आज का दिन महत्वपूर्ण है

‘अरे उन्मुक्त जी, क्यों बोर कर रहे हैं। हमें भी मालुम है कि आज अलबर्ट आइन्स्टीन का जन्मदिन है। केवल आप ही नहीं हैं जिसने जीशान जी की बेहतरीन चिट्ठी पढ़ी है। हमने भी उसे पढ़ा है। दूसरों की बात मत दोहराइये।’

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अरे …

कुछ समय पहले मैं साउथ अफ्रीका के इंडिपेंडेंट एलक्टोरल कमीशन (Independent Electoral Commission, Head Office, Election House, 260 Walker Street, Sunnyside, Pretoria) की वेबसाइट गया पर मैं उसे न देख सका।

इसका कारण यह था कि आप उसे केवल इंटरनेट एक्सप्लोरर वेब ब्राउज़र से ही देख सकते हैं 😦

यह सच है कि आप लिनेक्स में वाइन की सहायता से इंटरनेट एक्सप्लोरर चला सकते हैं पर मुझे शक है कि यह कानूनी है कि नहीं। क्योंकि, विंडोज़ के अधिकतर सॉफ्टवेयर में शर्त होती है कि उनके सॉफ्टवेयर को, जब तक अनुमति न हो तब तक, विंडोज़ के अलावा किसी और ऑपरेटिंग सिस्टम में नहीं चलाया जा सकता है। यह अलग बात है कि इस तरह की शर्त वैध है अथवा नहीं।

मुझे जानकारी नहीं है कि मैक कंप्यूटर में इंटरनेट एक्सप्लोरर चलता है कि नहीं।

यह भी गौर करने की बात है कि लिनेक्स या मैक कंप्यूटर का प्रयोग करने वाले क्यों इंटरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग करेगें।  उनके पास प्रयोग करने के लिये इससे बढ़िया वेब ब्राउज़र  हैं।

मुझे आश्चर्य है कि साउथ अफ्रीका जैसे देश में, जहां लिनेक्स का बेहतरीन डिस्ट्रीब्यूशन बनता हो वहां भी इस तरह की कोई वेब साइट है।

यह तो एक तरह का भेदभाव हुआ न।

साउथ अप्रीका के लोग भी पीछे नहीं है। उन्होंने भी वहां के मानवाधिकार आयोग में भेदभाव का दावा ठोक दिया है।

हो सकता है कि कुछ दिनो बाद मैं आपको साउथ अफ्रीका घुमाने ले चलूं  🙂

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ओएस/२ जिन्दा रहना चाहता है

ओएस/२ जिन्दा है और जिन्दा रहना चाहता है।

‘अरे भाई, यह महाशय है कौन – रहे न जिन्दा – मना कौन कर रहा है।’

ओएस/२ (OS/2) कंप्यूटर का एक ऑपरेटिंग सिस्टम था – माफ कीजिये है। इसे माईक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और आईबीएम (IBM) ने बनाया था। बाद में इसे केवल आईबीएम ने ही विकसित किया। यह ऑपरेटिंग सिस्टम/२ (Operating System/2) का छोटा नाम है। यह नाम इसलिये पड़ा, क्योंकि यह आईबीएम के पर्सनल सिस्टम Personal System/2 (PS/2) के पर्सनल कंप्यूटर के लिये पसंदीदा ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह से विकसित किया गया था। दुर्भाग्य, पिछली शताब्दी के अन्त होते, होते ही आईबीएम ने इस पर कार्य करना बन्द दिया और आधिकारिक तौर पर इसका समर्थन ३१ दिसम्बर २००६ से बन्द कर दिया।

os-2.png

यह एक बेहतरीन, लाजवाब, और स्थायी ऑपरेटिंग सिस्टम था। यह विंडोज़ से लगभग १० वर्ष आगे था। १९९० के दशक में मैंने इस पर काम किया पर बाद में समर्थन न मिलने के कारण बन्द कर दिया।

यह बाज़ार पर क्यों नहीं चल पाया, आईबीएम ने क्या भूल कर दी – यह तो एक बहुत बड़ी शिक्षा है। यह पूरा वाक्या बयान करता है कि बाज़ार में सबसे अच्छी चीज़ नहीं चलती। चलने के लिये इसके अलावा बहुत कुछ और की भी जरूरत होती है। यह तो व्यापार का, मैनेजमेन्ट स्कूल का पहला नियम है। शायद आप इस बारे में, दूसरे संदर्भ में लिखी मेरी चिट्ठी, ‘तो क्या खिड़की प्रेमी ठंडे और कठोर होते हैं?‘ पढ़ना चाहें।

ओएस/२ प्रेमी अब भी हैं। वे चाहते हैं कि आईबीएम ओएस/२ को ओपेन सोर्स कर दे। इस बारे में उन्होने एक याचिका आईबीएम को २५ सितम्बर २००५ को दी। जब उस पर कोई सुनवायी नहीं हुई तो दूसरी याचिका १९ नवम्बर २००७ को दी। यदि आप,

  • याचिका पर दस्खत करना चाहते हैं,
  • उनका मनोबल बढ़ाना चाहते हैं,
  • इस बारे में कुछ और जानना चाहते हैं।

तो यहां बतायें।

मैंने तो वहां जा कर यह संदेश दे कर उनका मनोबल बढ़ाया,

‘I have no doubt that if OS/2 is open sourced then it will follow diiferent route. Best of luck.’

मेरे विचार में यदि आईबीएम, ओएस/२ को ओपेन सोर्स करता है तो आईबीएम का कोई घाटा नहीं है पर हो सकता है कि इस बार ओएस/२ का वह हश्र नहीं होगा जो पहले हुआ।

ऐसे ओपेन सोर्स बहुत लोग पसन्द करते हैं इसीलिये ओएस/२ प्रेमी भी इसे ओपेन सोर्स करवाना चाहते हैं। महिलायें, भी ओपेन सोर्स पर काम करने वालों को पसन्द करती हैं – शायद ऐसे लोग ज्यादा भावुक और कामुक होतें हैं। खुद ही पढ़ कर देख लीजिये। यह चिट्ठी तो मेरी है पर इस पर विचार एक महिला के हैं – मेरे नहीं। न मुझे कोई भी अनुभव है न ही कुछ कहना चाहता हूं 🙂

मुन्ने की मां ने, न तो मेरी पुरानी चिट्ठी पढ़ी है, और आशा करता हूं न वह ही इसको पढ़ेगी – यदि पढ़ लिया तो बस …

सांकेतित शब्द

Internet, technology, Science, सूचना प्रद्योगिकी, सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेर, सॉफ्टवेर, सौफ्टवेर, आईटी, अन्तर्जाल, इंटरनेट, इंटरनेट, टेक्नॉलोजी, टैक्नोलोजी, तकनीक, तकनीक, तकनीकी

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