कौन सा मनका पहले पहुंचेगा और बड़ा निशान बनायेगा

इस चिट्ठी में न्यूयॉर्क के नम्बर प्ले की कड़ी से एक अन्य पहेली

यह चित्र उसी नम्बर प्ले की उसी चिट्ठी से है।

कुछ समय पहले मैंने बताया था कि न्यूयॉर्क टाईमस् का वर्डप्ले ब्लॉग ‘Wordplay – New York Times Blog‘ है। इसमें पहेलियों का जिक्र रहता है। इसकी एक कड़ी ‘Numberplay: Treat or Trick‘ हैं यह मुझे पसन्द आती है। कुछ समय पहले ‘किस गोले से चॉकलेट निकालूं‘ नामक पहेली प्रकाशित की थी। वहीं से एक अन्य पहेली यहां से ।

ऊपर का चित्र देखें। इसके दोनो मनके और तार एक समान हैं केवल तार में बीच के उभार के। दोनो मनकों का भार भी एक है। तार के अन्त में मोम का टुकड़ा है। मनके और तार के बीच का घर्षन (friction) शून्य है। यदि दोनो मनकों को ऊपर से एक साथ छोड़ा जाय तब,

  1. कौन सा मनका पहले पहुंचेगा; और
  2. कौन सा मनका मोम में गहरा गड्ढा या निशान बनायेगा।

केवल जवाब की बात नहीं है, जवाब का कारण, ज्यादा महत्वपूर्ण है।

फिलिप्स पॅटी फ्रांसीसी हैं। उन्हें तारो के ऊपर चलने में महारत हासिल है। ७ अगस्त १९७४ को वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर की टावर के बीच तार डाल कर उस पर चले थे। २००८ में, बीबीसी के द्वारा उस पर एक ‘मैन ऑन वायर’ (Man on Wire) नाम का छाया चित्र बनाया गया था। उसी का अधिकारिक झलकी देखिये।

गणित और पहेलियों से सम्बन्धित कुछ अन्य चिट्ठियां।
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सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, 
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परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

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