ओएस/२ जिन्दा रहना चाहता है

ओएस/२ जिन्दा है और जिन्दा रहना चाहता है।

‘अरे भाई, यह महाशय है कौन – रहे न जिन्दा – मना कौन कर रहा है।’

ओएस/२ (OS/2) कंप्यूटर का एक ऑपरेटिंग सिस्टम था – माफ कीजिये है। इसे माईक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और आईबीएम (IBM) ने बनाया था। बाद में इसे केवल आईबीएम ने ही विकसित किया। यह ऑपरेटिंग सिस्टम/२ (Operating System/2) का छोटा नाम है। यह नाम इसलिये पड़ा, क्योंकि यह आईबीएम के पर्सनल सिस्टम Personal System/2 (PS/2) के पर्सनल कंप्यूटर के लिये पसंदीदा ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह से विकसित किया गया था। दुर्भाग्य, पिछली शताब्दी के अन्त होते, होते ही आईबीएम ने इस पर कार्य करना बन्द दिया और आधिकारिक तौर पर इसका समर्थन ३१ दिसम्बर २००६ से बन्द कर दिया।

os-2.png

यह एक बेहतरीन, लाजवाब, और स्थायी ऑपरेटिंग सिस्टम था। यह विंडोज़ से लगभग १० वर्ष आगे था। १९९० के दशक में मैंने इस पर काम किया पर बाद में समर्थन न मिलने के कारण बन्द कर दिया।

यह बाज़ार पर क्यों नहीं चल पाया, आईबीएम ने क्या भूल कर दी – यह तो एक बहुत बड़ी शिक्षा है। यह पूरा वाक्या बयान करता है कि बाज़ार में सबसे अच्छी चीज़ नहीं चलती। चलने के लिये इसके अलावा बहुत कुछ और की भी जरूरत होती है। यह तो व्यापार का, मैनेजमेन्ट स्कूल का पहला नियम है। शायद आप इस बारे में, दूसरे संदर्भ में लिखी मेरी चिट्ठी, ‘तो क्या खिड़की प्रेमी ठंडे और कठोर होते हैं?‘ पढ़ना चाहें।

ओएस/२ प्रेमी अब भी हैं। वे चाहते हैं कि आईबीएम ओएस/२ को ओपेन सोर्स कर दे। इस बारे में उन्होने एक याचिका आईबीएम को २५ सितम्बर २००५ को दी। जब उस पर कोई सुनवायी नहीं हुई तो दूसरी याचिका १९ नवम्बर २००७ को दी। यदि आप,

  • याचिका पर दस्खत करना चाहते हैं,
  • उनका मनोबल बढ़ाना चाहते हैं,
  • इस बारे में कुछ और जानना चाहते हैं।

तो यहां बतायें।

मैंने तो वहां जा कर यह संदेश दे कर उनका मनोबल बढ़ाया,

‘I have no doubt that if OS/2 is open sourced then it will follow diiferent route. Best of luck.’

मेरे विचार में यदि आईबीएम, ओएस/२ को ओपेन सोर्स करता है तो आईबीएम का कोई घाटा नहीं है पर हो सकता है कि इस बार ओएस/२ का वह हश्र नहीं होगा जो पहले हुआ।

ऐसे ओपेन सोर्स बहुत लोग पसन्द करते हैं इसीलिये ओएस/२ प्रेमी भी इसे ओपेन सोर्स करवाना चाहते हैं। महिलायें, भी ओपेन सोर्स पर काम करने वालों को पसन्द करती हैं – शायद ऐसे लोग ज्यादा भावुक और कामुक होतें हैं। खुद ही पढ़ कर देख लीजिये। यह चिट्ठी तो मेरी है पर इस पर विचार एक महिला के हैं – मेरे नहीं। न मुझे कोई भी अनुभव है न ही कुछ कहना चाहता हूं🙂

मुन्ने की मां ने, न तो मेरी पुरानी चिट्ठी पढ़ी है, और आशा करता हूं न वह ही इसको पढ़ेगी – यदि पढ़ लिया तो बस …

सांकेतित शब्द

Internet, technology, Science, सूचना प्रद्योगिकी, सॉफ्टवेयर, सॉफ्टवेर, सॉफ्टवेर, सौफ्टवेर, आईटी, अन्तर्जाल, इंटरनेट, इंटरनेट, टेक्नॉलोजी, टैक्नोलोजी, तकनीक, तकनीक, तकनीकी

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

2 Responses to ओएस/२ जिन्दा रहना चाहता है

  1. Anunad Singh says:

    यदि इसे मुक्त स्रोत कर दिया गया तो दुनिया की आम जनता को एक बहुत बड़ी अदृष्य पूंजी हाथ लग जायेगी। आइ बी एम करे कि यह मुक्त स्रोत हो जाय!

  2. rahul jain says:

    उन्मुक्त जी मैंने ओ एस / २ पर चटका लगा दिया है। वैसे मैं भी “खुले खाते ” मतलब ओपेन सोर्स का प्रेमी हूँ। यूबंतु अच्छा लगता है।

    राहुल जी, जान कर प्रसन्नता हुई। ओपेन सोर्स का एक साथी और बढ़ा – उन्मुक्त

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