अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा – पाँच बातें

Akshargram Anugunj
५ अगस्त की रात को बैठ कर अनुगूंज का लेख पूरा किया। सोचा था ६ की सुबह पोस्ट कर दूंगा क्योंकि दुनिया में अभी भी बहुत जगह ५ अगस्त ही है। अनुगूंज का समय बढ़ गया है पर लेख तो लिख गया है, पोस्ट कर देता हूं।

  1. अपनी सभ्यता और बोली का महत्व नहीं समझ आयेगाः अपनी बोली, भाषा और सभ्यता का महत्व बाहर जा कर ही समझ में आता है। हिंदुस्तान में तो घर की मुर्गी, साग बराबर। सारे बाहर के लोग हिंदुस्तान वापस आ जायेंगे, बाहर कोई जायगा नहीं, तब लोगों को – अपनी सम्यता, बोली, भाषा, और योग का महत्व – कैसे पता चलेगा। सब लोग कलाकारों और गायकों की तरह गिटपिट अंग्रेजी में ही बात करेंगे। हिन्दी की लुटिया डूब जायगी।
  2. समारोह का मजा न ले पायेंगेः हिंदुस्तान में यदि कोई समारोह ८ बजे से हो तो साड़े नौ के पहले पहुंचना बेवकूफी है। यदि ठीक समय से पहुंच जाओ तो वहां उल्लू ही मिलते हैं। जब हम किसी समारोह में अपने हिंदुस्तानी समय से पहुंचेगे तब तक तो वह समाप्त हो चुका होगा और वहां उल्लू बोल रहें होंगे।
  3. इमारतें बदसूरत लगेंगीः हिंदुस्तान में सड़कों, सरकारी और सार्वजनिक इमारतें पर लाल रंग के तरह, तरह पान की पीक के निशान हमेशा देखे जा सकते हैं। यह उनकी सुन्दरता पर चार चांद लगाते हैं। यह सब बन्द हो जायेंगे। वे बदसूरत दिखने लगेंगी।
  4. हम न रहेंगेः अमेरीका का क्षेत्रफल हमारे क्षेत्रफल से चार गुना ज्यादा है और अबादी चार गुनी कम। हमारा क्षेत्रफल तो बढ़ नहीं सकता – हिन्दुस्तान अमेरिका बना तो जनसंख्या को ही सोलह गुना कम होना पड़ेगा। इसमें तो ज्यादा उम्र वाले ही लोग गायब होंगे। हिन्दी चिट्टाकारों में तो मेरी ही उम्र सबसे ज्यादा लगती है – जीवन के तीन चौथाई बसन्त तो देख ही चुका हूं। मैं ही सबसे पहले भगवान के पास पहुंचूगा।
  5. हम नकली बन जायेंगेः हिंदुस्तान की जो भी कमी हो, हम जैसे भी रद्दी सद्दी हों बनावटी तो नहीं – हमारे दिल में गर्माहट है, बड़ों को कम से कम दूसरी जगह नहीं छोड़ते अपने साथ रखते हैं। मां को साल में एक बार कहेंगे Happy mother’s day Mom. सब केवल बाहरी दिखावटी मुस्कराहट में बदल जायगा।

ना बाबा ना, हम ऐसे ही भले हैं🙂
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के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

15 Responses to अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा – पाँच बातें

  1. aroonarora says:

    सही कहा जी,हम पिछडे ही भले इस लाईन मे तो,और काश हमेशा बने रहे हम भी हमारे भी..:)

  2. यह भी सही है.

  3. आलोक says:

    हिन्दुस्तान अमेरिका बना तो जनसंख्या को ही सोलह गुना कम होना पड़ेगा।

    हाँ, यह तो सोचा ही नहीं था। यानी सोलह में एक ही बचेगा।

  4. आलोक says:

    गतांक से आगे –
    यानी आठ सौ हिन्दी के चिट्ठों की सङ्ख्या धड़ से पचास ही रह जाएगी!

  5. paramjitbali says:

    बहुत बढिया विचार प्रेषित किए हैं ।बधाई।

  6. kakesh says:

    अच्छी रहे ये पांच बातें भी. शोर्ट एंड स्वीट

  7. maithily says:

    “ना बाबा ना, हम ऐसे ही भले हैं :)”
    बिल्कुल सही, हम एसे ही भले हैं

  8. Nitin Bagla says:

    “जीवन के तीन चौथाई बसन्त तो देख ही चुका हूं।….”

    ये समझ नही आया….१०० को मानक मान कर कह रहे हैं क्या?
    अन्यथा आपको कैसे मालूम कि तीन चौथाई ही हुए हैं..ना कम न ज्यादा?

    वैसे सच बताऊँ…मैं आपको ५०-५५ का समझता था…७५ -८० का कदापि नही….अपना नजरिया बदलना पडेगा अब मुझे🙂

    @ नितन जी, मैं तो अपनी उम्र अपने माता पिता की उम्र से ही देखता हूं। मैं नहीं समझता यह किसी भी तरह से ८० से ज्यादा होगी – उन्मुक्त

  9. mamta says:

    अच्छी लगी आपकी पांच बातें।

  10. Amit says:

    हा हा हा, सही लिखे हैं, खूब।🙂

  11. Shrish says:

    स‌ही है।🙂

  12. 🙂 यह भी सही और अनोखे उन्मुक्तिया विचार हैं. अब सही राह पकड़ी अनुगूँज ने, जब आप भी आ गये. 🙂

  13. …जीवन के तीन चौथाई बसन्त तो देख ही चुका हूं। मैं ही सबसे पहले भगवान के पास पहुंचूगा।…

    कैसी बातें कर रहे हैं, हम तो आपको अपना हम उम्र समझ रहे थे🙂

    तुम जियो हजारों साल, साल के दिन हों पचास हजार,

    लेकिन एक शर्त है, ब्स ऐसे ही लिखते रहो …

  14. Nitin Bagla says:

    याने ५५-६० के ही हैं…हमारा अनुमान ठीक निकला🙂
    वैसे हमारी दुआ है कि ८० ही क्यों …आप शतायु हों…

  15. पिंगबैक: अक्षरग्राम » अवलोकन - अनुगूँज २२ - हिंदुस्तान अमरीका बन जाए तो क्या होगा - पाँच बातें

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