Archive for the 'विचार' Category
‘मैं ग़ज़ल हूं। मैं २४ साल पुरुष शरीर के अन्दर, कैद रही शल्यचिकित्सा से आज़ाद हुई। बहुत समय निकल गया, बहुत कुछ रह गया, छूट गया, बहुत कुछ पाना है - कपड़े, चूड़ियां, बालियां, मेकअप पर मैंने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ पा ली - जो अक्सर लोगों [...]
मैं समलैंगिक रिश्तों का हिमायती नहीं हूं पर ऐसे लोगो को हेय दृष्टि से देखना, या उनके साथ भेदभाव करना, गलत समझता हूं।
कुछ व्यक्ति, दो लिंगों के बीच फंस (intersex) जाते हैं। मैं ऐसे लोगों का मजाक बनाना गलत समझता हूं। मेरे विचार से लिंग डिज़िटल नहीं होता। इसे दो भागों में नहीं बांटा [...]
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काश
बालों में उलझती, खुद को उलझाती
तेरे चेहरे पे सरसराती
मेरी उंगलिया होठों पर रुक जातीं
कान मॆ धीमे से गुनगुनातीं
अधखुली अधजगी आखॊ में
अनगिनत सपने लिए
तेरे बदन की खुशबू को
अपनी रूह में बसाती
कुछ सिमट-सिकुड कर
तेरी बाहॊ में टूट जाती
काश ऐसा हो पाता
तू [...]
कुछ दिन पहले, हिन्दी चिट्ठाजगत में पत्रकार और चिट्ठाकार के सम्बन्ध में बहस शुरू हुई। शायद यह भी अनुमान लगाया गया कि पत्रकार, चिट्ठाकार क्यों बने। शायद कुछ नये सिद्धान्त भी प्रतिपादित किये गये। यह बहस शायद अभी भी हिन्दी चिट्टाजगत में चल रही है।
मैं ‘शायद’ शब्द का, इसलिये प्रयोग कर रहा हूं क्योंकि [...]