दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की
जनवरी 23, 2012 1 टिप्पणी
इस चिट्ठी में, ‘डिसकवरी साइंस’ (Discovery Science) चैनल पर आ रही ‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) श्रृंखला की आर्थर सी क्लार्क पर कड़ी पर चर्चा है।

प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन की आर्थर सी कलार्क कड़ी से
आर्थर सी क्लार्क, पिछली शताब्दी के महानतम विज्ञान कहानी लेखकों में थे। उनका जन्म १६ दिसंबर १९१७ को हुआ था बाद में उन्हंने लंका को अपना घर मान लिया ता वहीं उनकी मृत्यु १९ मार्च २००८ में हो गयी।
क्लार्क ने, दूसरे महायुद्ध के बाद, भविष्यवाणी की थी किस तरह सैटेलाइट के द्वारा संवाद संभव हो सकेगा। आज यह सब हो गया है और इसके बिना जीवन सोच पाना असंभव है।
आर्थर सी कलार्क - चित्र विकिपीडिया से
‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां‘ श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त‘ लिखते समय मैंने उनके लेख ‘Hazards of Prophecy: The Failure of Imagination’ का हवाला देते हुऐ इसमें उनके द्वारा भविष्य के लिये प्रतिपपादित निम्न तीन सिद्धान्तों का जिक्र किया था।
- When a distinguished but elderly scientist states that something is possible, he is almost certainly right. When he states that something is impossible, he is very probably wrong. जब कोई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कहे कि कुछ संभव है तो वह निश्चित तौर पर सही होते हैं पर जब वे कहते हैं कि यह असंभव है तो सम्भावना यह है कि वे गलत हैं।
- The only way of discovering the limits of the possible is to venture a little way past them into the impossible. क्या संभव है जानने के लिये, केवल रास्ता है कि संभव से हटकर असंभव की तरफ देखें।
- Any sufficiently advanced technology is indistinguishable from magic. किसी भी पर्याप्त विकसित तकनीक और जादू में फर्क कर पाना नामुमकिन है।

अन्य ग्रहों का रास्ता
मेरा स्कूली जीवन, और विश्विद्यालय का जीवन उनकी पुस्तकों को पढ़ते बीता। बाद में उन्होंने बहुत से उपन्यास जेन्टरी ली (Gentry Lee) के साथ लिखे। मैंने यह सब पढ़े। उनकी लिखी पुस्तकें पढ़ने योग्य हैं। यदि आपने या आपके मुन्ने, मुन्नी ने नहीं पढ़ा तो उन्हे अवश्य पढ़ने के लिये प्रोत्साहित करें। हांलाकि उनकी लिखे उपन्यासों में दर्शन का पुट होने के कारण, समझने कुछ मुश्किल होती है।
‘बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां’ की श्रृंखला की कड़ी ‘विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार‘ में मैंने ह्यूगो पुरुस्कार की चर्चा की थी। क्लार्क को यह पुरुस्कार १९५८ में उनकी कहानी ‘द स्टार’ (The Star) के लिये मिला था। मैंने इस कहानी की चर्चा ‘वह तारा‘ नामक चिट्ठी में की है। इसको आप यहां सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, ‘बकबक’ पर पॉडकास्ट कैसे सुने देखें।
- विज्ञान कहानियों के पैगम्बर, कल की भविष्यदृष्टा – मेरी शैली;
- कल के भविष्यदृष्टा – आर्थर सी क्लार्क।
उन्मुक्त चिट्ठे पर विज्ञान कहानियों पर लिखी गयीं चिट्ठियां
- अस्सी दिन में दुनिया की सैर – लेखक जुले वर्न;
- फैंटास्टिक वॉयेज: अद्भुत यात्रा – लेखक आइज़ेक ऍसीमोव;
- उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में;
- पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां;
- ग्रहण पर आधारित कहानियां;
- जब रात हुई – नाइटफॉल लेखक आइज़ेक ऍसीमोव;
- वह तारा – द स्टार लेखक आर्थर सी कलार्क;
- जयंत विष्णु नार्लीकर की विज्ञान कहानी – वामन की वापसी;
- भाषायें लुप्त हो जाती हैं – गणित के सिद्घान्त नहीं – ‘अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्चर’ लेखक एयोस्टोलोस डॉक्सिएडिस;
- आज, मुझसे शादी करोगी -’द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी’लेखक डगलस ऐडम्स्;
- ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो – फिल्म इंडिपैंडेंटस डे;
- मेरी गॉडविन और पहली प्रसिद्ध विज्ञान कहानी फ्रैंकेस्टाइन।
- रीजेन्ट डायमन्ड: ►;
- दरियाये नूर और नूर उल ऎन गुलाबी हीरे: ►।
सांकेतिक शब्द
। Arthur C Clark, Gentry Lee, 2001 Space Odyssey, Stanley Kubrick,The Sentinel, The City and the Stars, Hugo award,
। Discovery Science, Prophets of Science Fiction, Prophets of Science Fiction, Ridley Scott,
। book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,

विज्ञान कथाओं के प्रति आपके लगाव और योगदान की ब्लागजगत में कोई सानी नहीं है ……आर्थर सी क्लार्क ने उपग्रहों के जरिये संचार की परिकल्पना १९४५ के आस पास ही कर ली थी !