बीजिंग ओलिम्पिक और लिनेक्स

अमेरिका में आप एनबीसी की वेबसाइट पर ऑनलाइन बीजिंग ओलिम्पक देख सकते हैं पर यह सुविधा लिनेक्स वालों कर लिये नहीं है।

बीजिंग ओलिम्पिक्स लिनेक्स की टांय टांय फिस

बीजिंग ओलिम्पिक्स में - लिनेक्स की टांय टांय फिस

मालुम नहीं वे  ऐसा क्यों कर रहे हैं। शायद, ज्यादा कामुक और भावुक लोगों को वंचित रखना चाहते हैं तथा  ठंडे और कठोर लोगों को बदलना चाहते हैं। कह नहीं सकता कि यह कितनी देर चल पायेगा। क्योंकि लोग तोड़ की कोशिश में लगे हुए हैं।

मालुम नहीं हिन्दुस्तान में ओलिम्पिक दिखाया जा रहा है कि नहीं। हमें क्या करना मेरे पास तो दूरदर्शन की दिश सैटेलाइट है। उसमें भी आजकल अक्सर  सिगनल गायब रहता है – मौसम की खराबी है। ऐसे भी आता होता तो देखने कि क्या जरूरत थी हॉकी से तो हम गायब ही हैं😦

पुनः ऐसे कभी कभी जब सिगनल ठीक रहता है तो बीजिंग ओलिम्पिक दूरदर्शन के स्पोर्टस् चैनल में दिखायी पड़ जाता है।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

2 Responses to बीजिंग ओलिम्पिक और लिनेक्स

  1. बीजिंग में ओलंपिक शुरु होने का ताजा समाचार अपने ब्लाग पर देने के लिये धन्यवाद। हो सकता है यह कुछ लोगों के लिये पुराना हो पर हाकी में जिस दिन ओलंपिक से भारतीय टीम बाहर हुई तो उसके दुःख में अपने एक ब्लाग पर एक पाठ लिखने के बाद मेरा ध्यान इससे हट ही गया था। आपका पाठ भी लगता है भारी मन से लिखा गया है। प्रसंगवश याद दिलाना जरूरी है कि आपने पहली कमेंट के रूप में मेरा एक पाठ अपने पढ़ने में न आने की बात कही थी वह विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता में टीम इंडिया के हारने पर लिखा गया व्यंग्य था। आपकी कमेंट के बाद हमने यूनिकोड में लिखना शुरू किया तो फिर ऐसे गमों से दूर होते चले गये। ओलंपिक में रुचि न रहने का कारण ब्लाग पर लिखना भी है। चलिये आप एक शेर कहते हैं।
    दीपक भारदीप
    ……………………………..
    हमें मंजिल का पता बताकर
    खुद वह जंगल में अटके हैं
    कहने वाले सच कह गये
    जो सबको पर बताते हैं
    नदिया के पार जाने का रास्ता
    वह स्वयं कभी कभी पार नहीं हुए हैं
    कहें महाकवि दीपक बापू
    उन्मुक्त भाव से जीते हैं जो लोग
    मुक्त कहां हो पाते हैं स्वयं
    दुनियां भर के झंझट उनके मन के बाहर लटके हैं
    ………………………………………….
    इसमें मेरा तात्पर्य है कि आपने हमें ब्लाग दिखाकर इस क्रिकेट और ओलंपिक के तनाव से मुक्त कर दिया पर स्वयं उसमें फंसे लगते है। इसको अन्यथा न लें आपके प्रति मेरा जो मैत्री भाव उसी कारण यह व्यक्त किया है
    दीपक भारतदीप

  2. ये अपडॆट करने का सिलसिला जारी रखें. आभार.

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