Archive for the 'दर्शन' Category
‘मैं ग़ज़ल हूं। मैं २४ साल पुरुष शरीर के अन्दर, कैद रही शल्यचिकित्सा से आज़ाद हुई। बहुत समय निकल गया, बहुत कुछ रह गया, छूट गया, बहुत कुछ पाना है - कपड़े, चूड़ियां, बालियां, मेकअप पर मैंने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ पा ली - जो अक्सर लोगों [...]
मैं समलैंगिक रिश्तों का हिमायती नहीं हूं पर ऐसे लोगो को हेय दृष्टि से देखना, या उनके साथ भेदभाव करना, गलत समझता हूं।
कुछ व्यक्ति, दो लिंगों के बीच फंस (intersex) जाते हैं। मैं ऐसे लोगों का मजाक बनाना गलत समझता हूं। मेरे विचार से लिंग डिज़िटल नहीं होता। इसे दो भागों में नहीं बांटा [...]
अक्सर चिट्ठाकार, केवल अपने सिर का चित्र बना कर जिसमें गले के नीचे कुछ नहीं होता है, अवतार के लिये या फिर परिचय के लिये, अपने चिट्ठा पर डालते हैं। कभी, कभी केवल पूरा शरीर भी होता है। इसे हैकरगॉचिस् कहते हैं।
GNU Image Manipulation Programme (GIMP) जिम्प के [...]
१९६० दशक के पहले भाग में, मेरा स्कूली जीवन बीता। उसी समय To Sir with Love नामक पुस्तक पढ़ी थी। यह पुस्तक ई.आर. ब्रेथवेट ने लिखी है। बाद में इसके ऊपर एक पिक्चर भी बनी। वह भी तभी देखी। यह एक अश्वेत अध्यापक की कहानी है जो कि लंदन के उदण्ड विद्यार्थियों के स्कूल में [...]