मुझे मिलना उस मोड़ पर

‘मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां केवल हम दोनो हों
वो मोड़ ऐसा हो,
जहां से मैं, न पीछे हट सकूं,
और न ही आगे जा सकूं,
बिन संग तुम्हारे।


मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहा बसंती हवा के झोके,
मुझे मीठी सी कशिश में बांध ले
और तुम्हे भी रंग ले,
अपने रंग में।

मुझे मिलना उस मोड़ पर
जब मै बिखर जाऊं ,
अमलताश की भांति
और तुम समेट लो,
अपनी बाहों में मुझे।

मुझे मिलना उस मोड़ पर
जब तुम सुनना चाहो
कुछ दिल से,
और मै कुछ कहना चाहूं
दिल से।

मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां जोर से बारिश आ रही हो,
जहां पर सिर्फ़ और सिर्फ़ हम दोनो हों,
हंसते हंसते, प्यार से मीठी, मीठी बातें करते।
सुनते उस लम्बे से रास्ते में,
सिर्फ़ वह आवाज,
जो हमारे दिल को,
खुश कर देती है।

मुझे मिलना उस मोड़ पर,
जहां हम दोनो के लिये,
पूरी जगह है।
है जगह, यादों के लिए
बातों के लिए,
हो जगह, प्यार के लिए।
सिर्फ़ उस मोड़ पर मिलना मुझे!’

‘उन्मुक्त जी, क्या बात है लगता है कि ‘जॉगरस् पार्क’ या फिर ‘चीनी कम’ फिल्म देख कर आ रहें हैं?’

नहीं भाई, नहीं बहना नहीं।  मैं और कविता –  कवितायें तो गागर में सागर भरती हैं। कविता लिखना मेरे बस की बात नहीं है।  यह कविता मैंने नहीं लिखी है। यह तो मैंने  चुरायी है। इस चिट्ठी के चित्र भी चुरायें हैं।

‘चुरा ली है! आप, यह क्या कह रहे हैं?’

इसे अपने चिट्ठे पर डालने से पहले सहाना जी (इस कविता की रचयिता)  से अनुमति नहीं ली है। इसे तो चुराया जाना  ही कहा जायगा।

‘उन्मुक्त, यह  सहाना जी कौन हैं? कभी इनकी कोई हिन्दी में चिट्ठी नहीं पढ़ी? क्या यह चित्र उनका है?

मैं नहीं जानता कि यह चित्र उनका है अथवा नहीं। यह चित्र तो उनके परिचय से है। वैसे मुझे तो यह चित्र मुझे कलाकारा कैटरीना कैफ की तरह लग रहा है🙂

सहाना जी, बैंगलोर की रहने वाली हैं पर आजकल मुम्बई में पढ़ती हैं। वे अंग्रेजी में चिट्ठाकारी करती हैं पर कभी कदा हिन्दी में चिट्ठियां लिख देती हैं। बस, उनकी हिन्दी की एक चिट्ठी मेरे उन्मुक्त हिन्दी चिट्ठे फीड एग्रेगेटर के पकड़ में आ गयी। वहां पहुंच कर जब उनके चिट्ठे ‘Exhibiting Hidden Talents!!‘ को देखने लगा तो उनके द्वारा प्रकाशित, यह  कविता पसन्द आयी। इसमें रुमानी भावनाओं का अपना ही अन्दाज़ है। वहीं से यह कविता और पहला चित्र चुराया है। मैंने कविता के शब्दों में कुछ बदलाव किये हैं। उनकी मूल कविता वहीं, उसी चिट्ठी पर पढ़ें। कुहू जी  भी,  मुझें इसी तरह से अन्तरजाल पर मिली थीं। मुझे हिन्दी में नियमित रूप से चिट्टाकारी करने वाले कई चिट्ठाकार भी इस तरह से मिले।

मैंने सहाना जी एक चिट्ठी पर टिप्पणी की कि आप बहुत जल्द हिन्दी में चिट्ठाकारी करने लगेंगी। उनका जवाब था,

‘Oh God! It’s unimaginable to blog in Hindi. Of course,  I’ve completed Hindi BA (taking Private Exams) and Sanskrit BA (Private Exams).’

हे भगवान। हिन्दी में चिट्ठाकारी करना तो कल्पना से भी बाहर है। हांलाकि, मैंने हिन्दी और संस्कृत में स्नातक (प्राइवेट) डिग्री ली हुई है।

मेरा कहना कि सहाना जी हिन्दी में चिट्ठाकारी करेंगी, इसलिये था कि वे लिखती अच्छा हैं पर उसके अनुरूप उनके चिट्ठे में टिप्पणी नहीं है। हिन्दी चिट्ठाकार एक दूसरे को प्रोत्साहित करने के लिये ज्यादा टिप्पणी करते हैं, जो कि अच्छी बात है। अब टिप्पणियां किसे पसन्द नहीं हैं। मुझे भी – चाहें मैं जितना कहूं कि टिप्पणियां न मिलने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता🙂

मैंने उन्हें बताया कि मैंने एक शर्त लगायी है कि आप हिन्दी में चिट्टाकारी करेंगी। यदि मैं शर्त हार गया तो एक नवयुवती  से हारने के कारण आपके बारे में एक खास चिट्ठी लिखूंगा। इस पर, मेरे परिवार के सदस्य (मेरी पत्नी, मेरे बेटा, और मेरी बहूरानी) बहुत हसेंगे।

‘उन्मुक्त जी, तब तो लगता है आप हार गये क्योंकि यह चिट्ठी तो खास सहाना जी के बारे में है।’

बिलकुल नहीं। मैं हारा नहीं हूं। मैं तो जीत गया हूं। सहाना जी के लिये यह खास चिट्ठी जीतने की खुशी में लिख रहा हूं।

‘अरे उन्मुक्त जी यह आप कैसे कह सकते हैं। कहां है सहाना जी का हिन्दी का चिट्ठा। जरा हम भी तो देखें🙂’

भाई जी, बहना जी – मैं तो इतना जानता हूं कि सहाना जी ने मुझे बताया है कि,

‘I have composed many poems in Hindi.  … My first romantic poem was ‘Love at First Sight’. I got the title but was struggling for the content. I took, 5 hours to interpret my imagination. … I take some time to step into any new one. … I may take some time for Hindi Blog! Don’t worry, you will win your   bet. I won’t allow an elderly person to loose the bet.  No one will  laugh at you rather they will appreciate you!’
मैंने हिन्दी में, बहुत सारी कवितायें  लिखी हैं। मेरी पहली रुमानी कविता ‘पहली मुलाकात में प्यार’ (लव ऍट फर्स्ट साइट) थी। मुझे शीर्षक तो मिल गया पर अपनी कल्पना को शब्द देने में ५ घंटे लगे। मुझे नयी कविता लिखने में समय लगता है। हो सकता है कि मुझे हिन्दी में  चिट्ठा लिखने में समय लगे।  घबराईये नहीं, मैं आपको हारने नहीं दूंगी। आप पर कोई नहीं हसेगा, लोग आपका आदर करेंगे।

अन्तरजाल पर कहीं पढ़ा था कि हिन्दी के ६५४० चिट्ठे हैं। चलिये, बहुत जल्द ही ६५४१ होने वाले हैं।

हमारी बातचीत ई-मेल के द्वारा नहीं हुई है पर एक दूसरे के चिट्ठे पर टिप्पणी के द्वारा हुई है जो कि, अन्तरजाल पर कोई भी पढ़ सकता है। इसलिये यह मत सोचियेगा कि मैं किसी की व्यक्तिगत ई-मेल सार्वजनिक कर रहा हूं। हां, मैंने कुछ भाषा सम्पादित की है।  नयी उम्र के लोगों की एसएमएस (SMS), मुझे कम समझ में आती है🙂

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के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

9 Responses to मुझे मिलना उस मोड़ पर

  1. Cuckoo says:

    मेरे बारे में ज़िक्र करने का बहुत बहुत धन्यवाद। ये सहाना जी तो बिल्कुल मेरे जैसी लगती हैं| हम दोनों ही अधिकतर अंग्रेज़ी भाषा में लिखते हैं और मैं हिन्दी में तो बस रूमानी कवितायें ही लिखती हूँ। लेकिन मैंने इनकी तरह स्कूल के बाद किसी भाषा का अध्यन नही किया है। आपको तो पता ही है सब कुछ। इनकी ये कविता बहुत अच्छी लगी, मुझे अब तो इनके ब्लॉग को अपने रीडर पर डालना ही पड़ेगा!

    सहाना जी से परिचय कराने के लिए, आपको धन्यवाद।

    कुहू जी, आप भी बहुत अच्छा लिखती हैं।

    मुझे प्रसन्नता है कि आप अपने चिट्ठे पर हिन्दी चिट्ठाकरों के बारे में लिखने लगी हैं। इस तरह से अंग्रेजी में लिखने वाले तो यह जानेगें कि हिन्दी में भी बेहतरीन चिट्ठियां लिखी जा रही हैं। लेकिन अभी आपके साथ पूरी सफलता नहीं मिली है। यह तो तब होगा जब आप हिन्दी में भी चिट्ठा लिखना शुरू कर देंगी🙂

    देखिये सहाना जी कब तक शुरू करती हैं पर मुझे शर्त तो नहीं हारनी चाहिये – उन्मुक्त।

  2. आपकी पारखी नजर ने एक बहुत ही मर्मस्पर्शी एवं आशावादी कविता चुनी है. इसे चुन कर पढवाने के लिये आभार !!

    सस्नेह — शास्त्री

    — हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

  3. बड़ी रूमानी सी पोस्ट हो गई…

  4. mamta says:

    कविता के भाव और अभिव्यक्ति बहुत पसंद आई।
    और बाद मे जो बातचीत लिखी है वो भी।

    ममता जी, आप भी मुझ ऐसे ही मिली थीं – उन्मुक्त।

  5. आपके टैलेंट सर्च का पूछना ही क्या! कविता जोरदार है!

  6. rachanabajaj says:

    नमस्ते उन्मुक्त जी!
    अनजानों के लिये आपका स्नेह और प्रोत्साहन तारीफ़ के काबिल है.. सहाना जी की तरह ही मै भी एक हूं जिसे आप समय समय पर प्रोत्साहित करते रहे हैं… आपका आभार.. धन्यवाद.🙂
    साहना जी को अनेक शुभकामनाएं!
    रचना.

    रचना जी, मेरा हमेशा यह प्रयत्न रहता है कि अन्तरजाल पर हिन्दी बढ़े, हिन्दी के चिट्ठे बढ़ें और उनमें विवधिता आये। शायद इसीलिये, मैं प्रतिदिन औसतन कम से कम ७-८ टिप्पणियां करता हूं पर अधितर वे उन चिट्ठों में होती हैं जो नये हैं, या अंग्रेजी में हैं पर कभी कभी हिन्दी में चिट्ठियां लिखते हैं या जिन पर बहुत कम टिप्पणियां रहती हैं – उन्मुक्त।

  7. अरे वाह, आप भी मस्‍ती के मूड में लगते हैं। वैसे कार्टून फोटो का अपना ही महत्‍व है। कम से कम ये उत्‍सुकता तो जगाए रखते हैं।

  8. Sahana says:

    unmukthji:- namasthe.
    mujhe bahut hi accha laga. mein aapse jaise bola tha ki, mein zaroor hindi ka blog shuru karungi, mein abhi todi din mein karnewali hu..abhi mera exams chalu hai..mera icha a hai ki, mein bhi aap logon jaise hindi mein likhu..zaroor ek badiya hindi blog shuru karungi aur usme pehla post aapke baare mein rehega..kyon ki, aap ki prothsahith ki vaje se, mein kutch hindi ka padya bhi likhi hu..mera, pehla padhya tha, meri saheli ki bare mein[jo mein hindi mein likhi] vo meri blog mein older posts mein milega..dhanyavadh..bahut bahut shukriya!!!!!🙂

    mein, meri saare friends ko, aapka article ka link fwd kiya..sab log padke bahut kush hue..mein bhi bahut kush hu..Once again, Thanks a lot for such a great encouragement!!🙂

    सहाना जी, आप आराम से परीक्षा समाप्त करें अच्छे नम्बरों से पास हों, यह ज्यादा जरूरी है। मैं और हिन्दी चिट्ठाजगत उस दिन का इंतजार करेंगे जब आप हिन्दी का चिट्ठा शुरु करेंगी🙂 – उन्मुक्त

  9. सोनू says:

    सोनू जी, आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद। मेरा उद्देश्य चिट्ठाकारों को हिन्दी लिखने के लिये प्रेरित करना है – उन्मुक्त

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