अट्ठारह दिन में, ग्यारह कड़ोड़, पच्चास लाख से भी ज्यादा हिटस्!

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मैडेलीन ४ सााल की हैं। वे अपने माता पिता के साथ इंग्लैंड से पुर्तगाल घूमने के लिये गयी थी। ३ मई की रात को, उनके माता पिता उसे सैरगाह में सुला कर खाना खाने चले गये। जब वे लौट कर आये तो मैडलीीन गायब थीं। पुर्तगाली एवं ब्रिटानिया पुलिस उसकी तलाश कर रही है पर कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। उसे ढ़ूढ़ने के लिये एक सरकारी वेबसाइट भी खोली गयी है जिस पर अभी तक ७६,००० सन्देश आ चुके हैं, १,८४,१५२.६६ पॉउंड धन का सहयोग आ चुका है, और ११,५०,००,००० हिटस् मिल चुके हैं। यदि आपको उसके बारे में कुछ मालुम हो तो ब्रिटानिया पुलिस को ०८००-०९६-१२३३ या फिर पुर्तगाली पुलिस को ००३५१-२८२-४०५-४०० पर खबर कर सकते हैं।

निठारी में सैकड़ों बच्चे गुम हो गये। आपको क्या लगता है कि यदि वेबसाइट बनी होती तो क्या होता। पता चलने के बाद भी क्या …

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

4 Responses to अट्ठारह दिन में, ग्यारह कड़ोड़, पच्चास लाख से भी ज्यादा हिटस्!

  1. पता चलने के बाद भी मोनिंदर पंढेर को क्लीन चिट मिल जाती है।

  2. mamta says:

    शायद ही कोई फर्क पड़ता .

  3. I wish!!! madelein unke parents ko mil jaye. Kya hota uske baare mein na hi puchiye to behtar hota.

  4. मेरी यही दुआ है कि मैडेलीन उसके माता पिता को जल्द से जल्द मिल सके , और मेरे भाई ये बस मार्केटिन्ग का कमाल है

    निठारी हो या लन्दन , बच्चे सभी माता पिता के लिये महत्वपुर्ण होते है,

    वैसे मुझे लगता है की कोई अन्तर नही आता । । ।

    सुदीप साकल्ले (लन्दन) १७/०६/२००७
    #
    Sudeep Sakalle (London) 17/06/2007

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