‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी गयी थी

कुछ समय पहले मैंने  ‘नाई की दाढ़ी को कौन बनाता हैनामक चिट्ठी लिखी। इसमें संस्कृत का एक श्लोक भी लिखा था। मैं जानना चाहता था कि वह कहां से है। कई चिट्ठाकार बन्धुवों ने मदद की। इस पर अरविन्द जी ने   ‘मेरे ही बुकशेल्फ में छुपा था उन्मुक्त जी के प्रश्न का जवाब!‘ नामक चिट्ठी लिखी। इस पर   हिमान्शू मोहन जी, ने टिप्पणी की,

‘… एक बात और यहाँ साथ ही कहता चलूँ – जो मैंने उन्मुक्त की पोस्ट पर भी कही थी – कि बिना पूरी तरह जाने किसी विषय को, उस के बारे में अच्छी या बुरी धारणा बना लेना – पूर्वाग्रह है। सतर्क और जिज्ञासु – ज्ञान-पिपासु को इससे बचना चाहिए।’

राशियां – चित्र  विकिपीडिया के सौजन्यसे

मैंने भी वहीं टिप्प्णी कर कहा था कि मैं जल्द ही अपनी बात रखूंगा। यह रहा मेरे जवाब का पहला भाग।

मेरी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ (पहली एवं अन्तिम चिट्ठी) के बारे में कुछ गलतफहमी है। इसके कारण मेरी अक्सर टांग खिंचायी और निन्दा होती है। उस चिट्ठी पर, अक्सर ऐसी टिप्पणियां आती हैं जो शालीनता के परे होती हैं। अक्सर लोग पूरी श्रृंखला नहीं पढ़ते हैं।

यह श्रृंखला लिखते समय, कड़ियों में लिखने का कारण स्पष्ट था पर संकलित कर रखते समय शायद यह स्पष्ट न रह सका कि मैंने वह श्रृंखला क्यों लिखी। मैं अपनी बात बात ज्योतिष प्रेमियों को समझाना चाहता हूं।

यह सच है कि मैं या मेरा परिवार ज्योतिष, या हस्तरेखा या अंकविद्या में विश्वास नहीं करता हूं। हम पूजा पाठ में भी विश्वास नहीं करते। मैंने अपनी मां का  एक किस्सा ‘करो वही, जिस पर विश्वास हो‘ लिखा था। आपातकाल के समय, मेरे पिता जेल में थे। एक शुभचिन्तक ने, मेरी मां से कहा कि वे शिवपूजा करें तो मेरे पिता छूट सकेंगे। इसके लिये मां ने यह कह कर मना कर दिया। उन्हें इसमें विश्वास नहीं है।

हम सब भाई बहन की शादी के समय न तो जन्मकुंडली मिलवायी गयी न ही ज्योतिष के हिसाब से तिथि का ध्यान रखा गया। गृह निर्माण या प्रवेश में भी ज्योतिष का ध्यान नहीं रखा गया। हम सब अपने जीवन में खुश हैं।

कुछ समय पहले, मैंने दिल्ली के उपनगर में मकान बनवाया। उस बिल्डर ने नक्शा बनवाते समय पूछा कि क्या मकान वास्तु के हिसाब नहीं बनेगा। मैंने जवाब था,

‘मकान, वास्तु के हिसाब से नहीं बनेगा।’

उसका कहना था,

‘आप फिर से सोच लें। आजकल बिना वास्तु के कोई मकान नहीं बनवाता। आप पहले व्यक्ति मिले जो कह रहे हैं कि वास्तु के हिसाब से नहीं बनवायेंगे।’

मैंने कहा आप मकान का नक्शा सूरज की रोशनी और हवा की आने जाने की सुविधा से बनवाइये, न कि वास्तु के हिसाब से।

मेरे विचार में ‘ज्योतिष कूड़े का भार है‘। मैं कार्ल सेगन का प्रशंसक हूं। मेरे विचार उनके विचारों जैसे ही हैं। आप खुद इस विडियो में सुनिये।

उन्मुक्त चिट्ठे पर लिखी श्रृंखला को संपादित कर, लेख चिट्ठे पर लिखी चिट्ठी ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके‘, मेरी सबसे ज्यादा पढ़ी चिट्ठी है। इस श्रृंखला की चिट्ठियां, अन्तरजाल में कई जगह पूरी या इसके कुछ अंश – संदर्भ देते हुऐ या फिर बिना संदर्भ देते हुऐ – प्रकाशित हैं। यह मेरे ‘लेख’ चिट्ठे पर ही लगभग ५०,००० बार पढ़ी गयी है। यह सबसे विवादास्पद भी है।

इस पर तरह तरह की टिप्पणियां आती हैं। कुछ इसे सही मानते हैं, कुछ गलत। अधिकतर लोग मुझसे अपना भविष्य पूछते हैं। भविष्य पूछने वाली चिट्ठियों में से मैंने एक को प्रकाशित कर वहीं उसका जवाब लिख दिया पर उसके बाद में की टिप्पणियों को प्रकाशित नहीं करता हूं। टिप्पणी करने वालों को यह टिप्पणी और उसका जवाब पढ़ना चाहिये।

मेरी बातों को गलत कहने वालों में कुछ अपनी बात शालीनता से कहते हैं लेकिन अधिकतर लोग शालीनता के परे जवाब देते हैं। जो टिप्पणियां शालीनता के परे होती हैं, मैं उन्हें प्रकाशित नहीं करता – जबरदस्ती का विवाद होगा। लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि जो इस चिट्ठी को गलत बताते हैं – चाहे वह शालीनता से, चाहे शालीनता के परे – वे इसमें लिखे तर्क को नहीं काट पाते हैं। वे क्या कहते हैं यह तो आप वहीं जा कर देख सकते हैं। कुछ उदाहरण देखिये,

  • you are like a frog who jump around the well and like a pigeon who feel that if he close his eyes the cat back away. तुम उस मेढ़क की तरह हो जो कि कुऐं में कूदता रहता है और उस कबूतर की तरह जो कि सोचता है कि वह अपनी आंख बन्द कर लेगा तो बिल्ली चल जायगी;
  • APKA CHITHHA PAD KAR MUJE TO ESA LAGA JAISE KI AAPNE KISI BOOK MEI SE YAAD KARKE VAISE KA VAISA APNE CHHITHE MEI LIKH DIYA. आपका चिट्ठा पढ़ कर मुझे लगा जैसे कि आपने किसी बुक में से याद करके वैसा का वैसा अपने चिट्ठे में लिख दिया है;
  • sorry you are completely wrong … I think you didn’t meet from real astrologer if you meet, then you know that what is astrology … अफसोस तुम एकदम गलत हो  तुम आज तक किसी सही ज्योतिषाचार्य से नहीं मिले, यदि तुम मिलोगे तब तुम्हारी समझ में आयेगा कि ज्योतिष क्या चीज़ है ;
  • mere mitra bhi mere sath hai kah rahe hai aap jaise logo ne hi bhrat ki lutiaa duboi hai.. to kripya aapse koi sambad na karu… मेरे मित्र भी मेरे साथ कह रहें हैं आप जैसे लोग ही भारत की लुटिया डुबोऐ हैं तो कृप्या आपसे कोई संबन्ध न करूं ;
  • bhagwan ki banai koi shastra galat nahi ho sakti phir jyotish to shastron ki janani hai jarurat hai भगवान की बनाई कोई शास्त्र गलत नहीं हो सकती फिर ज्योतिष तो शास्त्रों की जननी है जरूरत है;
  • अगर ज्योतिष को व्यर्थ सिद्ध करना है तो भी, पहले कुछ ज्योतिष अध्ययन आवश्यक है।

मैंने ज्योतिष, हस्तरेखा, और अंकविद्या के बारे में पढ़ा, अध्यन किया फिर लेख लिखा। यह कहना सही नहीं है कि मैंने बिना पढ़े ही वह श्रृंखला लिखी। यदि किसी को इस विषय का बेहतर ज्ञान हो, वह ही इन बातों को तर्क से समाप्त करे, इस बारे में लिखे।

क्या इस तरह की टिप्पणियां लेख गलत साबित होता है। क्या इनसे पता चलता कि ज्योतिष अन्धविश्वास नहीं है। मुझे यह टिप्पणियां दुखी करती हैं। इसीलिये मैंने आप सही हैं … मैं बदलाव कर रहा हूं नामक चिट्ठी लिखी।

 

यदि यह आस्था की बात है तब मुझे कुछ नहीं कहना क्योंकि आस्था को तर्क या ज्ञान से नहीं परखा जा सकता। वह इनके परे है।

मैं आज तक किसी भी हिन्दी चिट्ठकार से नहीं मिला। मैं उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में नहीं जानता। लेकिन मुझे वास्तविक में लोगों से मिलने उन्हें जानने का अवसर मिला है। अधिकतर लोग, कुछ न कुछ ज्योतिष, हस्तरेखा, अंक विद्या, या  पूजा पाठ पर विश्वास करते मिले। मुझे ऐसे लोगों से कोई शिकवा या आपत्ति नहीं है। इनमें से बहुत, न केवल मेरे अच्छे मित्र हैं पर मुझसे कहीं गुणी और विद्वान भी हैं। वे और हम, एक दूसरे का आदर करते हैं।

मैंने ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला (पहली एवं अन्तिम चिट्ठी) ज्योतिष पर विश्वास करने वालों का मजाक बनाने के लिये या किसी की आस्था या विश्वास पर चोट पहुंचाने के लिये नहीं लिखी थी।

‘उन्मुक्त जी, यदि यह श्रंखला किसी का मजाक बनाने के लिये नहीं थी तब आपने यह क्यों लिखी।’

यह सच है कि मैं यह तर्क द्वारा बताना चाह रहा था कि क्यों ज्योतिष, हस्तरेखा या अंकविद्या सही नहीं है पर इस श्रृंखला को लिखने का कारण कुछ और ही था। यह  अगली बार इसी चिट्ठे पर।

उन्मुक्त की पुस्तकों के बारे में यहां पढ़ें।

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सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:

Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)

यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,

बकबक पर पॉडकास्ट कैसे सुने

उन्मुक्त चिट्ठे पर लिखी श्रृंखला ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ को यदि आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे लिखी लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

भूमिका।। तारे और ग्रही।। प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र।। यूरोप में खगोल शास्त्र।।  हेर संगीत नाटक।। पृथ्वी की गतियां।। राशियां।। विषुव अयन: हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ।। ज्योतिष या अन्धविश्वास।। राशिफल का मेष राशि से शुरु और ज्योतिष का अपने तर्क पर गलत होना।। अंक विद्या, डैमियन – शैतान का बच्चा।। अंक लिखने का इतिहास।। हस्तरेखा विद्या और निष्कर्ष।।

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परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

4 Responses to ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला किसी को दुख देने के लिये नहीं लिखी गयी थी

  1. parul says:

    भैया एक बात बताइए, लोग किसी बात को ग़लत साबित करने के लिए क्यो परेशान होते है?

    सबके पास अपने अपने कारण होते हैं। कोई जरूरी नहीं के वे एक ही हों। हांलाकि मैंने वह श्रंखला क्यों लिखी उसका कारण तो अगली बार – उन्मुक्त

  2. पिगबैक: मैंने ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ श्रृंखला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क

  3. bhai sahab aap bakbash jyada karte hai or bisaye ki charcha or uska oolekh kum karte hai so please bisye par aaye or aage ki baat batai aap ki sari bate adhuri rehti hai is par kaam kare dhanybaad kirpya phone pe sampark kare 09993417559, 08109256252

    • उन्मुक्त says:

      कृपया यह लेख देखें।

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