क्या आप अपनी पत्नी के लिये उपहार खरीद रहे हैं

चेतावनी: यह चिट्ठी केवल पुरुषों के लिये है। इसे पढ़ने के लिये महिलायें प्रतिबन्धित हैं :-)


जे. सी. पेनी अमेरिका में दुकानों की चेन है। वहां आजकल मन्दी चल रही है। कुछ दिन पहले खरीदारी को बढ़ावा देने के लिये उन्होंने एक विज्ञापन बनाया था। इसे पहले डॉगहाउस डाट कॉम में डाला पर अब यह यू ट्यूब में भी डाल दिया गया है। यह विज्ञापन बेहद लोकप्रिय हो गया है। इसे अभी तक कोई १७ लाख लोग देख चुके हैं।

यह विज्ञापन कुछ चंचल सा, कुछ ओछा, कुछ उथला सा है। शायद इसी कारण यह इतना पसन्द किया गया। यह न केवल पुरुषों को भाया पर महिलाओं को भी। कुछ महिलाओं को नहीं पसन्द आया। यदि आप महिला हैं और पसन्द न आये तो बाद में न कहियेगा कि मैंने पहले से आगाह नहीं कर दिया था।

इस विज्ञापन में, एक पत्नी पति को उसे उपहार देने के लिये डॉगहाउस में बन्द करवा देती है। उसके पति ने क्या उपहार दिया था कि उसे यह सजा मिली। उसे क्या उपहार देना चाहिये कि वह वहां से निकल सके। आप स्वयं देख लीजिये।

इसके बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकते हैं।


मैंने कुछ दिन पहले मुन्ने की मां को उसके जन्मदिन पर, उसे नयी कार मारुति की ए स्टार (Maruti A Star) उपहार में दी है। भारत-III की शर्तें युरो-IV (Euro-IV) के बराबर हैं। यह २०१० से दिल्ली में सबसे पहले लागू किया जायगा – दिल्ली में सबसे ज्यादा कारें है। मारुति के अनुसार, उनकी ए स्टार ने केवल युरो-IV की शर्तों को पूरा करती है पर यह उससे भी आगे है। यह यूरो-V (Euro-V) की शर्तों को पूरा करती है। युरोपियन इ.ल.वी. निर्देशों{European ELV (End of Life vehicle) specification} के अनुसार कार बनाने वालों को यह देखना चाहिये कि कार उस तरह सामग्री से बनायी जाय जो कि फिर से प्रयोग में लायी जा सके। मारुति के अनुसार, भारत में ए स्टार ही केवल इन निर्देशों को सन्तुष्ट करती है। इसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री ८५% पुनः प्रयोग में लाया जा सकता।

मैं नहीं कह सकता कि यह सच है या नहीं, क्योंकि यह केवल मारुति का कहना है। किसी स्वतंत्र संस्था का नहीं। यदि मारुति की बात ठीक है तो ए स्टार, बिजली की या फिर मिली जुली (Hybrid) कार को छोड़ दें तो, यह पर्यावरण को सबसे कम प्रदूषित करने वाली कार होगी। मैं मुन्ने की मां को बिजली की या फिर मिली जुली कार (Hybrid car) ही देना चाहता था पर वह अभी हमारे कस्बे में नहीं मिलती है।

इस विज्ञापन देख कर मुझे डर लगने लगा कि कहीं वह भी मुझे डॉगहाउस में न बन्द करवा दे।

maruti-a-star1

मेरा शक सही निकला। मुझे भी डॉग हाइस में बन्द कर दिया गया है – मुझे ज्लद ही कुछ करना होगा :-)

सांकेतिक चिन्ह

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परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

3 Responses to क्या आप अपनी पत्नी के लिये उपहार खरीद रहे हैं

  1. हा…. हा…मगर मैं मुन्ने की माँ को बधाई तो जरूर दूंगा भले ही मैं भी आपके साथ डॉग हाऊस में ही ना आ जाऊं !

  2. रवि says:

    अच्छा, कार आपने तोहफे में भाभी जी को दी, और अब आप उनसे ये तो नहीं कहते फिरते कि हनी, तुम्हें कार्य पर, बाजार या जहाँ कहीं भी हो, जाना हो तो मुझसे कहना, मैं तुम्हें छोड़ दूंगा?

    बढ़िया, ड्रीम कार के लिए बधाई. अब भले ही उसे आप चलाएँ – खुशी-खुशी!

    रवी जी, मेरे पास दो कारें थीं। मेरी कार अलग थी। मेरी कार के लिये ड्राईवर भी है। मेरी दूसरी कार आल्टो थी जो मेरी पत्नी चलाती थी वह उसी पर पढ़ाने जाती थी। मैंने आल्टो बेच दी और उसकी जगह यह कार खरीदी है। हां आल्टो मेरे नाम थी पर यह कार मैंने पत्नी के नाम की ही ली है। अगली बार उसे स्वयं अपने पैसे से दूसरी लेनी होगी :-) – उन्मुक्त

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