कौन कहते हैं कि भगवान आते नहीं

क्या कभी आपका मन अशान्त होता है, या मन में अस्थिरिता रहती है, या भविष्य के बारे में अनिश्चित्ता लगती है?

मेरे साथ ऐसा होता है, अक्सर तो नहीं पर कभी कभी।

कुछ लोग ऐसे समय में ज्योतिषों के पास चले जाते हैं तो कुछ पंडितों के पास। कुछ पूजा पाठ में लीन हो जाते हैं तो फिर कुछ स्वामियों, योगियों, साध्वियों की शरण में चले जाते हैं। कुछ नेताओं के शरण में🙂

मैं न तो ज्योतिष, न ही हस्त रेखा या अंक विद्या पर विश्वास करता हूं। मैं मन्दिर जाता हूं – उसकी बनावट या इतिहास जानने के लिये, पर भगवान के दर्शन के लिये नहीं। मैं भगवान पर भी विश्वास नहीं करता – अज्ञेयवादी हूं।

कुछ समय पहले मुझे पुरी जगन्नाथ जी के मन्दिर जाने का मौका मिला। मैंने उसके इतिहास के बारे में जाना, वहां शाम को झन्डे बदलने के कार्यक्रम को देखा पर मन्दिर के अन्दर दर्शन करने नहीं गया। वहां के मुख्य पुजारी, जो पूरे समय मेरे साथ रहे, उसने कई बार मुझसे खास पूजा के लिये कहा पर मेरे मना कर देन पर उसे यह समझ में नहीं आया कि मैं वहां फिर क्या करने गया था। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कोई केवल इसके इतिहास को जानने के लिये मन्दिर में आयेगा।

इस सब के बावजूद भी,  जब मेरा मन अशान्त होता है या अनिश्चित्ता होती तो मैं रमायण सुनता हूं या फिर कोई भजन। मैं समझ नहीं पाता कि ऐसा क्यों होता है। दिल को तर्क से नहीं समझा जा सकता है।

‘कौन कहते हैं कि भगवान आते नहीं’ भी ऐसा ही भजन है। इसको सुनने से जो शान्ति मिलती है वह शायद लिखी नहीं जा सकती है, केवल अनुभव की जा सकती है। आप स्वयं सुन कर देखिये।

यदि आप इस भजन के बोल जानना चाहते हैं तो फिर यू-ट्यूब जा कर more info के बटन पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

आज का दिन कुछ … अलविदा  … फिर … मिलेंगे।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

7 Responses to कौन कहते हैं कि भगवान आते नहीं

  1. मेरे साथ अक्सर ही हो जता है ऐसा..अच्छा आलेख.

  2. लगता है आपका मन अशांत था…..🙂

    भगवान में विश्वास तो मुझे भी नहीं मगर उस अवधारणा से वैर भी नहीं. कभी मन्दीर जाने का मौका आ ही जाता है तो प्रेम पूर्वक दर्शन कर लेता हूँ.

    भगवान में विश्वास बहुत बड़ी ताकत है और तर्क करने वाले हम जैसे लोगो के लिए वह सहारा उपलब्ध नहीं है. पता नहीं कुछ खोया है या पाया है.

  3. आपका समान धर्मा होने की जुर्रत मैं भी कर रहा हूँ !
    बहुत् ही प्रशान्तिदायक ,भावातीत बहजन है बार बार सुनने को जी जी चाहता है ! चित्र भी उतने ही मोहक हैं !

  4. arvind says:

    aap ne kha aap ramayan sunte hai.
    Kaun si Ramayan? kya naam bata Sakte hai.
    hamko available kara sakate hai

    Shri hari

    अरविन्द जी, रामायण तो बहुतों ने गायी है पर मुझे मुकेश के द्वारा गायी गयी रामायण सबसे अच्छी लगती है। यह आपको सारे गानों की सीडी की दुकानों में मिल जायगी – उन्मुक्त

  5. Devender says:

    क्या कभी आपका मन अशान्त होता है, या मन में अस्थिरिता रहती है, या भविष्य के बारे में अनिश्चित्ता लगती है?

    मेरे साथ ऐसा होता है, अक्सर तो नहीं पर कभी कभी।

    मन कभी कभी अशान्त होता है। इसके कई कारण है – उन्मुक्त

  6. Devender says:

    aap ne kha aap ramayan sunte hai.
    Kaun si Ramayan? kya naam bata Sakte hai.
    hamko available kara sakate hai

    Shri hari

    अरविन्द जी, रामायण तो बहुतों ने गायी है पर मुझे मुकेश के द्वारा गायी गयी रामायण सबसे अच्छी लगती है। यह आपको सारे गानों की सीडी की दुकानों में मिल जायगी – उन्मुक्त

  7. KARAN says:

    RAMAYAN IS VERY MUST AND POWER FULL STORY I AM PROUDY FILL BECOUSE I AM HINDU AND DID STORY AS REALISED IT HINDU PUBLISING.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: