यदि यह आनन्द नहीं तब और क्या

इस चिट्ठी में कर्ट वोनेगेट के एक प्रसिद्ध उद्धरण, ज़ेन पेन्सिल चिट्ठे, और और मेरे प्रिय समय की चर्चा है।

कर्ट वोनेगेट फिल्म 'बैक टू स्कूल' फिल्म में

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सुन्दरता का पैमाना

मिस कैलिफोर्निया - एलिस्सा कैम्पैनेल्ला

इस चिट्ठी में, मिस यूएसऐ २०११ की प्रतियोगिता में प्रतियोगियों के विकासवाद के विचारों के बारे में चर्चा है।

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१०० रातों का वायदा, चला ३२१८ रातें

इस चिट्ठी में ऐलिस ऑज़मा के द्वारा लिखित पुस्तक  ‘द रीडिंग प्रॉमिस’ के बारे में चर्चा करते हुऐ बच्चों में पुस्तक प्रेम जगाने के तरीके के बारे में चर्चा है।

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सुन्दर वह, जो सुन्दर काम करे

फिल्म रोम

रोमन हॉलीडे में ऑड्री हेपबर्न

मेरे लिये वास्तविक सुन्दरता का अर्थ है सुन्दर कार्य करना। इस बारे में ऑड्री हेपबर्न के बारे उनकी कुछ बातें।

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कर्म से है सबकी पहचान

मेरे कुछ दिन तनाव में बीते। कल मन में शान्ति आयी। मैं और शुभा बहुत दिनो बाद मस्ती करने के लिये निकल गये। बिना किसी प्रोग्राम के, बिना किसी खास जगह जाने के लिये, खाना भी रात में बाहर ही खाया।  रात देर में लौटे।

कल गांधी जयन्ती भी थी। मुझे अपनी पुरानी एक चिट्ठी मेरे जीवन में धर्म का महत्व याद आयी। यह मैंने अनुगूंज के लिये लिखी थी। एक अनमोल तोहफा लिखते समय मैंने लिखा था कि यह मेरी सबसे प्यारी चिट्ठी है। यह आज भी सच है। मेरी सारी चिट्ठियों में केवल यही चिट्ठी पद्य में है। यह पुनः प्रेषित है। Read more of this post

मैंने ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये लिखी

मैंने इस चिट्ठे की पिछली चिट्ठी में बताया था कि मैंने ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके‘ श्रृंखला ज्योतिष पर विश्वास करने वालों का मजाक बनाने के लिये या किसी की आस्था या विश्वास पर चोट पहुंचाने के लिये नहीं लिखी थी और वायदा किया कि इसके लिखने का कारण बताउंगा। इस चिट्ठी इस श्रृंखला के लिखने का कारण है। Read more of this post

‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी गयी थी

कुछ समय पहले मैंने  ‘नाई की दाढ़ी को कौन बनाता हैनामक चिट्ठी लिखी। इसमें संस्कृत का एक श्लोक भी लिखा था। मैं जानना चाहता था कि वह कहां से है। कई चिट्ठाकार बन्धुवों ने मदद की। इस पर अरविन्द जी ने   ‘मेरे ही बुकशेल्फ में छुपा था उन्मुक्त जी के प्रश्न का जवाब!‘ नामक चिट्ठी लिखी। इस पर   हिमान्शू मोहन जी, ने टिप्पणी की,

‘… एक बात और यहाँ साथ ही कहता चलूँ – जो मैंने उन्मुक्त की पोस्ट पर भी कही थी – कि बिना पूरी तरह जाने किसी विषय को, उस के बारे में अच्छी या बुरी धारणा बना लेना – पूर्वाग्रह है। सतर्क और जिज्ञासु – ज्ञान-पिपासु को इससे बचना चाहिए।’

राशियां – चित्र  विकिपीडिया के सौजन्यसे

मैंने भी वहीं टिप्प्णी कर कहा था कि मैं जल्द ही अपनी बात रखूंगा। यह रहा मेरे जवाब का पहला भाग। Read more of this post

मोगाम्बो खुश हुआ

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मैंने कुछ समय पहले बचपन में पढ़ी आर्ची कॉमिक्स के बारे में ‘हाय, यह क्या किया – मेरा दिल ही टूट गया‘ नाम से एक चिट्ठी लिखी थी।  यह इसलिये क्योंकि आर्ची कॉमिक्स प्रकाशकों ने घोषणा की थी कि आर्ची, विरॉनिका से शादी कर रहा है। मेरा तो दिल ही टूट गया।

मुझे लगता है कि कोई बेवकूफ ही बॅटी जैसी प्यारी और बेहतरीन व्यक्तित्व की लड़की छोड़ कर, विरॉनिका जैसी अमीर पर घमन्डी लड़की से शादी कर ले। यह सारी कहानी छः अंकों में लिखी जानी थी। इसके पहले तीन अंक कुछ इस तरह के थे। इसे देख कर तो बस क्या बताउं …



मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आर्ची क्यों इतनी बड़ी भूल कर रहा है। मेरे विचार में उसके लिये विरॉनिका नहीं, पर बॅटी सही है। उसे बॅटी से शादी करनी चाहिये। लेकिन मैंने पहली वाली चिट्ठी का अन्त करते समय लिखा था कि क्या कहानी में ट्विस्ट है।

ट्विस्ट तो है। लेकिन आने वाले तीन अंको का चित्र तो देखिये।

आ गया न मजा। दिल खुश हुआ न। शायद यह इसलिये हुआ कि इस बारे में सारे मतदान में ८०% लोगो ने कहा कि आर्ची को बॅटी से और केवल २०% ने कहा कि विरॉनिका से शादी करनी चाहिये। इसके बारे में आप विस्तार से न्यू यॉर्क टाइम्स् का यह या ईकोनॉमिक्स् टाइमस् का यह लेख पढ़ सकते हैं।


अन्य संबन्धित लेख

सांकेतिक शब्द

Archie Comics, Archie Andrews, Betty Cooper, Veronica Lodge, Betty and Veronica,

कोई वकील क्यों बनना चाहता है?

‘उन्मुक्त जी, यह भी कोई सवाल है। क्या, कोई वकील भी बनना चाहता है। lawyer prestige

लगता है आपको मालुम नहीं, आज के समाज में स्पैमरस्  के बाद, समाज में, सबसे तिरस्कित  वकील ही हैं। कुछ वकील जरूर पैसा कमाते हैं पर अधिकतर तो फटेहाल ही हैं। यह सुन कर की आप कानून पढ़ रहे हैं, सुन्दर लड़कियां दूसरी तरफ मुंह फेर लेती हैं। फिर कोई वकील क्यों बनना चाहेगा।

यह कार्टून मेरा बनाया नहीं है। मैंने इसे यहां से लिया है। Cartoon by Nicholson from “The Australian” newspaper: www.nicholsoncartoons.com.au

जाइये, जाइये, मुझे न बताइये। मुझे सब मालुम है कि कोई वकील क्यों बनता है। पहले लोग आई.सी.एस. बनने विलायत जाते थे। आई.सी.एस. में फेल हो गये तो बार एट लॉ बन गये। आजकल इंजीनियरिंग, डाक्टरी या किसी प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला नहीं मिला, कुछ करने को नहीं हुआ – वकालत की पढ़ाई करने लगे। उसके बाद वकील बन गये। अब आगे कुछ न कहलवाइये। कहीं, न्यायालय की अवमानना न हो जाय या फिर चिट्ठजगत से विदा लेनी पड़े।’

क्या आपका भी यही सोचना है। क्यों न यह सवाल उनसे पूछा जाय जो वकालत पढ़ रहे हैं। क्योंकि वे ही इसका सबसे अच्छा जवाब दे सकते हैं।

ऐक्सस ग्रुप विद्यार्थियों को ऋण की सुविधा प्रदान करता है। वे कई सालों से, अमेरिका में कानून में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच एक प्रतियोगिता करा कर यह सवाल पूछते हैं। इस प्रतियोगिता में,  विद्यार्थियों को चार मिनट से कम समय का विडियो बना कर यूट्यूब में डालना होता है कि वे क्यों वकील बनना चाहते हैं। उन्हें इसके लिये क्यों और कहां से प्रेणना मिली। इसमें एक पुरुस्कार १०,००० डॉलर और पांच पुरुस्कार १,५०० के दिये जाते हैं।

इस साल की प्रतियोगिता में ११३ विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन विडियों में से दस विद्यार्थियों के विडियो को चुना गया। इसके पश्चात लोगों ने वोटिंग की। इस वोटिंग में  ब्रानिगन रॉबर्टसन (Branigan Robertson) को प्रथम पुरुस्कार मिला। वे शैपमैन कानून विश्विद्यालय (Chapman University School of Law) के विद्यार्थी हैं।

आप रॉबर्टसन के बनाये विडियो को नीचे देखें। आपको वकील के जीवन का दूसरा पहलू भी देखने को मिलेगा। शायद यह जीवन, किसी  अन्य जीवन से, कहीं अधिक रोमांचकारी और समाजसेवा का है। क्या मालुम आपके विचार बदल जायें। जहां तक मेरा सवाल है, मुझे अनगिनत, अलग अलग प्रोफेशन के लोगों की जीवनी पढ़ने का मौका मिला। मैं तो यही सोचता हूं कि वकील का जीवन रोमांचकारी और समाजसेवा का है।

यदि आप अन्य पुरुस्कृत विडियो को देखना चाहें उन सबके बारे में यहां सूचना है।

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सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)

  • विकासवाद को पढ़ाने से मना करने वाले कानून – गैरकानूनी हैं:
  • मंकी ट्रायल:
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।

न्यायालय ५ बजे बन्द होता है

शैरन केलर (Sharon Keller) सबसे पहले १९९४ में टेक्साज़ अपीली न्यायालय की न्यायाधीश चुनी गयी थीं। वे इसकी मुख्य न्यायधीश २००० में, फिर पुनः २००६ में २०१२ तक चुनी गयीं। लेकिन, क्या वे तब तक इस पद पर बनी रहेंगी।

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शैरन (अगली पंक्ति के मध्य में) अपने सहयोगियों के साथ - चित्र टेक्साज़ अपीली न्यायालय के वेब साइट के सौजन्य से है।

‘अरे उन्मुक्त जी, क्या हुआ उन्हें, क्या वे किसी बेहतर जगह जा रहीं हैं?’


बेहतर तो नहीं, पर उन्हें निकाले जाने के लिये जांच चल रही है।


‘उन्मुक्त जी, मुख्य न्यायाधीश पर जांच—क्या जुर्म किया है उन्होंने’


उन्होंने वकील से कहा कि न्यायालय ५ बजे बन्द होता है और उसे ५ बजे ही बन्द कर दिया।


‘लीजिये, इसमें क्या खता हो गयी कि उन्हें निकाले जाने के लिये जांच चल रही है।’


बहुत कुछ।

न्यायामूर्ति होल्मस् अंग्रेजी में फैसला लिखने वाले न्यायमूर्तियों में सबसे जाने माने न्यायमूर्ति हैं। वे बीसवीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायया लय के न्यायाधीश थे। उनके अनुसार,

  • जज़ वास्तव में फैसला मुकदमों के तथ्यों पर ले लेते हैं फिर उस पर कानून का जामा पहना कर कारण लिखते हैं।
  • उनके तथ्यों पर लिये गये अधिकतर फैसले, कानून दायरे के बाहर होते हैं और ‘अव्यक्त धारणा’ (inarticulate major premise) पर निर्भर होते हैं।

    न्यायमूर्ती होल्मस् का चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से


मैं नहीं जानता कि inarticulate major premise का ठीक अनुवाद ‘अव्यक्त धारणा’ है कि नहीं इसे तो हिन्दी ज्ञानी ही बता पायेंगे पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस प्रकार बड़े हुऐ, हमें कैसा वातावरण मिला।


हेरॉल्ड लास्की पिछली शताब्दी में अंग्रेज साम्यवादी विचाराधारा के विचारक हुऐ हैं। वे लंडन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स अध्यापक रहे और भारतियों के जीवन के प्रेणनास्रोत। उनकी लिखी प्रसिद्ध पुस्तक है द ग्रामर ऑफ पॉलिटिक्स (The Grammar of Politics) इस पुस्तक में वे बताते हैं कि अच्छा जज़ वह जो अपनी अव्यक्त मुख्य प्रस्तावना से उपर उठ सके उनके मुताबिक होल्मस् के अतिरिक्त शायद कोई जज़ नहीं हुआ जो कि इसके ऊपर उठ सका। यह बात न्यायधीश शैरन कैलर के आचरण से साबित होती है जिसके कारण उनको हटाये जाने की जांच चल रही है।


२५ सितम्बर २००७ शाम पौने पांच बजे शैरन के पास वकील ने फोन किया,

‘माईकेल रिचार्ड मेरा मुवक्किल है। वह फांसी के तख्ते पर है। उसे आज रात में फांसी हो जायगी। सर्वोच्च न्यायालय के नये फैसले के आधार पर उसकी फांसी की सजा कट सकती है। इसके लिये वे एक याचिका प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके कंप्यूटर में कुछ गड़बड़ी होने के कारण उन्हें आने में देर हो रही है। कृपया न्यायालय कुछ देर कर और खुला रखें ताकि हम यह याचिका प्रस्तुत कर सकें।’


शैरन ने जवाब दिया कि न्यायालय ५ बजे बन्द होता है। उसे घर में कुछ ठीक करवाना था। उसने न्यायालय बन्द करवाया और अपने घर मेकैनिक के साथ चली गयी। रात में माईकेल को फांसी हो गयी।


वकील ने शैरन के खिलाफ अभियोग दर्ज कराया कि उनका आचरण अनुचित था। वे जज़ बनी रहने के काबिल नहीं हैं। इसी कारण उन पर जांच चल रही है। जांच के दौरान, उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि उन्होंने फोन मिलने के बाद भी न्यायालय बन्द कर दिया था। उनका कहना है,

‘माईकेल को एक महिला के साथ बलात्कार करने के बाद उसे मारने का जुर्म था। उसने इस जुर्म को स्वीकार कर लिया था। उस पर दो बार मुकदमा चल चुका था। उसकी याचिका पर पुनः सुनने की जरूरत नहीं थी।’


उन्होंने स्पष्ट किया,

‘यदि इस तरह की बात फिर उठेगी तो वे पुनः इस तरह का व्यवहार करेंगी।’


यदि, शैरन,  उस वकील की याचिका को सुन कर कहती कि उसमें कोई बल नहीं है तब  अलग बात होती, पर बिना उस याचिका देखे, सुने
यह कह देना अनुचित है। शायद, वे भूल गयीं कि जीवन लिया जा सकता है और एक बार उसके जाने के बाद, कभी भी वापस नहीं दिया जा सकता। एक बार जो चला गया वह वापस नहीं आ सकता। माइकेल के वकील की प्रार्थना ऐसी नहीं थी जो बिना सुने खारिज की जा सकती हो।

मेरे विचार से, शैरेन इस ‘अव्यक्त धारणा’ से ग्रसित थीं कि माईकेल को फांसी होनी चाहिये और किसी बात से ग्रसित हो कर काम करना, जज़ के आचरण के विरुद्ध है।

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इस विषय पर संबन्धित लेख नीचे दिये गये लिंक पर पढ़े जा सकते है।

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