विचारों की स्वतंत्रता तो होनी चाहिये।

करीम विचारों के लिये जेल में है । यह ठीक नहीं।

अंग्रेजी बोलने वाले देशों में, सबसे जाने माने न्यायमूर्ति अमेरिका के न्यायधीश होल्मस् (Justice Oliver Wendell Holmes, Jr.oliver_wendell_holmes_jr_circa_1930.jpg) हैं। वे US vs. Schwimmer, 279 US 644, 654, 655 नामक मुकदमे में अपने विचार इस तरह से रखते हैं,

‘If there is any principle of the constitution that more imperatively calls for attachment than any other it is principle of free thought, not free thought for those who agree with us but freedom for the thought that we hate.’

न्यायमूर्ति होल्मस् का चित्र विकिपीडिया से है और उसी की शर्तों के अन्दर है।

जॉर्ज ऑर्वल (George Orwell) की एक प्रसिद्ध पुस्तक Animal Farm है। इसके बारे में, मैंने किसी अन्य संदर्भ में, यहां लिखा है। जेफरी रॉबर्टसन् (Geoffrey Robertson) ने भी Freedom, the Individual and the Law नामक पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक की भूमिका में जेफरी रॉबर्टसन्, जॉर्ज ऑर्वल के शब्द जो कि इन्होने अपनी पुस्तक Animal Farm के बारे में कहे हैं लिखा है। यह कुछ इस प्रकार हैं।

animal-farm.jpg

‘If liberty means anything at all, it means the right to tell people what they do not want to hear.’

उनकी रिहाई के बारे अपील यहां है। इसके बारे में मुझ यहां से पता चला और यह इस चिट्ठी के अनुरोध पर है।

पहले वे आए यहूदियों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला, क्‍योंकि मैं यहूदी नहीं था। फिर वे आए कम्‍युनिस्‍टों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला, क्‍योंकि मैं कम्‍युनिस्‍ट नहीं था। फिर वे आए मजदूरों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला, क्‍योंकि मैं मज़दूर नहीं था। फिर वे आए मेरे लिए और कोई नहीं बचा था जो मेरे लिए बोलता।

अभी नहीं तो शायद बहुत देर हो जाय।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

3 Responses to विचारों की स्वतंत्रता तो होनी चाहिये।

  1. sandeep says:

    धन्‍यवाद उन्‍मुक्‍त, उम्‍मीद है और साथी भी इस बारे में एक पोस्‍ट लिखेंगे।

  2. durga says:

    Unmukt sir,

    I appreciate your effort in writing this article.

    I read karim’s views also. Though I may not agree with his views in totality, but I do agree that imprisonment is draconian.

    However, it seems like the plan/ news to make a syncronised posting did not reach too many bloggers.

    I hv a feeling that to really make it into a COMMUNITY posting, may be it would be a good idea if all aggregators give a small amount of screen space on top of their front page, to publicise this issue and elicit support for a synchronised posting, on a date about a week later.

    Further, to gather even more momentum, each blogger who plans to support this synchronised posting may fix that same banner graphic on top of their own blog, so that their regular readers get to know of the plan ..

    May be even english bloggers can pitch in.. if some effort is made to reach out to them…

    If possible, the press or other media could also be informed about this symbolic protest by all bloggers(i do hope all hindi bloggers will join in) and that would definitely make “news” and help spread the message even further.. or so I hope.. and this should not be too difficult cos many media ppl are also bloggers..

    I dont know much about the blog world, so may be my analysis and hopes are quite far from reality, but I am sure that you can make a very good analysis on whether this is possible or not and how this might be done..

    Do you think such a plan can make an impact?

    Regardless of the above suggestion’s fate, I do appreciate all your articles and thank you for them.

    Yesterday I couldnt post bcos of tech reasons but (a belated) Happy Diwali to you and your family members.

    Rgds!

    आपकी बात ठीक है। हिन्दी चिट्टाकारों में ज्यादा उत्साह रहता यदि वह भारत के किसी व्यक्ति से संबन्धित रहती। दीपावली आपको भी शुभ हो। – उन्मुक्त

  3. पिंगबैक: Free Kareem! » Blog Archive » Free Kareem blog day in India

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