क्या आप जानते हैं कि दस साल पहले क्या हुआ था

नहीं भाई, नहीं। मेरी शादी नहीं हुई थी। उसे तो तीन दशक बीत गये हैं, वह तो इतिहास है।

‘अरे तो फिर क्या हुआ था।’

नहीं मालुम। दस साल पहले, ३१ मार्च १९९८ को मॉज़िला अधिकारिक रूप से शुरू किया गया था

mozilla_mascot.png

मॉज़िला का लोगो

मॉज़िला इस समय तीन बेहतरीन ओपेन सोर्स प्रोग्राम चलाता है। यह तीनो मॉज़िला पब्लिक लाइसेन्स के अन्दर प्रकाशित हैं, जो कि एक ओपेन सोर्स लाइसेन्स है।

firefox-logo.png फायरफॉक्स – यह वेब ब्रॉउज़र है,

thunderbird-logo.png थंडरबर्ड – यह ई-मेल भेजने और प्राप्त करने के सॉफ्टवेर है।

sunbird-logo.png सनबर्ड – यह ई-मैनेजर है। आपको यह प्रिय जनों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह की याद दिलाता है।

‘उन्मुक्त जी, आप कह रहे हैं तो अवश्य यह केवल लिनेक्स पर ही चलते होंगे। हम तो विंडोज़ वाले हैं। हमको इन प्रोग्रामों से क्या मतलब। तंग मत किया करिये।’

नहीं नहीं यह सच नहीं है। इनकी खासियत यही है कि यह सब ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं। विंडोज़ पर तो बहुत बढ़िया चलते हैं। जो मुझसे लिनेक्स पर काम करने की सलाह पूछता है मैं उनसे कहता हूं कि पहले विंडोज़ में इन प्रोग्रामों में काम करो। उसके बाद लिनेक्स में काम करने में कोई मुश्किल ही नहीं होगी।

थंडरबर्ड में फीड स्थापित की जा सकती है। अपने प्रिय फीड एग्रेगेटर की या फिर अपने प्रिय चिट्ठों की। देर किस बात की – यहां से डाउनलोड करें।

सनबर्ड में अपनी पत्नी का जन्मदिन जरूर डाल लें ताकि वह हमेशा याद रहे। क्या कहा शादी नहीं हुई है तो महिला मित्र का ही जन्म दिन डाल लें। सनबर्ड आपके थंडरबर्ड के साथ भी स्थापित हो सकता है। मैंने इसे ऐसे ही स्थापित कर रखा है। इसको डाउनलोड करने के लिये यहां जाईये।

फायरफॉक्स के बारे में भी क्या बताने की जरूरत है। चलिये बाकी के बारे में बता रहा हूं तो इसके बारे में बता देता हूं। यह हिन्दी चिट्टाकारों के लिये कुछ खास है और यहां से डाउनलोड कीया जा सकता है।

देरी मत कीजिये – आपको मालुम नहीं कि आप क्या मिस कर रहें हैं।

सांकेतित शब्द

Internet, technology, सूचना प्रद्योगिकी, सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेर, सॉफ्टवेर, सौफ्टवेर, आईटी, अन्तर्जाल, इंटरनेट, इंटरनेट, टेक्नॉलोजी, टैक्नोलोजी, तकनीक, तकनीक, तकनीकी,

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

8 Responses to क्या आप जानते हैं कि दस साल पहले क्या हुआ था

  1. mamta says:

    शुक्रिया इस जानकारी का।
    मॉज़िला तो हम इस्तेमाल करते है पर ये जानकारी नही थी।

  2. धन्‍यवाद

  3. शुक्रिया! हम भी फ़ायरफ़ाक्स ही प्रयोग करते हैं।

  4. फायर फोक्स तो अनिवार्य सा है हमारे लिए🙂

  5. अपन भी फाफा के ही दीवाने हैं.. बाकी की सुविधाओं को ज्यादा उपयोग नहीं किया कभी।
    अब सोचता हूँ कि सनबर्ड को एक बार आजमा कर देखना चाहिये।

  6. पिंगबैक: छुट-पुट

  7. bahut badhiya jaankari aur vo bhi interesting way me..🙂

  8. पिंगबैक: आज का दिन महत्वपूर्ण है « छुट-पुट

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