क्या ओपेन सोर्स आंदोलन टूट रहा है?

ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर का सबसे लोकप्रिय लाइसेंस General Public License (जी.पी.एल.) है। इसके दो संस्करण आ चुके हैं, तीसरे के लिये बहस चल रही है और २००७ के शुरू में इसके आने की बात है। इसके दो मुद्दों पर विवाद है,

  1. Patents
  2. Digital Right mangment

पहले मुद्दे पर HP वालों की आपत्ति है तो दूसरे पर लिनूस टोरवालड की। बिसिनेस औन लाइन का यह लेख देखें, जो इस विवाद के इन पहलूवों को उजागर करता है।

यह महत्वपूर्ण है कि तकनीक से जुड़े लोग इसके बारे में क्या विचार रखते हैं पर मेरे विचार से ओपेन सोर्स आंदोलन के लिये यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यापार जगत इस बारे में क्या सोचता है।

पैसे के बिना तो घोड़ी भी नहीं चलती।

२३-२४ अगस्त को IIM B bangalore में GPL-3 की अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा है उसके बाद ज्यादा लोग IIT Delhi और Red Hat के द्वारा आयोजित सम्मेलन ‘Owning the Future’ में दिल्ली आ रहें हैं आशा है बड़े लोग मिल कर विवाद सुलझायेंगे। विवाद नहीं सुलझा तो शायद यह ओपेन सोर्स के लिये हानिकारक हो।

इसी बीच यदि आप यह जानना चाहें कि हरिवंश राय बच्चन ने अपने तथा एक अन्य साहित्यकार के बीच लिखे पत्र के प्रकाशन को लेकर चले विवाद के बारे में अपनी जीवनी के पहले भाग में जिक्र किया है कि नहीं तो उसे आप उन्मुक्त चिट्ठे पर मेरी पोस्ट ‘क्या भूलूं क्या याद करूं ‘पर यहां पढ़ सकते हैं। यदि इस विवाद के बारे में पढ़ना चाहें तो हरिवंश राय बच्चन – विवाद पर यहां पढ़ सकते हैं

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

2 Responses to क्या ओपेन सोर्स आंदोलन टूट रहा है?

  1. रवि says:

    इस चिट्ठे पर बहुत सारा मसाला पादसूचना (फूटर) के रुप में दिया गया है. क्या इन्हें साइडबार पर नहीं डाला जा सकता?

  2. उन्मुक्त says:

    यह सब साइड बार में ही हैं। लिनेक्स में साइड बार में ही दिखते हैं पर विंडोस़ में नीचे दिखायी पड़ते हैं। मैं नहीं कह सकता कि ऐसा क्यों होता है।

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