पैसों से, किसी को स्कूल का होमवर्क करने के लिये रख सकते हैं

सैंटा क्लारा कैलिफोर्निया के टाईकॉन २००७ तकनीकी मेले मेैं, एलीमेंटियो कम्पनी के १३ साल के सी.ई.ओ. अंशुल सामर भी उपस्थित हैं। आप लॉसन मिडल स्कूल क्यूपर्टिनो कैलिफोर्निया के सातवीं कक्षा के छात्र हैं। उनके साथ वहां, १३ साल के टीम सदस्य डैनियल टैन, और कंपनी की वाइस प्रसीडेंट, उनकी ११ साल की छोटी बहन शैली सामर भी उपस्थित हैं।

सामर का कहना है कि स्कूल की किताबें बोरिंग होती हैं और उनके खेल से विद्यार्थियों को रसायन शास्त्र में आवर्त-सारणी (periodic table) के तत्वों (elements) के गुणों को समझने में आसानी होगी। इस खेल का सूत्र है Create. Combat. Conquer.

 

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इस खेल में आपके तथा आपके विपक्षी के पास ६६ कार्ड हैं जो कि अलग अलग तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन कार्डों के पास, उसी तत्व जैसे गुण या शक्ति है। आपको अपने कार्डों के द्वारा अपने विपक्षी को हराना है। इस खेल को बनाने लिये उन्हें कैलिफोर्निया एसोसिएशन फॉर गिफ्टेड के द्वारा ५०० डॉलर इनाम में दिये गये थे।

वे पैसे कमा कर क्या करेंगे?

अंशुल का कहना है कि वे पैसे कमा कर उच्च शिक्षा के सबसे अच्छे विद्यालय में जाना चाहेंगे। कंपनी की वाइस प्रसीडेंट, उनकी ११ साल की छोटी बहन शैली सामर ने मजाक करते हुऐ कहा कि वे अपने स्कूल का होमवर्क करने के लिये किसी को भाड़े पर रख सकते हैं🙂

उनकी कंपनी की अपनी वेबसाइट है जहां आप उनके कार्डों के बार में जान सकते हैं। उनका मेले में दिया गया साक्षात्कार यहां देख सकते हैं।

इस खेल को वे तभी भेजना शुरू करेंगे जब उनके पास २५०० ऑर्डर आ जायेंगे।

मेरे तो बच्चे इस उम्र से निकल गये हैं और उनके बच्चों को अभी इस खेल समझने में समय है पर आप में से है कोई खरीददार!

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

4 Responses to पैसों से, किसी को स्कूल का होमवर्क करने के लिये रख सकते हैं

  1. paramjitbali says:

    इन्तजार करें, कोई तो आएगा।

  2. आलोक says:

    क्या बात है।

  3. mamta says:

    फिलहाल तो नही क्यूंकि हमारे बेटे भी बडे है।

  4. हमसे होमवर्क करवा लें!

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