विज्ञान कहानियों के पैगम्बर, कल की भविष्यदृष्टा – मेरी शैली

इस चिट्ठी में, ‘डिसकवरी साइंस’ (Discovery Science) चैनल पर आ रही ‘प्रॉफेटस् ऑफ साइंस फिक्शन’ (Prophets of Science Fiction) नामक श्रृंखला के साथ, इसकी मेरी शैली पर पहली कड़ी की चर्चा है।

रिडले स्कॉट 'प्रॉफॅटस् ऑफ साइंस फिक्शन' श्रृंखला का परिचय करावाते हुऐ

विज्ञान कहानियां आने वाली कल की तस्वीर हैं  – विज्ञान कहानियों के पैगम्बर, भविष्यदृष्टा भी हैं। विज्ञान कहानियां और उन पर बनी फिल्में, बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने का बेहतरीन तरीका भी हैं। इसी को ध्यान में रख कर ‘Discovery Science’ चैनल ने ‘Prophets of Science Fiction‘ नामक श्रृंखला शुरू की है। इसे रिडले स्कॉट ने बनाया है। इसमें विज्ञान कहानी लेखकों के बारें में, उनकी कहानियों के परिचय के साथ, यह बताया जा रहा है कि किस प्रकार उनके द्वारा लिखी विज्ञान कहानियां आज के विज्ञान की दिशा तय कर रही हैं। यह एक बेहतरीन श्रृंखला है यदि यह चैनल आपके पास आता है तो अवश्य देखें।

इस श्रृंखला के पहले चरण में, मेरी शैली (Mary Shelley), फिलिप्स् के डिक (Philip K. Dick) एच जी वेल्स्   (H.G. Wells) आर्थर सी क्लार्क (Arthur C. Clarke) आइज़ेक ऍसीमोव (Isaac Asimov) जुले वर्न (Jules Verne),  रॉबर्ट हेलेन (Robert Heinlein), और जॉर्ज ल्यूकस् पर (George Lucas) पर प्रोग्राम प्रकाशित होगा। इसकी पहली चार कड़ियों का प्रकाशन हो गया है और बाकी चार का फरवरी में होगा।

इस टीवी श्रृंखला की पहली कड़ी मेरी गॉडविन और उसकी कृति फ्रैंकेस्टाइन को समर्पित है। यह मेरी गॉडविन को श्रधांजलि है क्योंकि उसकी लिखी विज्ञान कहानी फ्रैंकेस्टाइन सही अर्थों में पहली प्रसिद्ध विज्ञान कहानी है।

मेरी शैली को फ्रैंकेस्टाइन की कल्पना एक स्वप्न में हुई - चित्र टीवी श्रृंखला से

शैली और बाइरन प्रसिद्ध अंग्रेजी के कवि थे। मेरी गॉडविन शैली से प्रेम करती थीं और उनकी सतौली बहन क्लेर बाइरन से। इन लोगों ने, १८१६ में, स्विटज़रलैंड में जेनेवा झील के पास, विला डाओदेटी (Villa Diodati) नामक फार्म हाउस में समय बिताया। फार्म हाउस में मनोरंजन के लिये वे लोग अकसर भूतों की कहानियों की चर्चा करते थे। इससे बाइरन को प्रेणना मिली। उसने यह सुझाव दिया कि क्यों नहीं वे सब कोई डरावनी कहानी लिखें और देखें कि कौन सबसे डरावनी कहानी लिख सकता है। इसी चुनौती को स्वीकार करके मेरी ने फ्रैंकेस्टाइन कहानी की कल्पना एक स्वप्न में की और वहीं लिखना शुरू किया हांलाकि इसे  इंगलैंड में वापस आ कर पूरा किया।

मुझे विज्ञान कहानियां पसन्द हैं। मैं अपने ‘उन्मुक्त‘ चिट्ठे पर अक्सर ‘विज्ञान कहानियों‘ का जिक्र करता रहता हूं। कुछ साल पहले, मेरी शैली और उसके लिखा उपन्यास फ्रैंकेस्टाइन के बारे में, मैंने अपने उन्मुक्त चिट्ठे पर ‘मेरी गॉडविन और पहली प्रसिद्ध विज्ञान कहानी फ्रैंकेस्टाइन‘ नामक चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में इस बात पर भी जोर दिया था किस प्रकार बच्चों को विज्ञान में रुचि पैदा की जाय। इस चिट्ठी मेरी के जीवन और यह कहानी किस प्रकार लिखी गयी पर प्रकाश डाला है। यह कड़ी यह भी बताती है कि मेरी के विचारों पर किस प्रकार और कहां शोध हो रहा है। यदि आप मेरी की पहली कड़ी देखना चाहें तब  इसे नीचे देख सकते हैं।  यह बेहतरीन है।

उन्मुक्त चिट्ठे पर विज्ञान कहानियों पर लिखी गयीं चिट्ठियां

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सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर तरफ का विज़िट, 

सांकेतिक शब्द

Discovery Science, Prophets of Science Fiction, Prophets of Science Fiction, Ridley Scott,
Mary Shelly, Villa Diodati, Frankenstein: or, The Modern Prometheus, Percy Bysshe Shelley, Lord Byron,
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परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

One Response to विज्ञान कहानियों के पैगम्बर, कल की भविष्यदृष्टा – मेरी शैली

  1. ओह यह तो मैं मिस कर रहा था ..मेरी शेली आप जानते ही हैं उन्मुक्त जी, एक अप्रतिम मेधा की रचनाकार थीं …और फ्रैन्केंन्स्तीन टीनेजर मेरी की रचना थी जिसमें उन्होंने गोथिक भयावहता को विज्ञान का सम्पुट दिया था -उन्हें वोल्टा
    और लुइ गैलवानी के प्रयोगों की जानकारी हो गयी थी …वोल्टा ने विद्युतीय विचलन का प्रयोग कर दिखाया था और लुइ गैलवानी ने यह दिखाया था कि कैसे मरे मेढक की टांग भी धातु संस्पर्श से रिफ्लेक्स प्रतिक्रिया करती है ..अब शव गृह के शल्य क्रिया पश्चात मृत शरीर अवयवों में बिजली के संस्पर्श से एक बदशक्ल भयावह दानव के जीवित हो उठने की परिकल्पना और बाद में नायक के सुहागरात तक उसका पीछा इस ‘घोस्ट; द्वारा किये जाने के पीछे खुद मेरी के असमान्य यौन अनुभवों की दास्ताँ को मिलाजुला कर एक कालजयी विज्ञान फंतासी रची गयी …आपका साईंस फिक्शन प्रेम बहुत प्रिय सा लगे है मुझे :)

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