Archive for the 'पुस्तक समीक्षा' Category
कुछ समय पहले मैंने जूले वर्न के बारे में चिट्ठी पोस्ट की थी। इस चिट्ठी में उनकी कई और पुस्तकों का जिक्र किया था। यह सारी पुस्तकें तथा अंग्रेजी साहित्य एवं अन्य भाषाओं में लिखे प्रसिद्ध उपन्यास, मैंने अपने बचपन में पढ़े थे। इसमें अधिकतर हिन्दी में ही थे।
जुले वर्न की पुस्तक अस्सी दिन में [...]
हैकर भाई, तुम सर्वशक्तिमान हो। सारी गलती मेरी ही थी। मेरा चिट्ठा वापस करने के लिये शुक्रिया, धन्यवाद।
चिट्ठा वापस पाने में, नानी याद आ गयीः कितनी मिन्नत, कितनी विनती, कितना मक्खन - मैं ही जानता हूं। मक्खन लगाने के लिये तो ‘You’re too Kind’ पुस्तक के सारे टिप्स प्रयोग करने पड़ गये। क्या कहा, आपने [...]
१९६० दशक के पहले भाग में, मेरा स्कूली जीवन बीता। उसी समय To Sir with Love नामक पुस्तक पढ़ी थी। यह पुस्तक ई.आर. ब्रेथवेट ने लिखी है। बाद में इसके ऊपर एक पिक्चर भी बनी। वह भी तभी देखी। यह एक अश्वेत अध्यापक की कहानी है जो कि लंदन के उदण्ड विद्यार्थियों के स्कूल में [...]