हिन्दी चिट्ठाकार बन्धु ध्यान दें

क्या आप बता सकते हैं कि फायरफॉक्स सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर है कि नहीं।

‘अरे, उन्मुक्त भाई, यह क्या करते हो। शीर्षक है, हिन्दी चिट्ठाकार बन्धुवों के लिये और बात फायरफॉक्स की। यह तो गलत बात हुई न – माफी मांगो’

फायरफॉक्स इस समय तो सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर नहीं है पर आने वाले कल में यह सबसे लोकप्रिय होगा। वेब ब्रॉउसर के बारे में आंकड़े यहां देखिये। इससे यह पता चलता है कि इसका प्रयोग हर महीने बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर होगा।

फायरफॉक्स सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर इसलिये नहीं होगा कि यह ओपेन सोर्स है, या सब ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है पर यह सबसे लोकप्रिय इसलिये होगा कि यह सबसे अच्छा वेब ब्रॉउसर है – तकनीक की दृष्टि उत्तम। यदि आपने कभी इसे चला कर न देखा हो तो इसे यहां से मुफ्त में डाउनलोड कर अपने कंप्यूटर में अपलोड कर प्रयोग कर देखें। यदि इसके इतिहास के बारे में कुछ पढ़ना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं।

‘यह तो हद्द हो गयी। कल ही तो भटिया जी ने हिट्स पाने के बीस तरीके बतायें हैं लगता है कि यह इक्कीसवां तरीका है।’

चलिये हम आज के शीर्षक पर बात करते हैं। मैं, लिनेक्स पर काम करता हूं और अंतरजाल पर फायरफॉक्स की सहायता से जाता हूं पर बहुत से हिन्दी चिट्ठाकार बन्धुवों की चिट्ठियां नहीं पढ़ पाता हूं। वे फैली फैली सी लगती हैं। मेरा सबसे अनुरोध है कि हिन्दी में चिट्ठियों के text को justify न करें पर उसे left align कर प्रकाशित करें। इससे आपकी चिट्ठी का text फैला फैला नहीं नजर आयेगा और फायरफॉक्स पर पढ़ने में सुविधा रहेगी। जहां तक मैं जानता हूं यदि आप text को justify करके प्रकाशित करेंगे तो वह IE में भी फैला, फैला दिखायी पड़ेगा पर यह मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता क्यों कि मैं IE का प्रयोग नहीं करता हूं।

हिन्दी के चिट्ठे, अलग अलग वेब ब्रॉउसर में अलग अलग तरह से दिखते हैं। आप, कभी कभी अपने चिट्ठे को फायरफॉक्स में भी देख लें। कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपका चिट्ठा फायरफॉक्स में कम सुन्दर दिखायी पड़ता हो और लोग उसे देखने में कम सुन्दर पायें। ऐसा तो नहीं होना चाहिये, बस इसीलिये आपको ध्यान देने की बात की थी।

फायरफॉक्स पर कभी, कभी हिन्दी की मात्रा ठीक से दिखायी नहीं पड़ती। इसके जवाब के लिये आप अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: हिन्दी और कंप्यूटर पर प्रश्न नम्बर ६ का जवाब देखें। यहां पर इस संबन्ध में अन्य अक्सर पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी है।

परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

7 Responses to हिन्दी चिट्ठाकार बन्धु ध्यान दें

  1. ePandit says:

    भईया बस ये बता दो कि आखिर Justify करके लिखने से आपका क्या मतलब है? आपके चिट्ठे पर कई बार पढ़ चुका लेकिन समझ नहीं आया।

  2. ePandit says:

    संजय बेंगाणी ने कहा…

    प्रोग्रामरो के लिए यह सर्वोत्तम है. सामान्य प्रयोक्ता के लिए कतई नहीं. इसे ठीक किये जाने की जरूरत है.

    “लुत्फे मय तुझसे क्या कहूँ जाहिद कमबख्त तूने पी ही नहीं।”

    संजय भाई अक्सर हम लोग किसी चीज को इस्तेमाल करके तो देखते नहीं और उसके बारे में एक धारणा बना लेते हैं। अगर देखते हैं तो बस एक बार ट्राई करते हैं और आधी अधूरी जानकारी से ही राय बना लेते हैं।

    मैंने IE, Opera और Firefox तीनों को एक एक साल प्रयोग किया है। अंत में मैंने पाया कि फायरफॉक्स सबसे बेहतर है सिवाए एक कमी के कि कम मेमोरी वाले सिस्टम में मेमोरी लीक की समस्या होती है।

    लगता है एक पोस्ट लिख कर बताना पड़ेगा कि फायरफॉक्स क्यों बेहतर है।

  3. श्रीष जी
    मेरा अर्थ चिट्टी के text से था। text को left align, या right align, या centre, या justify करके प्रकाशित किया जाता हैं। जब text, justify होता हैं तो हर पंक्ति के बायें (शुरू में) तथा दहिने तरफ (अन्त में) खाली जगह नहीं रहती। यह चिट्ठी का text मैंने left align करके प्रकाशित किया है। जिसके कारण, हर पंक्ति में शब्दों के बायें तो जगह नहीं है पर दहिने तरफ है।
    चिट्ठी पर मेरी भाषा स्पष्ट नहीं थी पर आपके सवाल के कारण मैंने वह स्पष्ट कर दी। आपको धन्यवाद
    संजय जी
    चिट्ठी में text यदि justify करके लिखा है तो जहां तक मैं जानता हूं कि वह IE में भी फैला फैला दिखायी पड़ता है। केवल झगड़ा मात्रा का है जिसका भी हल है। यह प्रयोगकर्ता के लिये भी सबसे अच्छा वेब ब्रॉउसर है।
    आप तरकश को लिनेक्स सरवर पर ले ही आये। ओपेन सोर्स प्रयोग करना ही पड़ा। फायरफॉक्स भी ओपेन सोर्स है। इसे एक बार प्रयोग करके देखें, फिर राय बनाये।

  4. अंतरजाल पर फायरफॉक्स की सहायता से जाता हूं पर बहुत से हिन्दी चिट्ठाकार बन्धुवों की चिट्ठियां नहीं पढ़ पाता हूं।

    और भी कई कमियाँ है इसमें आइ.ई. के मुकाबले. इसलिए इसे अच्छा कैसे बताया जा सकता है?
    प्रोग्रामरो के लिए यह सर्वोत्तम है. सामान्य प्रयोक्ता के लिए कतई नहीं. इसे ठीक किये जाने की जरूरत है.

  5. मेरी कम्पनी डिजाइनिंग क्षेत्र में काम करती है. वेब डिजाइन एक प्रमुख कार्य है. इसलिए हम फायरफोक्स का प्रयोग भी करते है. कई बार हमे किसी चीज को बानाते समय फायरफोक्स में सही न दिखने की वजह से बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है.

  6. संजय और इस ब्लोग पर आने वाले सभी लोग , अगर आप लोगो को फ़ायरफ़ोक्स पर कोम्पिटिब्लिटी की कोई भी जरुरत है तो आप लोगो मुझे <a href=”mailto:sudeep.sakalle@gmail.com” rel=”nofollow”>मेल</a> कर सकते हैं।

  7. मैं फायरफॉक्स ही प्रयोग कर रहा हूँ। पर इस में अनेक चिटठे नहीं पढ़ सकता. इस लिए इस में समस्या तो है और इसे फायर फॉक्स को ही दूर करना होगा। उपयोग कर्ता टूल के मुताबिक खुद को बदले यह विचार ही त्रुटिपूर्ण है। टूल को ही बदलना होगा। मुझे अनेक चिट्ठे पढ़ने के लिए इंए पर जाना पड़ता है।
    खुद अपने चिट्ठे को फायरफॉक्स पर पढ़ने के लिए न केवल इसे लेफ्ट एलाइन करना पड़ा बल्कि इनस्क्रिप्ट पर हिन्दी लिखना सीखना पड़ा। तब जा कर सही हुआ। फॉयरफॉक्स निर्माता इस समस्या के प्रति चिंतित नजर नहीं आते हैं।

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