चिट्ठाकार बन्धु – कमर कसिये, लिखिये, और पैसा कमाईये

कमर कसने का समय आ गया है। कंपनियां पेशेवर चिट्ठाकारों की तलाश में हैं जो कि उनके उत्पाद पर लिख सकें। १८ अगस्त का इकोनॉमिक्स टाईमस् की खबर तो यही कह रही है। मालुम नहीं अंग्रेजी चिट्ठाकारों के लिये है या फिर हिन्दी चिट्ठाकारों के दिन भी फिरेंगे।

जहां तक मुझे मालुम है कि निरमा पहली कंपनी थी जो प्रादेशिक पत्रिकाओं और अखबारों में विज्ञापन देने लगी। यह उसके बढ़ने में बहुत बड़ा कारण बना। यही बात चिट्ठाकारी के बारे में भी सच होनी चाहिये।

मैं हमेशा स्वदेशी कंपनी की वस्तु खरीदता हूं। यदि स्वदेशी न हो और बहु-राष्ट्रीय कंपनी की हो तो कम से कम उसकी उत्पाद की फैक्टरी हिंदुस्तान में होनी चाहिये। आज से एक नियम और – उस उत्पाद को भी खरीदने की सोचूंगा, जिसके बारे में हिन्दी चिट्ठाजगत में लिखा जा रहा है और कंपनी उस लिखने वाले को पैसा दे रही है।

‘उन्मुक्त जी, फिर तो आप बेवकूफी करते हैं, घटिया माल लेते हैं। आपको यह नहीं करना चाहिये’

हो सकता है आप सही हैं और मैं बेवकूफी में घटिया माल खरीद रहा हूं। इन सब का कुछ कारण है। मैं ऐसा क्यों करता हूं, क्या कारण है, क्यों मैं ओपेन सोर्स की बात करता हूं – यह सब मिले जुले सवाल हैं। ज्लद ही लिखूंगा।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

14 Responses to चिट्ठाकार बन्धु – कमर कसिये, लिखिये, और पैसा कमाईये

  1. रवि says:

    अंग्रेजी में तो आप ख़ैर कमा ही सकते हैं. पर बात यदि हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए (भारतीय भाषा पढ़ें) हो रही हो तो फिर क्या बात है!

  2. paramjitbali says:

    अच्छी जानकारी है। अगर हिन्दी चिठ्ठाकार भी कुछ कमाई कर सके तो ।

  3. आपके पास कोई मेरे लिये ऑफर हो मुझे जरूर बताइये। आजकल मैने लिखना बंद कर रखा है कि कोयी अच्छी ऑफर आएगी तो दोबारा लिखना शुरू करूँगा।
    दीपक भारतदीप

  4. mamta says:

    भाई हमे तो बहुत मजा आया ये खबर पढ़ कर और अगर हिंदी मे ऐसा हो जाये तो क्या बात है।

    ये तो वही बात हुई की आम के आम गुठलियों के दाम 🙂

  5. हिंदी चिट्ठाकारों में यह भी जागृति पैदा कीजिये कि जब भी अपने किसी मनपसंद हिंदी चिट्ठे पर विज्ञापन देखें तो टिप्पणी करें या न करें चटका अवश्य लगायें।
    यकीन मानिये इससे अच्छा हिंदी चिट्ठों को बढ़ावा देने का कोइ तरीका नहीं है🙂

  6. हिन्दी-चिट्ठाकारों के कमाने में सम्भव है कुछ दिन शेष हों, लेकिन हिन्दी-चिट्ठे जल्द ही कमाई करने वाले हैं। उन्मुक्त जी आप सफल होंगे। हमारी शुभकामनाएँ कब काम आयेंगी!

  7. मैं भी तैयार हूं. मेरे दरवाजे ऐसी कम्पनियों के लिये सदैव खुले हैं.
    भैया जी ,पता लगेगी तो खबर करना.

  8. जीतू says:

    समय आ गया है, जल्द ही व्यवसायिक चिट्ठाकारी शुरु होगी, या कहा जाए तो शुरु हो ही चुकी है। हो सकता है शुरुवात मे कुछ चिट्ठाकार इस बात को मानने से इन्कार करें कि वे कुछ संस्थाओ के लिए प्रायोजित चिट्ठाकारी कर चुके है, लेकिन जल्द ही ये ट्रेन्ड बदल जाएगा।

    इससे पैसा आएगा, लेकिन उतना नही, जितना लोग उम्मीद कर रहे है, असली पैसा आएगा, कन्टेन्ट से। अभी ढेर सारी मीडिया कम्पनियां अच्छे कन्टेन्ट की खोज मे है, वे जल्द ही चिट्ठाकारों की तरफ़ रुख करेंगे, तब असली पैसे बनेगे।

  9. मुझे लगता है एड सेन्स विज्ञापनों से ज्यादा कमाई की गुंजाईश नहीं दिखती, कोई कंपनी आगे आकर कन्टेन्ट के हिसाब से पैसे दे तो मजा आये, बाकी फ्राड क्लिक के बारे में हम जानते ही है।

  10. Jeet says:

    apni to abhi shuruwat hi hai…… hindi likhni bhi nahi ati…… lekin main to apni hi company ke prachar me chittha bana chuka hu. apne ko to mast lagta hai apne chittyhe me apni company ka prachar

  11. कमर क्या कमरा कस लें, मगर जुगाड़ तो दिखे कुछ कमाई का.🙂

    जल्द ही सुनाहरा तारा उगने वाला है, वो उधर देखो!!!!! 🙂

  12. बहुत बढ़िया बात बताई आपने । शायद हम भी इस जीवन में जान जाएँ कि अपना कमाया पैसा कैसा होता है ।
    घुघूती बासूती

  13. कंटैंट वाली बात से मैं भी सहमत हूँ, वैसे जगदीश जी की बात भी सही है।😉

  14. कुहू says:

    अच्छी जानकारी है। अंग्रेजी चिट्ठाकार तो ख़ूब पैसे कमा रहे हैं, अगर हिंदी चिट्ठाकारों के लिए भी ऐसा हो जाये तो क्या बात है। फिर तो एक और कारण है हिंदी मे लिखने का ।😛

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