मै हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं उन्मुक्त नाम से एक और चिठ्ठा लिखता हूं। जिसमे आप सब को अपने विचारों से बोर करता हूं। यह अक्सर कड़ियों में करता हूं फिर उन्हें संकलित कर लेख में रखता हूं। टीवी, अखबार, तथा इन्टरनेट पर बहुत कुछ आता रहता है। इस चिठ्ठे पर, उनमे से कुछ के बारे मे जिक्र करके आपको बोर करूंगा - यदि आप पहले से पढ़ कर बोर नहीं हुए होंगे तो।
मेरे एक मित्र के पुत्र की आखें कमजोर हैं वह अक्सर ऐसे प्रोग्राम के बारे में पूछता रहता है जिसमें पढ़ना न पड़े और वह सुन सके। इसलिये एक पॉडकास्ट ‘बकबक‘ नाम से शुरू की। पॉडकास्ट की अधिकतर फाईलें ogg, ओपेन सोर्स फॉरमैट, मे हैं। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
- Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;
- Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और
- Mac-OX पर कम से कम Audacity में,
सुन सकते हैं। यह ogg फॉरमैट में क्यों है इसके बारे में आप मेरी चिट्ठी ‘पापा, क्या आप इलझन में हैं‘ पर पढ़ सकते हैं।
मेरे तीनो चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सारी पोस्टें, कौपी-लेफ्टेड हैं। आपको इनका प्रयोग व संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या इस पॉडकास्ट को दें और अच्छा हो कि उस पोस्ट से लिंक दे दें। मुझे और भी प्रसन्नता होगी यदि इनका उपयोग ऐसे लोगों के लिये किया जा सके जिनकी आखें कमज़ोर हैं।
मैंने एक फीड एक्रेगेटर चिट्ठे और पॉडकास्ट नाम से बनाया है। इसमें देवनागरी में लिखे सारे चिट्ठों की प्रविष्टियों की सूचना आती है। इसका भी आप जैसा चाहे वैसा प्रयोग कर सकते हैं।
मेरी पत्नी भी एक चिट्ठा ‘मुन्ने के बापू‘ के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। हमारे में बारे में आप ‘भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर‘ चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं। मुझसे सम्पर्क का पता यह है।