प्रेम के रूप अनेक

प्रेम के रूप अनेक हैं। इसका एक रूप यह भी है, पढ़िये New York Times के इस लेख में। इस लेख को पढ़ने के लिये आप को New York Times के साथ रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जो कि एकदम मुफ्त है। New York Times अपने लेखों की अलग अलग श्रेणियों में आर.एस.एस. फीड देता है। आपको जो भी श्रेणी पसन्द हो उसकी आर.एस.एस. फीड ले सकते हैं। New York Times पर आये लेख काफी जानकारी के होते हैं
यदि इसके साथ, आप यह भी जानना चाहें कि अमेरिका में कंप्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट कराने के लिये क्या नियम है तो इसे मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर अमेरिका में पेटेंट का कानून की चिट्ठी पर यहां पढ़ सकते हैं और यदि इसे सुनना चाहें तो बकबक पर यहां सुन सकते हैं।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

2 Responses to प्रेम के रूप अनेक

  1. सही जानकारी है, जरुर देखूँगा … कभई आ कभी …🙂

  2. SHUAIB says:

    धन्यवाद – वही देखने जा रहा हूं🙂

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