कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं

आज सुबह अन्तरजाल में विचरण करते समय मुझे यह भजन सुनने को मिला – दिल को छू गया, कई बार सुना।

आप भगवान पर विश्वास करते हों या नहीं। आप हिन्दू हों या मुसलमान, ईसाई हों या फिर किसी और धर्म के अनुयायी – यह भजन आपको पसन्द आयेगा।

यह भजन दिल के उन तारों को छूता है जो शायद कोई और नहीं।

इस भजन को सुनते समय मुझे पुरानी चिट्ठियों की याद आयी – याद आयी अनुगूंज १८ की।

संजय जी ने, अनुगूंज १८ ‘मेरे जीवन में धर्म का महत्व‘ नाम से आयोजित की थी। मैंने इसके लिये एक चिट्ठी इसी नाम से पोस्ट की थी। दो साल पहले रचना जी के द्वारा टैग किये जाने पर पांच सवालों का जवाब ‘एक अनमोल तोहफ़ा‘ चिट्ठी में दिया था। उस समय, अपनी लिखी चिट्ठियों में मुझे अनुगूंज १८ के लिये लिखी गयी यही चिट्ठी सबसे अच्छी लगी थी। अपनी लिखी चिट्ठियों में, मुझे यह चिट्ठी,  आज भी सबसे अच्छी लगती है। शक नहीं, यह चिट्ठी मेरी लिखी चिट्ठियों में हमेशा सबसे अच्छी चिट्ठी रहेगी, क्योंकि यह मेरे दिल के सबसे पास है।

इस भजन का संगीत हमराज़ फिल्म के इस गाने की धुन पर है – इसे भी सुनिये।

यह भी कर्णप्रिय है

मैं इस चिट्ठी से एक बात और भी कहना चाहता हूं। चिट्ठे पर लिखिये वही – जो आपके दिल को छूता हो, जो आपके दिल के सबसे पास हो। क्योंकि वह आपकी सबसे अच्छी अभिव्यक्ति है।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

3 Responses to कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं

  1. paramjitbai says:

    सच में बहुत सुन्दर भजन है, आभार।

  2. Sameer Lal says:

    बहुत सुन्दर भजन है, आभार.

  3. Cuckoo says:

    दिल को छू लेने वाला भजन है, पता नही कितनी बार सुन चुकी हूँ पर ….

    धन्यवाद।

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