हम सुन्दरता की देवी पर पहुंच रहे हैं

मैंने कुछ दिन पहले एक चिट्ठी ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है‘ नाम की लिखी थी। जिसमें माइक्रोसॉफ्ट के जनरल मैनेजर, बिल हिफ, के बयान का उल्लेख किया था कि माइक्रोसॉफ्ट अपने शेएर्ड लाइसेंसेस् को ओपेन सोर्स इनिशिएटिव के सामने रख रहा है ताकि उस लाइसेंस के अन्दर प्रकाशित सॉफ्टवेर को ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर माना जा सके।माइक्रोसॉफ्ट एक मालिकाना सॉफ्टवेर की कम्पनी है और उसके द्वारा यह कदम, सूरज के पश्चिम से उगने के समान है। इसीलिये उस चिट्ठी का शीर्षक ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है’ दिया था। आज अंतरजाल पर विचरण करते ग्लिन मूडी की यह चिट्ठी भी पढ़ने को मिली कि माइक्रोसॉफ्ट ओपेन सोर्स को क्यों अपना रहा है।

‘उंह हूं, सुन्दरता की देवी का इन सबसे क्या संबन्ध – यह तो हिटस् पाने का चक्कर लगता है।’

शुक्र ग्रह

मूडी ने पांच साल पहले ही कह दिया था कि माइक्रोसॉफ्ट के वेबसाइट पर Open Source at Microsoft नाम का पेज होगा जो कि इस समय है। इनके अनुसार माइक्रोसॉफ्ट कई कारणों से ओपेन सोर्स अपना रहा है।

  • माइक्रोसॉफ्ट को पहले लगता था कि यह मात्र एक फैशन है जो कि चला जायगा उसे यह लगने लागा है कि पर यह सच नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट के अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के मुताबिक Open source is neither an industry fad, nor a magic bullet;
  • माईक्रोसॉफ्ट तकनीक के नये तरीकों को अपनाना चाहता है क्योंकि उसके द्वारा पारम्परिक तरीकों से सॉफ्टवेर बनाने की अन्तिम तिथी कभी पूरी नहीं हो पा रही है;
  • ओपेन स्टैंडर्ड एक आंदोलन सा है जिसका फायदा माईक्रोसॉफ्ट लेना चाहता है।

मूडी इसके अतिरिक्त कुछ और भी कारण बता रहें हैं आप उसे खुद पढ़ सकते हैं। वे सब बातों का यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अन्त में माईक्रोसॉफ्ट पूरी तरह से ओपेन सोर्स को अपना लेगी। यानि कि सूरज पश्चिम से निकलने लगेगा।

‘इसका इस शीर्षक से क्या मतलब है। बस जिसे देखो वही किसी तरह से हिटस् के चक्कर में है।’

वीनस सुन्दरता की देवी है। इसीलिये, आकाश में, सूरज डूबने के बाद, जो सबसे सुन्दर दिखायी पड़ता है उसका नाम वीनस है। इसको evening star और morning star भी कहा जाता है क्योंकि यह केवल शाम को या फिर सुबह ही दिखायी पड़ता है। यह तारा नहीं है पर हमारे सौर मंडल का सदस्य ग्रह है जिसे हिन्दी में शुक्र कहते हैं। यह सारे ग्रहों में अनोखा है। यह पश्चिम से पूरब नहीं घूमता जैसा कि हमारी पृथ्वी तथा अन्य ग्रह (यूरेनस ) को छोड़ कर घूमते हैं पर यह पूरब से पश्चिम घूमता है। इसलिये यहां सूरज पश्चिम से निकलता है।

venus-clouds.jpg

शुक्र ग्रह के वातावरण का अल्ट्रा वॉयलट से लिया गया एक चित्र

मूडी की भविष्यवाणी – यह तो सूरज का पश्चिम से निकलना ही समझो। सूरज, पश्चिम से, वीनस -सुन्दरता की देवी – ग्रह पर ही निकलता है। इसलिये हम सुन्दरता की देवी पर पहुंच रहे हैं :-)

planet-comparisons.jpg

बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल का तुलनात्मक चित्र

वीनस (शुक्र) को तो सुन्दरता की देवी कहा जाता है पर यदि कहीं नर्क है तो वह यहीं पर है। क्या आपको मालुम है कि यह ग्रह केवल शाम या सुबह को ही क्यों दिखायी पड़ता है? यह आधी रात को क्यों नहीं दिखायी पड़ता? क्या आपने इस बारे में कभी सोचा है? यह सब फिर कभी।

यह सारे चित्र विकीपीडिया से लिये गये है और ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर प्रकाशित किये गये हैं।

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परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

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