छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

गये लैपटॉप पानी में

बुरा हो लोगो का। पता चला कि फ्री में लैपटॉप मिल रहे हैं तो बस जिनहें नहीं मिले, उन्होने कहना शुरु कर दिया कि चिट्ठेकारों को घूस मिल रही है। अरे कुछ देर चुप रहते नहीं बना। मालुम नहीं लोगो को इतनी जलन क्यों होती है। अब देखिये ना सारे लैपटॉप वापस मांगे जा रहे हैं या उनसे कहा जा रहा है कि वे समीक्षा लिखने के बाद किसी को भेंट कर दें। देखें यहां और यहां :-(

एक आईडिया आया है। बस, यदि तरकश की टीम उनसे सम्पर्क कर ले तो कुछ तो लैपटॉप अवश्य २००६ के उदयिमान हिन्दी चिट्ठेकार को मिल सकते हैं। संजय जी, सुन रहें हैं न आप :-)
संजय जी, यह तब तक न मानियेगा जब तक वे लोग कम से कम एक, एक लैपटॉप सारे जजों को भी भेंट में न दे दें :-) यह कहने में क्या जाता है – शायद जजो को इसी से मक्खन लग जाये।   पर यदि यह चुनाव संहिता का उल्घन हो गया तो। तो क्या -  मेरा भी लैपटॉप वाला हाल :-(

December 30, 2006 - Posted by उन्मुक्त | hindi, हिन्दी | | 1 Comment

1 Comment »

  1. कोशिश करने में क्या बुराई है? :)

    Comment by संजय बेंगाणी | December 30, 2006


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