ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर एवं लिनेक्स

ओपेन सोर्स सौफटवेयर की चर्चा उंमुक्त के चिठ्ठे पर १५ कड़ियों मे १. ओपेन सोर्स सौफ्टवेर से शुरू होकर १५. ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर: लिनूस टोरवाल्डस एवं बिल गेट्स के विचार पर समाप्त हो गयी| लिनेक्स के बारे मे भी चर्चा ५ कड़ियों मे १. लिनेक्स: शुरुवात – यूनिक्स से शुरू होकर ५. लिनेक्स: अन्य लम्बित मुकदमे पर समाप्त हो गयी| इनको लिखते समय कई बार मन मे आया कि इन्हे छोड़ दूं| इसके कई कारण थे,

  • इनको कसबे मे इंटरनेट कि अचछी सुविधा न होने के कारण upload करने की मुशकिल;
  • ब्लौगरडौट कौम ने जो नखरे किये सो अलग (यह परेशानी हम मे से कईयों ने झेली);
  • इतने बड़े लेख को हिन्दी मे लिखने कि परेशानी – इतना समय भी नहीं कि दिमाग उसी पर केन्द्रित रखा जाय| इसी लिये रूप रेखा तो बना ली, पर इसे थोड़ा थोड़ा करके कड़ियों मे लिखा| एक बार मे पूरे लेख को लिखना किसी और के बस मे हो पर कम से कम मेरे तो नहीं|

यह सब तो परेशानी तो अपनी जगह पर, शायद इस बात की दुविधा सबसे ज्यादा कि क्या किसो को इन लेखों मे रुचि भी है अथवा नहीं| इनकी कोई जरूरत है भी कि नहीं| इन सब विषयों पर अंग्रेजी भाषा में बहुत कुछ और इन लेखों से अच्छा इन्टरनेट पर उपलब्ध है| क्या कोई इन्हे हिन्दी में पढ़ता भी है या पढ़ना चाहता है| क्या हिन्दी में उपलब्ध कराने के फायदे, उसे उपलब्ध कराने की मुश्किलो से ज्यादा हैं या हिन्दी मे उपलब्ध कराना ही इतना बड़ा फायदा है कि मुशकिलों को देखना नहीं|

रुचि कि बात तो इन लेखों पर आयी टिप्पणियों से भी मिलती हैं इन दो लेखों कि कड़ियों का यदि विश्लेषण करे तो लिनेक्स के लेख पर कोई टिप्पणी नहीं और ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर मे टिप्पणियों के लिये आपको माईक्रोस्कोप कि जरूरत पड़ेगी| पर कुछ टिप्पणियां अवश्य हैं, कुछ चिठ्ठेकार बन्धुवों ने अलग से ईमेल भी भेजी|

रवी कामदार जी ने एक टिप्पणी करके सुझाव दिया कि इसे pdf फौरमैट मे रख दूं यदि कोई इसे download करके पढ़ना चाहे तो पढ़ सके| पहले तो मुझे यह समझ मे नहीं आया कि कैसे करूं फिर ब्लौगर डौट कौम के बाद वर्ड प्रेस पर ब्लौग शुरू किया| वहां पर इस तरह कि सुविधा है| इसलिये एक नया चिठ्ठा लेख नाम से शुरू कर के इन दोनो लेख को ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर एवं लिनेक्स की कहानी के नाम से यहां और यहां रख दिया है| यहां पर इनकी पी.डि.एफ. फौरमट पर फाईल भी है, जो डाउनलोड की जा सकती है|यदि आगे कुछ संशोधन करना होगा तो उंमुक्त के चिठ्ठे पर लिख कर इन्ही लेखों पर कर दूंगा ताकि एक जगह updated version मिल जाय|

अन्य लोगों ने जिन्होने कुछ गलती सुधारी और हौसला अफ़जाई की वे हैं अनुनाद जी, रजीव जी, काली चरन जी, जीतेन्द्र जी, फ्रेडिक जी, नितिन जी, नवीन जी, विवेक जी, एवं बेन जी|

इन लेखों की कड़ियां लिखते समय मैने निम्न अन्य सम्बन्धित विषयों का उल्लेख तो किया था पर चर्चा नहीं की, वे हैं,

  • विश्व व्यापार संगठन तथा ट्रिप्स;
  • पेटेन्टस तथा इसका साफटवेयर से सम्बन्ध;
  • ओपेन डौक्यूमेन्ट फौरमैट (Open Document Format)|

इन सब विषयों पर अंग्रेजी भाषा में बहुत कुछ इन्टरनेट पर उपलब्ध है पर शायद हिन्दी में नहीं हिन्दी में इसे उपलब्ध कराने में कुछ मुश्किल होती है| बताइयेगा कि,

  • क्या हिन्दी चिठ्ठों पर इस तरह के लेखों की जरूरत है?
  • क्या लोग हिन्दी में इस तरह के लेख पसन्द करते हैं ?

पर यह सब उन्मुक्त मे ही; वह भी कड़ियों मे| एक बार मे बड़े लेख को लेखों कि आशा करना, …. है|

यदि आप,

  • फाइनमेन के व्यक्तित्व के बारे मे जानना चाहें या चैलेंजर दुर्घटना क्यों हुई के जांच कमीशन मे उनकी भूमिका के बारे मे तो उसे उंमुक्त चिठ्ठे पर फाइनमेन कड़ी की पांचवीं तथा अन्तिम पोस्ट पर यहां देख सकते हैं; और
  • नारद जी की छड़ी वाली पहेली का शतरंज के जादू या इसका कमप्यूटर विज्ञान से सम्बन्ध के बारे मे जानने मे इच्छुक हों तो उसे नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू की छटी एवं अन्तिम कड़ी मे यहां देख सकते हैं; और
  • यह जानने मे दिलच्सपी रखते हैं कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वेब साईट क्यों और न्यायालयों की वेब साईट से भिन्न है और यह वेब साईट न्यायालयों की वेब साईट से क्यों अनूठी है तो आप उसे मेरी अनुगूँज 20: नेतागिरी, राजनीति और नेता की प्रविष्टि के फुटनोट पर यहां देख सकते हैं|

के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

One Response to ओपेन सोर्स सौफ्टवेयर एवं लिनेक्स

  1. वैश्वीकरण के इस दौर में विश्वव्यापार संगठन,कथित बौद्धिक सम्पदा आदि को आप हिन्दी जाल जगत में शामिल कर रहे हैं -यह स्वागतयोग्य और अनुकरणीय है.

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