइट {(जैसे यूट्यूब (youtube) या ईस्निप्स् (esnips)} पर अपलोड कर, उसे सार्वजनिक कर देना, गलत है। यह कॉपीराइट का उल्लंघन है। गाने अपलोड करना कॉपीराइट का उल्लंघन है।’

यह भी सच कि कुछ परिस्थितियों में कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं होगा। इस बारे में आप मेरी चिट्ठी, ‘मुज़रिम उन्मुक्त, हाज़िर हों‘ पर पढ़ सकते हैं।

अमेरिका में, युनिवर्सल म्यूज़िक ग्रुप ने, जैमी थॉमस रैसेट (Jammie Thomas Rasset) नामक महिला पर मुकदमा चलाया कि उसने २४ गानों को अपलोड कर दूसरों को कॉपी करने की सुविधा दी। इस मुकदमे में जैjammie thomas kidsमी का कहना था कि उसने कोई गाना अपलोड नहीं किया था।

जैमी थॉमस रैसेट अपने दो पुत्रों के साथ

जैमी के ऊपर पहले चला मुकदमा, जूरी को ठीक से न निर्देश देने के कारण रद्द कर दिया गया। उसके ऊपर फिर से मुकदमा चलाया गया। उनके पहले वकील ब्राइन टोडर (Brian Toder) ने उन्हे पैसे न मिलने के कारण मुकदमे से अपना नाम, न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद हटा दिया था। जैमी के नये वकील, २५ साल के किवि कामारा (Kiwi Camara) हैं।

कामारा ने १९ साल की उम्र में हावर्ड विश्वविद्यालय में कानून का दाख़िला लिया था। वे हावर्ड से कानून की शिक्षा लेने वाले सबसे कम उम्र के विद्यार्थी है। वे यह मुकदमा बिना कोई फ़ीस लिये कर रहे थे। उनके मुताबिक उन्होंने यह मुकkiwi camaraदमा इसलिये लिया ताकि अन्य मुक़द्दमों में यह नज़ीर बन सके।

जैमी के वकील किवी कामारा

जूरी ने, जैमी की कोई बात नहीं मानी और उस पर ८०,००० डॉलर प्रति गाना, कुल १९ लाख २० हज़ार डॉलर का जुर्माना लगाया गया। यह इस तरह का पहला मुकदमा है।

माना जैमी गलत है।  लेकिन फिर भी क्या एक गाने के लिये ८०,००० डॉलर सही है?

इस बारे में, आप विस्तार से, नीचे ज़मेन्टा के द्वारा बताये सम्बन्धित लिखों में पढ़ सकते हैं।

इस चिट्ठी का पहला चित्र यहां और दूसरा  यहां से लिया गया है।

अंतरजाल की मायानगरी में

टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।। वेब क्या होता है।। वेब २.०।। सॅमेंटिक वेब क्या है और विकिपीडिया का महत्व।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना – यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी – क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी – कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। गोलमाल है भाई गोलमाल।। गाना, विडियो अपलोड करने वालों – सावधान।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा।। कज़ा केस।। ग्रॉकस्टर केस।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।।

ज़ेमन्टा के द्वारा बताये गये सम्बन्धित लेख

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June 27, 2009 Posted by उन्मुक्त | IPR, कानून | , , , , , , , , , , , , | 4 Comments

हाय, यह क्या किया – मेरा दिल ही टूट गया

किशोरावस्था में कदम रखते रखते मैंने, शायद हम सब ने,  आर्ची कॉमिक्स पढ़ना शुरु कर दिया। कॉमिक्स पढ़ने में,   आर्ची कॉमिक्स पढ़ने का जनून सबसे अन्त तक चला। सुपरमैन, बैटमैन, फ्लैश, वंडरगर्ल, टार्ज़न, फैंटम भी पढ़ा पर कहीं यह भी आभास होता था कि सच नहीं हो सकता पर आर्ची कॉमिक्स के साथ यह नहीं लगता था। आर्ची कॉमिक्स पढ़ते पढ़ते, हम अपने मित्रों में, आर्ची, रॅगी, जगहॅड, बॅटी और विरॉनिका को ढ़ूढ़ने लग गये – सब मिल गये पर बस बॅटी ही नहीं मिली। फिर उम्र के साथ यह आर्ची कॉमिक्स का यह जनून भी चला गया।

क्या कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो बॅटी को छोड़ विरॉनिका से शादी कर ले … खैर अमेरिकन और भारतीयों के सोच में कुछ अन्तर तो है।

कुछ दिन पहले पढ़ा कि आर्ची कॉमिक्स प्रकाशकों ने घोषणा की है कि आर्ची, विरॉनिका से शादी कर रहा है। मेरा तो दिल ही टूट गया। क्या कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो बॅटी जैसी प्यारी और बेहतरीन व्यक्तित्व की लड़की छोड़ कर, विरॉनिका जैसी अमीर पर … से शादी कर ले।

मुझे तो बॅटी ही अच्छी लगती थी। बहुत ढ़ूढ़ा पर मिली नहीं – मिलती तो शायद उसी के साथ होता। वह होगी पर वह मुझे नहीं, आर्ची को ढ़ूढ रही होगी। जीवन का यही रोना है हम जिसे ढ़ूढते हैं वह किसी और को ढ़ूढ रहा होता है।

क्या मज़ा है कि मुन्ने की मां आजकल चिट्ठकारी से दूर है। वरना, यह पढ़ कर तो मेरी खाल खींच लेती। आज का खाना और नहीं मिलता :-)

बॅटी, तो आर्ची के पास है, उसके दिल के करीब, फिर भी उसे छोड़, विरॉनिका से शादी कर रहा है – हुंह।

Archie proposes Veronica सच तो यह है आर्ची की शादी बॅटी से और रॅगी की शादी विरॉनिका से होनी चाहिये।  शायद यह अन्तर अमेरिकन और भारतीयों के सोच में है। खैर यदि हम भावुक है और  वे भौतकवादी – हमारे उनके बीच तो कुछ अन्तर तो होगा। यह निर्णय आमेरिकन सोच को परलिक्षित करता है।

लेकिन आर्ची तो अच्छा लड़का है उसे तो जीवन में अच्छी लड़की मिलनी चाहिये – शायद जीवन का सत्य यही है - लड़को को अच्छी लड़की और अच्छी लड़कियों को अच्छे लड़के नहीं मिलते हैं :-(

इस  शादी में अभी समय है। अगस्त में, आर्ची विरॉनिका को  शादी के लिये प्रस्ताव देगा और यह शादी सितम्बर में होगी :-( क्या टल नहीं सकती।

आर्ची, अब भी समय है, क्यों इतनी बड़ी भूल कर रहे हो – विरॉनिका नहीं पर बॅटी तुम्हारे लिये सही है उसी से शादी करो। पैसा ही सब कुछ नहीं होता।

अपने जीवन में भी बॅटी और विरॉनिका ऐसे ही हैं। यह चित्र देख कर समझ गये होंगे। वह कैसी युवती होगी जो सहेली को अपने जैसी ड्रैस में देख कर चिढ़ जाये।

Betty Veronica prom dress

कैसे, कैसे कोई, यह कर सकता है। क्या कोई इतना … हो सकता है।

८ सितंबर कॉमिक्स के अंक का यह चित्र भी देखिये। इसे देख कर लगता है कि यह तय नहीं है कि, आर्ची किस से शादी कर रहा है। क्या कहानी में कुछ मोड़ (twist) है। क्या प्रकाशक लोगों कि प्रतिक्रिया जानना चाह रहें हैं।

Archie Whom will he marry

गोरे तो दोनो के हाथ है, उंगलियां तो दोनो की सुन्दर हैं – आशा पर ही जीवन है :-)

Archie , don’t marry Veronica, marry Betty. She is the right girl for you. Money is not everything. My appeal to Archie comics publishers also -  this is a mistake.

इस चिट्ठी के पहले दो चित्र विकिपीडिया से हैं । तीसरा और पांचवां चित्र Archie & Jughead Bloggin’ with Boys! से लिया गया है। चौथा चित्र आर्ची कॉमिक्स के डाउनलोड पेज से लिया गया है जहां बहुत सारे चित्र हैं जिन्हें आप भी  डाउनलोड कर सकते है।

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सांकेतिक शब्द

दर्शन , पसन्द-नापसन्द, सूचना , Archie, Betty, Veronica, Reggi, jughead,

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June 12, 2009 Posted by उन्मुक्त | दर्शन, विचार, सूचना | , , | 4 Comments

महिलाओं की स्कर्ट छोटी नहीं हो सकती

‘पुरुषों की ब्रीफ तो लम्बी हो सकती है पर महिलाओं की स्कर्ट ब्रीफ नहीं हो सकती। नेकटाई मर्यादित होनी चाहिये मूर्खतापूर्ण नहीं।’

यह विचार थे – १९ मई इंडियानापोलीस में  हुई वकीलों और न्यायधीशों की  वार्षिक मिली जुली बैठक के।

इस बैठक में वकीलों के वस्त्र पहनने के तरीके की बात, ९ जनवरी १९४४ मैं जन्मी, राष्ट्रपती बिल क्लिंटन के द्वारा Federal Judge Joan Lefkow३० जून २००० में नियक्ति की गयी, इलीनॉए की फैडरल न्यायधीश जोन लेफकॉओ (federal judge, Joan H. Lefkow of the Northern District of Illinois) ने उठायी।

फैडरल न्यायधीश जोन लेफकॉओ ने अपने न्यायलय का एक किस्सा बताया जब उनके न्यायालय में एक महिला एस तरह के वस्त्र पहन कर आयी जैसे कि वह किसी व्यामशाला से कसरत कर के आयी हो। बैठक में अन्य न्यायधीशों और वकीलों ने भी इस विषय पर अपने विचार दिये कि कई महिलायें की स्कर्ट और ब्लॉउस इतने छोटे होते हैं कि नज़र उस पर चली जाती है। उनके इस तरह के वस्त्र पहनना आपत्तिजनक है

यहां गौर करने की बात है कि अपने देश में वकीलों (पुरुष एवं महिला दोनो को) की वस्त्र निर्धारित है जिसमें बैन्ड और गाउन पहनना पड़ता है। बैन्ड बन्द गले के कोट, या बन्द गले की शर्ट, ब्लाउस, कुर्ते पर लगाया जा सकता है पर अमेरिका में वकीलों के लिये कोई भी वस्त्र निर्धारित नहीं है। हांलाकि जहां तक मुझे याद पड़ता है कि अपने देश में भी न्यायधीश चन्द्रचूड़ ने एक बार सर्वोच्च न्यायालय में एक महिला को जीन्स वा इतनी लिपिस्टिक लगा कर न्यायालय में आने से मना किया था।

बेथ ब्रिकिंमैन (Beth Brinkmann) अमेरिका में सॉलिसिटर जेनरल के ऑफिस में काम करती थीं। अमेरिक के सर्वोच्च न्यायालय में वे एक बार भूरी स्कर्ट पहन कर बहस करने चली गयीं। इस पर वहां के न्यायधीशों ने आपत्ति की। हांलाकि सॉलिसिटर जेनरल ने उनका बचाव किया पर उसके बाद वहां काम करने वाली सारी महिलाओं ने काले रंग की स्कर्ट पहनना शुरू कर दिया। यह भी प्रसांगिक है कि इस समय बेथ ब्रिकिंमैन का नाम भी सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीश बनाने जाने पर विचार किया जा रहा है।


यह गौरतलब है  कि फैडरल न्यायधीश जोन लेफकॉओ जिनहोंने यह विषय १९ मई में हो रही बैठक में उठाया था वे स्वयं मर्यादित एवं सुरुचिपूर्ण (elegant) वस्त्र पहनने के लिये जानी जाती हैं। उन्होंने महिलाओं को कॉर्परीएटी  (Corporette) चिट्ठे को भी पढ़ने की सलाह दी कि वे इसे देखें कि किस तरह के वस्त्र पहनने चाहिये। मैंने इस चिट्ठे को देखा। इसकी सलाह मुझे अच्छी लगी पर यह पश्चमी वस्त्रों के बारे में बात करती है न कि भारतीय परिधानों के बारे में। आजकल भारत में भी बहुत सी महिलायें पश्चमी वस्त्र पहनना पसन्द करतीं है। उनके लिये यह चिट्टा अच्छा है। मैं तो यह जानना चाहूंगा कि क्या इस तरह का कोई चिट्ठा पुरुषों के लिये या महिलाओं के भारतीय परिधानों के लिये है?

बहस कोई अन्त नहीं है। अमेरिका में न्यायधीश जोन लेफकॉओ की इस टिप्पणी ने वहां पर लैंगिक समानता पर बहस छेड़ दी है। इसके बारे में आप विस्तार से यहां और यहां पढ़ सकते हैं।

मेरे विचार में ऑफिस, न्यायालय पर काम की सारी जगहों पर वस्त्र मर्यादित, और सुरिचिपूर्ण होने चाहिये। हां वे काम के अनुसार भी होने चाहिये। समुद्र तट पर लाइफ गार्ड नहाने योग्य कपड़े ही पहनेगें :-)

न्यायधीश जोन लेफकॉओ का चित्र इस विडियो से है जिसमें वे अपनी मां की कविता के बारे में बता रहीं हैं।

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May 26, 2009 Posted by उन्मुक्त | विचार, सूचना | , , , , , , | 7 Comments

आज़ादी का मतलब

कुछ दिन पहले लिनेक्स फाउंडेशन ने “I’m a Mac” और “I’m a PC” विज्ञापन के जवाब में लिनेक्स समर्थकों से “We’re Linux” विषय पर आधारित लिनेक्स विज्ञापन के लिये एक प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया था। इसका निर्णय तीसरी लिनेक्स कोलेबरेशन सम्मेलन, में किया गया। यह सम्मेलन ८-१० अप्रैल २००९ में सैन फ्रांसिसको में आयोजित की गयी। इसमें इस विडियो को प्रथम पुरुस्कार मिला।


इसके बारे में विस्तार से यहां पढ़ा जा सकता है।

चित्र विकिपीडिया से

April 14, 2009 Posted by उन्मुक्त | IPR, सॉफ्टवेयर | , , , , | 1 Comment

पहेली – बताइये, आज कौन सा दिवस है?

क्या आप जानते हैं कि आज कौन सा दिवस है

उन्मुक्त जी, क्या मालुम आज कौन सा दिवस है, कहां तक याद रखें। रोज ही कोई न कोई दिवस आ जाता है। अब यह कौन सा नया दिवस है?’

यह सच है। जिस दिन देखो उस दिन एक दिवस है।बस इसी लिये मैं भी इसके बारे में बात करना भूल गया। आज मुक्त प्रलेख दिवस (Document Freedom Day) है। यह इसका दूसरा साल है। इस साल इसे, मार्च महीने के आखरी बुद्धवार यानि कि २५ मार्च को, आज, मनाया जाना है। इसके बारे में विस्तार से आप इसकी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं। भारत में भी यह कई जगह मनाया जा रहा है। इसकी सूची यहां है।

‘उन्मुक्त जी, इसे मनाने का क्या कारण है?’

कुछ समय पहले मैंने अपने उन्मुक्त चिट्ठ पर मुक्त मानक और वामन की वापसी श्रंखला लिखी थी। इसकी कड़ियों के लिंक नीचे दिये हैं। आप उसमें जा कर मुक्त मानक के महत्व को समझ सकते हैं। लोगों को, इसी महत्व के बारे में बताने और इसे उजागर करने के लिये, इसे मनाया जा रहा है।

‘उन्मुक्त जी, हम इसके लिये  क्या कर सकते हैं?’

Computer rigeneriamoci
Image by rigeneriamoci via Flickr

इसमें भाग लेने के लिये तो देर हो गयी है पर आप इसके लिये बहुत कुछ कर सकते हैं और यह करना बहुत आसान है। बस आप ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग का ऑफिस स्वीट प्रयोग करने लगें। यह न केवल मुक्त है पर मुफ्त भी। इसे डाउनलोड करें और प्रयोग करने लगें।  आपके सारे प्रलेख अपने आप ही मुक्त मानक में हो जायेंगे।

‘उन्मुक्त जी, आप कह रहें तो जरूर यह केवल लिनेक्स में चलता होगा?’

नहीं, नहीं इसके लिये आपको लिनेक्स पर काम करने की जरूरत नहीं है। यदि आप विंडोज़ या मैक पर भी काम करते हों तो भी ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग में काम कर सकते हैं। यह सारे ऑपरेटिंग सिस्टम पर बहुत अच्छा काम करता है।  है न कितना आसान। तो कब शुरू कर रहे हैं  इसका प्रयोग करना।

यदि आप माइक्रोसॉफ्ट का एम एस वर्ड (MS Word)  प्रयोग करते हैं तो भी आप मुक्त मानक पर काम कर सकते हैं। इसके लिये आप सन माइक्रोसिस्टम के द्वारा निकला हुआ प्लगइन अपने कंप्यूटर में स्थापित कर लें। इसे आप यहां से मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

मुक्त प्रलेख दिवस की शुभकामनाओं के सहित और इस आशा के साथ, कि आप बहुत जल्दी ही ओपेन ऑफिस ऑर्ग और मुक्त मानक का प्रयोग करना शुरू करेंगे।

मुक्त मानक और वामन की वापसी श्रंखला की कड़ियां

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March 25, 2009 Posted by उन्मुक्त | IPR, सॉफ्टवेयर | , , , , , | 6 Comments

आज का दिन महत्वपूर्ण है

‘अरे उन्मुक्त जी, क्यों बोर कर रहे हैं। हमें भी मालुम है कि आज अलबर्ट आइन्स्टीन का जन्मदिन है। केवल आप ही नहीं हैं जिसने जीशान जी की बेहतरीन चिट्ठी पढ़ी है। हमने भी उसे पढ़ा है। दूसरों की बात मत दोहराइये।’

यह सच है कि जीशान जी की अलबर्ट आइन्स्टीन (Albert Einstein) पर लिखी चिट्ठी बेहतरीन है पर यह दिन केवल इसलिये महत्वपूर्ण नहीं है। इस दिन कुछ और भी महत्वपूर्ण बात हुई थी। १५ साल पहले, आज ही के दिन, किसी अन्य का भी जन्म हुआ था।

‘उन्मुक्त जी, सच क्या आज किसी और का भी जन्मदिन है। क्या वह भी आइन्स्टीन जैसा महत्वपूर्ण व्यक्ति है?’

जिसका जन्म हुआ था वह व्यक्ति नहीं है पर आइन्स्टीन के जितना ही महत्वपूर्ण है।

‘अरे मेरी तो उत्सुकता बढ़ती जा रही है। जल्दी बताइये कि किसका जन्म हुआ था?’


१५ साल पहले, लिनूस टोरवाल्ड (Linus Torvald) ने लिनेक्स स्तर १.०  (Linux version 1.0) का करनल पोस्ट किया था। हांलाकि इस बारे में उन्होंने सूचना अगस्त १९९१ में प्रकाशित की थी।  आज के दिन लिनेक्स का जन्मदिन हुआ था। है न महत्वपूर्ण बात। यह तो आप को मालुम ही कि लिनेक्स ही वह जगह है जहां पेंग्युन उड़ सकती हैं और लिनेक्स प्रेमी पुरुष – ज्यादा कामुक और भावुक ? ? ? होते हैं :-)

just-for-fun

यदि आप यह देखना चाहते हैं कि लिनूस ने क्या प्रकाशित किया था तो आप यहां देख सकते हैं।

यदि आप इन सब के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहें तो लिनूस टोरवाल की आत्म कहानी  ‘Just for fun: The story of an Accidental Revolutionary ‘ पढ़े। यह बहुत अच्छी तथा प्रेरणादायक पुस्तक है। इसमें कुछ चैप्टर बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के बारे में हैं। यह कुछ हमारे पुरातन विचारो से मेल खाते हैं और पश्चिम के समाज पर, जिस तरह से इन अधिकारों की परिभाषा तथा व्याख्या की जाती है, नयी तरह से प्रकाश डालती है – पढ़ कर देंखें।

ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर के प्रोग्राम और लिनेक्स के डिस्ट्रीब्यूशनों के बारे में इस विडियो को देखें।

‘उन्मुक्त जी, क्या इसके अतिरिक्त आज के दिन कुछ और भी हुआ है?’

हुआ तो है।


किसी भी वृत की परिधि और व्यास का अनुपात निश्चित संख्या ३.१४१५९२६… होता है। इसे ग्रीक वर्ण पाई (Pie) (littlepi) के द्वारा दर्शाया जाता है। गणित प्रेमी लोग, आज के दिन (१४ मार्च) को पाई दिवस (Pie day) की तरह मनाते हैं और लोगों को इसके प्रति जागरुकता लाने का प्रयत्न करते हैं।


‘उन्मुक्त जी, १४ मार्च को पाई दिवस क्यों मनाया जाता है?’

हमारे यहां तारीख लिखते समय, सबसे पहले दिन, फिर महीना लिखा जाता है पर अमेरिका में यह उल्टा होता है। वहां पहले महीना, फिर दिन लिखा जाता है। यदि पाई के पहले अंक को महीना माने और उसके बाद के दो अंको को तारीख माने, तो यह १४ मार्च होता है। उसके बाद के अंकों को समय मान कर उस दिन को १४ मार्च पर उसी समय इस दिन को मनाने की बात रहती है।  अमेरीकी संसद ने इस साल इस दिन को राष्ट्रीय पाई दिवस घोषित कर दिया है ताकि आज के दिन विद्यार्थियों में पाई एवं गणित के प्रति जागरुकता लाने के लिये प्रोत्साहित किया जा सके। इसके बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं।

इस चिट्ठी पर अलबर्ट आइन्स्टीन और लिनूस टोरवाल्ड का चित्र विकिपीडिया से है और उसी शर्तों पर प्रकाशित किया गया है।

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March 14, 2009 Posted by उन्मुक्त | गणित/पहेली, जीवनी, पुस्तक समीक्षा, विज्ञान, सूचना, सॉफ्टवेयर | , , , , , , , , , , , , , , , , | 8 Comments

ल्यूलिन, आकाश में नया हरा पुच्छल तारा

क्या आप अरविन्द मिश्र जी जानते हैं?

‘मैं तो कई अरविन्द मिश्र को जानता हूं। आप किसके बारे में बात कर रहे हैं?’

भाई मैं तो केवल एक को ही जानता हूं। वही, जो साई ब्लॉग चलाते हैं। वे ‘Indiansciencefiction‘ नाम का एक ग्रूप चलाते हैं। मैं भी इस ग्रुप का सदस्य हूं पर सक्रिय नहीं हूं। क्या करूं अंग्रेजी में है :-( इसी ग्रुप की सूचना से, मुझे इस नये पुच्छल तारे ल्यूलिन (Lulin) के बारे में पता चला।

यह चित्र यहां से लिया गया है।

इसे Karzaman Ahmad ने Langkawi National Observatory, Malaysia के लिये खींचा है।

इस पुच्छल तारे की खोज चीन और कोरिया के खगोलशास्त्रियों ने की है। यह हरे रंग का खूबसूरत पुच्छल तारा है। इसका नाम कोरियन वेधशाला ल्यूलिन के नाम पर रखा गया है क्योंकि वहीं इसका सबसे पहले चित्र खींचा गया था।

यह पुच्छल तारे को देखने का सबसे अच्छा समय २४ फरवरी को रात ३ बजे से है। उस दिन आकाश में वह दक्षिण की तरफ आकाश में लगभग ३० डिग्री पर दिखायी पड़ेगा। यह एकदम दक्षिण तो नहीं, कुछ पूरब भी और शनि के पास रहेगा।  आकाश का में वह इस जगह होगा।

यह नक्शा नासा के सौजन्य से

‘उन्मुक्त जी, यह हरे रंग का क्यों है?’

इस पुच्छल तारे की नाभि में साइनोजन (Cyanogen) गैस और डाइएटॉमिक कार्बन {Diatomic Carbon (C2)} है। लगभग शून्य जगह में, जब इन दोनो पर, सूरज की किरणे पड़ती हैं तो यह पदार्थ हरे रंग में चमकने लगते हैं। इसलिये यह हरा लगता है।


इस पुच्छल तारे के बारे में आप विस्तार से नासा की इस सूचना में पढ़ सकते हैं। यदि नासा की सूचना सुनना चाहते हों तो यहां चटका लगायें।

‘उन्मुक्त जी, क्या आपने इसे देखा?’

मैं आज सुबह तीन बजे उठा था पर इसे देख नहीं पाया। बिजली की बत्तियां भी जल रहीं थीं और आकाश में बादल थे। कल फिर उठ कर देखने की कोशिश करूंगा।

पुच्छल तारे से संबन्धित सूचनायें

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi

(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)

यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।

बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।

सांकेतिक चिन्ह

Astronomy, Astronomycomet, science, विज्ञान, खगोलशास्त्र, विज्ञान, विज्ञान कहानी,  ज्ञान विज्ञान, पुच्छ्लतारा,

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February 23, 2009 Posted by उन्मुक्त | खगोलशास्त्र, विज्ञान, सूचना, हिन्दी | , | 8 Comments

आभार … धन्यवाद

कुछ समय पहले, मैथली गुप्त जी ने, कैफे हिन्दी नामक एक वेबसाइट शुरू की। मैं न तो मैथली जी को, न ही  इस वेबसाइट के बारे में जानता था। दो साल पहले संजय जी की अक्षरधाम पर लिखी एक चिट्ठी से कैफे हिन्दी और आपके बारे में पता चला। कैफे हिन्दी पर कुछ चिट्ठाकारों के लेख, चिट्ठकारों की चिट्ठियों के लिंक के साथ थे। संजय जी ने इस बात पर आपत्ति जतायी थी कि यह कॉपीराइट का उल्लघंन है। कई चिट्ठकारों को इस पर आपत्ति थी। किन को आपत्ति थी यह आप उस चिट्ठी की टिप्पणी में पढ़ सकते हैं।


कैफे हिन्दी में मेरे भी कुछ लेख थे पर मुझे इस बारे में कोई आपत्ति नहीं थी। मेरे विचार में यह एक अच्छा कदम था। इससे हिन्दी आगे ही आयगी। ऐसे भी मेरी चिट्ठियां कॉपीलेफ्टेड हैं। मेरे अलावा कुछ अन्य भी मेरी विचारधारा के थे। अक्षरग्राम पर संजय जी की चिट्ठी के बाद,   मेरे एक लेख ‘२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान‘ पर मैथली जी की टिप्पणी आयी,

‘श्री उन्मुक्त जी,

हम समाचारों से परे, हिन्दी रचनाओं की एक वेबसाईट [कैफे हिन्दी] बना रहें हैं। इस वेबसाईट का उद्देश्य कोई भी लाभ कमाना नहीं है।
यह दिखाने के लिये कि इस वेबसाईट का स्वरूप कैसा होगा, हमने प्रायोगिक रूप से आपके कुछ लेख इस वेबसाईट पर डाले हैं। यह वेबसाईट मार्च के दूसरे सप्ताह में विधिवत शुरू हो जायेगी। आपका ई-मेल पता मेरे पास न होने के कारण में कमेंट के माध्यम से ये संदेश आपको भेज रहा हूं। क्या हम आपके ब्लोग रचनायें लेख के रूप में इस वेबसाईट पर उपयोग कर सकते हैं?

आपने लिखा है कि आपके हर चिठ्ठे की तरह इस लेख की सारी चिठ्ठियां भी कौपी-लेफ्टेड हैं। लेकिन फ़िर भी हम आपकी विधिवत अनुमति एवं सुझावों के इन्तजार में हैं।

आपका

मैथिली गुप्त’

मेरा जवाब था,

‘प्रिय गुप्त जी, मेरी चिट्ठियां कौपीलेफ्टेड हैं आपका स्वागत है।

आप इन्हें प्रयोग कर सकते हैं।

उन्मुक्त’


लेकिन हिन्दी जगत पर कॉपीराएट के उल्लघंन का तूफान नहीं ठहरा। इस बारे में, कई अन्य चिट्ठाकारों ने स्वतंत्र चिट्ठियां भी लिखीं।  मुझे लगा कि चिट्ठकार बन्धुवों की आपत्ति अन्तरजाल पर हिन्दी का बढ़ावा न होकर रोड़ा बन रही है तब मैंने एक चिट्ठी ‘डकैती, चोरी या जोश या केवल नादानी‘ नाम से लिखी थी। मेरे विचार से कैफे हिन्दी एक अच्छा कदम था। मुझे मैथली जी अच्छे व्यक्ति लगे। मुझे लगा कि वे हिन्दी की सेवा करेंगे।


जिस समय उक्त चिट्ठी लिखी गयी थी उस समय तक भी न तो मैं  मैथली गुप्त जी को जानता था, न ही उनसे मेरा कोई परिचय था, न ही यह पोस्ट उनके कहने पर लिखी गयी थी। ऊपर लिखी टिप्पणी के अलावा हमारे बीच कोई ई-मेल का आदान प्रदान भी नहीं हुआ था।


मेरी उक्त चिट्ठी लिखने के बाद उनसे जान पहचान शुरू हुई। लेकिन अभी तक मेरी उनसे मुलाकात नहीं हुई है पर हम अक्सर उनसे ई-मेल पर बात करते हैं। अधिकतर तो मैं ही उनसे कुछ करने के लिये प्रार्थना करता हूं।


कुछ समय पहले मैं ‘You are Too Kind – A Brief History of Flattery‘ नामक पुस्तक की समीक्षा लिखना चाह रहा था। चाटुकारिता के बारे में शायद यह सबसे  अच्छी लिखी पुस्तक है। १९८० के दशक में यह कई साल सर्वोत्तम पुस्तकों की सूची में रही।


इस पुस्तक की भूमिका के रूप में मैंने एक चिट्ठी ‘सिरफिरा उन्मुक्त आपको बेवकूफ बना रहा है‘ नाम से लिखी। मैंने, इस चिट्ठी को,  एक हैकर  की तरफ से, यह कहते हुऐ प्रकाशित की कि उसने मेरा चिट्टा हैक कर लिया है। मैं उसके बाद यह बताना चाहता था कि मैंने चाटुकारिता के द्वारा अपना चिट्ठा वापस पाया। उसी के साथ इस पुस्तक के बारे में लिखना चाहता था।


मैथली जी का ई-मेल मेरे पास आया कि वे मेरा चिट्टा वापस दिलवा सकते हैं। मैंने उनसे माफी मांगते हुऐ सही बात लिखी। मुझे लगा कि मैंने उन्हें जबरदस्ती परेशान किया पर इससे यह पता चलता है कि वे दूसरों के बारे में चिन्तित रहते हैं और उनके भले के बारे में सोचते हैं।


मुझे हमेशा लगता था कि मैथली जी हिन्दी के शुभचिन्तक हैं और वे अच्छा कार्य ही करेंगे। उनके बारे में, मेरा अनुमान सही निकला। कुछ दिनो बाद पता चला कि मैथली जी ने हिन्दी फॉन्टों के लिये भी निःशुल्क कार्य किया है।  इस समय वे एक बेहतरीन हिन्दी फीड एग्रेगेटर बलॉगवाणी चला रहे हैं।


कुछ चिट्ठाकारों का कहना था कि मैं अपना चित्र भी चिट्ठे पर डालूं। मैं गुमनाम रह कर चिट्ठाकारी करता हूं इसलिये मैं अपना चित्र नहीं डालना चाहता था। कैफे हिन्दी में लेखों के साथ बेहतरीन चित्र होते हैं जिससे उस लेख का आकर्षण बढ़ जाता है। मैं इस तरह के चित्र नहीं बना पाता हूं इसलिये मैंने उनसे प्रार्थना की क्या वे मेरी और मेरी पत्नी का कार्टून चित्र बना सकते हैं।


मैथली जी ने कहा कि जरूर – उन्होंने हमारे कुछ चित्र चाहे। मैं उन्हें भी अपने चित्र  नहीं देना चाहता था। मैंने उनसे कहा,

‘आपके मन में हमारे बारे में जिस प्रकार के व्यक्ति का चित्र आता हो वैसा ही बना दें।’

उन्होंने हमारे यह चित्र हमारे बारे में अपनी कल्पना से बनाये।

unmukt-munne-ki-maa

मेरे इस चिट्ठे, ‘उन्मुक्त‘ एवं ‘लेख‘ चिट्ठे; मेरी पॉडकास्ट ‘बकबक‘; और मेरी पत्नी के चिट्ठे ‘मुन्ने के बापू‘ पर यही चित्र हैं जो उनके द्वारा बनाये गये हैं। मैंने अपना आभार प्रगट के लियेहिन्दी चिट्ठाकारिता, मोक्ष, और कैफे हिन्दी नाम से चिट्ठी भी लिखी।


मैं यौन शिक्षा और सांख्यिकी  के बारे में कुछ लिखना चाहता था। संख्यिकी के कुछ सिद्धांतों को समझाने के लिये चित्र की आवश्यकता थी। मैथली जी ने इस चिट्ठी के लिये भी एक खास चित्र बनाया।


मैं अक्सर लोगों से ई-मेल से बात करता हूं  मुझे लगा कि मैं इन ई-मेलों को भी प्रकाशित करूं। मैंने इसके लिये ई-पाती नाम की अलग श्रेणी बनायी है। मैंने सबसे पहले अपनी बिटिया रानी ‘परी’ (जो कि वास्तव में मेरी बहूरानी है) के साथ होने वाली ई-मेलों को प्रकाशित करना शुरू किया। मैं अपने बेटे ‘मुन्ना’ के साथ हुई बातचीत को जल्द ही प्रकाशित करूंगा।


मुझे लगा कि यदि इन चिट्ठियों के साथ मेरी बहूरानी एवं बेटे के कार्टून चित्र हों तो उन चिट्ठियों का आकर्षण बढ़ जायगा। इसलिये मैंने मैथली जी से उनके चित्र बनाने के लिये प्रार्थना की।


मैंने अपने बेटे और बहूरानी के चित्र तो मैथली जी के पास नहीं भेजे पर उन्हें उनके बारे में कुछ तथ्यों को बताया,

  • मेरी बहूरानी और बेटा विदेश में हैं।
  • मेरा बेटा आईआईटी कानपुर से इंजीनियर हैं। उसने शोध पूरा कर लिया है और पोस्ट डॉक कर रहा है और जिस तरह से इस प्रकार का एक साधरण सा लड़का होता है वह उसी प्रकार से है।
  • मेरी बहूरानी भारतीय मूल की कैनेडियन युवती है। उसने भौतिक शास्त्र की शिक्षा कैनाडा से ली है और इस समय अमेरिका में भौतिक शास्त्र पर शोध कर रही है। वह पाश्चात्य सभ्यता के कपड़े पहनती है पर चित्र में वे उसे सलवार कुर्ते में दिखा सकते हैं।

मैथली जी ने इसी वर्णन से उनके यह चित्र बनाये हैं।

munna-pari

अब आप इन्हीं चित्रों को उनसे संबन्धित चिट्ठियों में पायेंगे।


लीसा से मेरी मुलाकात वियाना में हुई थी। मैंने  उससे भी ई-मेल पर की गयी बातचीत प्रकाशित करता रहता हूं। मुझे लगा कि मैं लीसा का भी इसी तरह का चित्र प्रकाशित करूं। मैंने मैथली जी के पास लीसा का वास्तविक चित्र भेजा। उन्होंने लीसा का यह चित्र बना कर भेजा है।

lisa

आगे से लीसा से संबन्धित ई-मेल पर यही चित्र रहेगा।


मैथली जी को मेरा धन्यवाद, मेरा आभार। वे हिन्दी की सेवा करते चलें और हम सब के लिये सुन्दर चित्र बनाते चलें – ऐसी प्रार्थना, ऐसी कामना।


‘उन्मुक्त जी क्या हिन्दी चिट्ठकार बंधुवों और अन्य लोगों से भी ई-मेल पर उस तरह से बात करते रहते हैं जैसे आप अपनी बहूरानी, लीसा, और बेटे के साथ।’

हां करता तो हूं।

‘तो क्या आप उनके साथ हुआ वर्तालाप प्रकाशित करेंगे।’

सारी ई-मेल में तो नहीं पर कुछ ई-मेल में जरूर ऐसी बात रहती है जो कि प्रकाशित करने लायक होती है। लेकिन कई लोग उसको प्रकाशित करने के लिये मना करते हैं पर शायद बिना नाम बताये प्रकाशित करने की अनुमति दे दें। इंतज़ार कीजिये।

February 7, 2009 Posted by उन्मुक्त | विचार, सूचना | , , , , , | 11 Comments

मुझे मिलना उस मोड़ पर

‘मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां केवल हम दोनो हों
वो मोड़ ऐसा हो,
जहां से मैं, न पीछे हट सकूं,
और न ही आगे जा सकूं,
बिन संग तुम्हारे।


मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहा बसंती हवा के झोके,
मुझे मीठी सी कशिश में बांध ले
और तुम्हे भी रंग ले,
अपने रंग में।

मुझे मिलना उस मोड़ पर
जब मै बिखर जाऊं ,
अमलताश की भांति
और तुम समेट लो,
अपनी बाहों में मुझे।

मुझे मिलना उस मोड़ पर
जब तुम सुनना चाहो
कुछ दिल से,
और मै कुछ कहना चाहूं
दिल से।

मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां जोर से बारिश आ रही हो,
जहां पर सिर्फ़ और सिर्फ़ हम दोनो हों,
हंसते हंसते, प्यार से मीठी, मीठी बातें करते।
सुनते उस लम्बे से रास्ते में,
सिर्फ़ वह आवाज,
जो हमारे दिल को,
खुश कर देती है।

मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां हम दोनो के लिये,
पूरी जगह है।
है जगह, यादों के लिए
बातों के लिए,
हो जगह, प्यार के लिए।
सिर्फ़ उस मोड़ पर मिलना मुझे!’

‘उन्मुक्त जी, क्या बात है लगता है कि ‘जॉगरस् पार्क’ या फिर ‘चीनी कम’ फिल्म देख कर आ रहें हैं?’

नहीं भाई, नहीं बहना नहीं।  मैं और कविता -  कवितायें तो गागर में सागर भरती हैं। कविता लिखना मेरे बस की बात नहीं है।  यह कविता मैंने नहीं लिखी है। यह तो मैंने  चुरायी है। इस चिट्ठी के चित्र भी चुरायें हैं।

‘चुरा ली है! आप, यह क्या कह रहे हैं?’

इसे अपने चिट्ठे पर डालने से पहले सहाना जी (इस कविता की रचयिता)  से अनुमति नहीं ली है। इसे तो चुराया जाना  ही कहा जायगा।

‘उन्मुक्त, यह  सहाना जी कौन हैं? कभी इनकी कोई हिन्दी में चिट्ठी नहीं पढ़ी? क्या यह चित्र उनका है?

मैं नहीं जानता कि यह चित्र उनका है अथवा नहीं। यह चित्र तो उनके परिचय से है। वैसे मुझे तो यह चित्र मुझे कलाकारा कैटरीना कैफ की तरह लग रहा है :-)

सहाना जी, बैंगलोर की रहने वाली हैं पर आजकल मुम्बई में पढ़ती हैं। वे अंग्रेजी में चिट्ठाकारी करती हैं पर कभी कदा हिन्दी में चिट्ठियां लिख देती हैं। बस, उनकी हिन्दी की एक चिट्ठी मेरे उन्मुक्त हिन्दी चिट्ठे फीड एग्रेगेटर के पकड़ में आ गयी। वहां पहुंच कर जब उनके चिट्ठे ‘Exhibiting Hidden Talents!!‘ को देखने लगा तो उनके द्वारा प्रकाशित, यह  कविता पसन्द आयी। इसमें रुमानी भावनाओं का अपना ही अन्दाज़ है। वहीं से यह कविता और पहला चित्र चुराया है। मैंने कविता के शब्दों में कुछ बदलाव किये हैं। उनकी मूल कविता वहीं, उसी चिट्ठी पर पढ़ें। कुहू जी  भी,  मुझें इसी तरह से अन्तरजाल पर मिली थीं। मुझे हिन्दी में नियमित रूप से चिट्टाकारी करने वाले कई चिट्ठाकार भी इस तरह से मिले।

मैंने सहाना जी एक चिट्ठी पर टिप्पणी की कि आप बहुत जल्द हिन्दी में चिट्ठाकारी करने लगेंगी। उनका जवाब था,

‘Oh God! It’s unimaginable to blog in Hindi. Of course,  I’ve completed Hindi BA (taking Private Exams) and Sanskrit BA (Private Exams).’

हे भगवान। हिन्दी में चिट्ठाकारी करना तो कल्पना से भी बाहर है। हांलाकि, मैंने हिन्दी और संस्कृत में स्नातक (प्राइवेट) डिग्री ली हुई है।

मेरा कहना कि सहाना जी हिन्दी में चिट्ठाकारी करेंगी, इसलिये था कि वे लिखती अच्छा हैं पर उसके अनुरूप उनके चिट्ठे में टिप्पणी नहीं है। हिन्दी चिट्ठाकार एक दूसरे को प्रोत्साहित करने के लिये ज्यादा टिप्पणी करते हैं, जो कि अच्छी बात है। अब टिप्पणियां किसे पसन्द नहीं हैं। मुझे भी – चाहें मैं जितना कहूं कि टिप्पणियां न मिलने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता :-)

मैंने उन्हें बताया कि मैंने एक शर्त लगायी है कि आप हिन्दी में चिट्टाकारी करेंगी। यदि मैं शर्त हार गया तो एक नवयुवती  से हारने के कारण आपके बारे में एक खास चिट्ठी लिखूंगा। इस पर, मेरे परिवार के सदस्य (मेरी पत्नी, मेरे बेटा, और मेरी बहूरानी) बहुत हसेंगे।

‘उन्मुक्त जी, तब तो लगता है आप हार गये क्योंकि यह चिट्ठी तो खास सहाना जी के बारे में है।’

बिलकुल नहीं। मैं हारा नहीं हूं। मैं तो जीत गया हूं। सहाना जी के लिये यह खास चिट्ठी जीतने की खुशी में लिख रहा हूं।

‘अरे उन्मुक्त जी यह आप कैसे कह सकते हैं। कहां है सहाना जी का हिन्दी का चिट्ठा। जरा हम भी तो देखें :-)

भाई जी, बहना जी – मैं तो इतना जानता हूं कि सहाना जी ने मुझे बताया है कि,

‘I have composed many poems in Hindi.  … My first romantic poem was ‘Love at First Sight’. I got the title but was struggling for the content. I took, 5 hours to interpret my imagination. … I take some time to step into any new one. … I may take some time for Hindi Blog! Don’t worry, you will win your   bet. I won’t allow an elderly person to loose the bet.  No one will  laugh at you rather they will appreciate you!’
मैंने हिन्दी में, बहुत सारी कवितायें  लिखी हैं। मेरी पहली रुमानी कविता ‘पहली मुलाकात में प्यार’ (लव ऍट फर्स्ट साइट) थी। मुझे शीर्षक तो मिल गया पर अपनी कल्पना को शब्द देने में ५ घंटे लगे। मुझे नयी कविता लिखने में समय लगता है। हो सकता है कि मुझे हिन्दी में  चिट्ठा लिखने में समय लगे।  घबराईये नहीं, मैं आपको हारने नहीं दूंगी। आप पर कोई नहीं हसेगा, लोग आपका आदर करेंगे।

अन्तरजाल पर कहीं पढ़ा था कि हिन्दी के ६५४० चिट्ठे हैं। चलिये, बहुत जल्द ही ६५४१ होने वाले हैं।

हमारी बातचीत ई-मेल के द्वारा नहीं हुई है पर एक दूसरे के चिट्ठे पर टिप्पणी के द्वारा हुई है जो कि, अन्तरजाल पर कोई भी पढ़ सकता है। इसलिये यह मत सोचियेगा कि मैं किसी की व्यक्तिगत ई-मेल सार्वजनिक कर रहा हूं। हां, मैंने कुछ भाषा सम्पादित की है।  नयी उम्र के लोगों की एसएमएस (SMS), मुझे कम समझ में आती है :-)

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February 4, 2009 Posted by उन्मुक्त | विचार, सूचना | , | 9 Comments