Archive for the 'विज्ञान' Category
बीसवीं शताब्दी भौतिक शास्त्रियों की थी। यदि आप में दुनिया बदलने की दम-खम थी, आप दुनिया बदलना चाहते थे तो आपका विषय था - भौतिक शास्त्र। पिछली शताब्दी के बेहतरीन मस्तिष्क वालों ने इसी विषय पर काम करना पसन्द किया पर इस शताब्दी के समाप्त होते होते ही, यह बदल गया। इक्कीसिवीं शताब्दी [...]
मैंने कुछ दिन पहले अपने उन्मुक्त चिट्ठे की चिट्ठी, ‘पापा, क्या आप उलझन में हैं‘, के द्वारा मुक्त मानक के महत्व की चर्चा की थी। क्या मुक्त मानक अमेरिकी राष्ट्रपती चुनाव के हिस्सा बन गये हैं?
बैरेक ओबामा का जन्म हवाई में, ४ अगस्त १९६१ को हुआ था। उनकी मां श्वेत और पिता अश्वेत [...]
मैंने कुछ दिन पहले एक चिट्ठी ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है‘ नाम की लिखी थी। जिसमें माइक्रोसॉफ्ट के जनरल मैनेजर, बिल हिफ, के बयान का उल्लेख किया था कि माइक्रोसॉफ्ट अपने शेएर्ड लाइसेंसेस् को ओपेन सोर्स इनिशिएटिव के सामने रख रहा है ताकि उस लाइसेंस के अन्दर प्रकाशित सॉफ्टवेर को ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर [...]
फ्रांसीसी अणुजीव वैज्ञानिक (microbiologist) एंटोनि डैंचिन (Antoine Danchin) ने अपनी पुस्तक ‘The Delphic Boat: What Genomes Tell Us’ में सवाल पूछा कि यदि निम्न चार में से, आप केवल तीन को ही बचा सकते होते तो किन तीन को बचायेंगे तथा किसे नष्ट होने देंते। यह चार हैं,
Michelangelo’s Pieta;
Shakespeare’s Hamlet;
Mozart’s Don Giovanni;
Einstein’s 1905 paper on [...]
प्रेम के रूप अनेक हैं। इसका एक रूप यह भी है, पढ़िये New York Times के इस लेख में। इस लेख को पढ़ने के लिये आप को New York Times के साथ रजिस्ट्रेशन करवाना होगा जो कि एकदम मुफ्त है। New York Times अपने लेखों की अलग अलग श्रेणियों में आर.एस.एस. फीड [...]
मुझे मालुम था, सारे हिन्दी चिट्ठेकार बन्धु बुद्धिमान हैं। कोई भी मेरी बातों में नहीं आयेगा; कोई भी अदृश्य हो जाने का वरदान नहीं लेना पसन्द करेगा क्योंकि यह वरदान नहीं है यह तो अभिशाप है; जी हां अभिशाप है। यदि कोई व्यक्ति अदृश्य हो जाये तो वह देख नहीं सकेगा - वह अन्धा हो [...]
पिछले कुछ वर्षों मे ‘मिस्टर इन्डिया’ और ‘गायब’ नाम की दो पिक्चरे आयीं। इन दोनो पिक्चरों मे हीरो के पास अदृश्य हो जाने की क्षमता थी। यह दोनो पिक्चरे आज से सौ साल पहले, एच.जी. वेल्स (१८६६-१९४६) के द्वारा १८९७ मे लिखी पुस्तक ‘द इंविसिबल मैन’ से प्रेरित थी। यदि आप इसे पढ़ना चाहें तो [...]
मै आपको स्नो-व्हाईट और सेवेन द्वार्फस की कहानी नहीं बताने जा रहा हूं| मै तो आपसे आईने के प्रतिबिम्ब, पैरिटी कंज़रवेशन, ४=५, और समलैंगिक रिस्तों के बारे मे बात करने जा रहा हूं| जी हां, वही ४=५ की विसंगति जिसे मैने यहां बताया था| आप तो कहेंगे,
‘अच्छा मजाक कर लेते हो| क्या इन सब मे [...]
चार बराबर पांच, पांच बराबर चार …
माफ कीजयेगा यह पोस्ट फिर से कर रहा हूं| क्या करूं Error 404 पीछा ही नहीं छोड़ रही है|
आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं यह ‘चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…’ क्या कर रहा हूं| क्या करूं कुछ उलझन मे फंस गया हूं एक चिठ्ठेकार बंधु से [...]
आकाश के तारे वास्तव मे सूर्य हैं| उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त मैं हार्वड औबसरवेटेरी ने तारों का वर्गीकरण इनसे निकली रोशनी का विश्लेषण करके किया| आज यह मालुम है कि यह मोटे तौर पर उनके तापमान पर निर्भर करता है| इस वर्गीकरण को A से शुरू होकर M तक के अक्षरों तक के एल्फाबेट [...]