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Archive for July, 2009

इंटरनेट (अन्तरजाल) का प्रयोग – मौलिक अधिकार है

Posted by उन्मुक्त on July 2, 2009

अन्तरजाल पर कॉपीराइट का उल्लंघन रोकना मुश्किल है। इसको रोकने के लिये नये नये तरीके ढूंढे जा रहे नये नये कानून भी बन रहे हैं। नये कानूनों की वैधता को भी न्यायालयों में चुनौती दी जा रही है। तकनीक के विकास के साथ, कानून का भी विकास हो रहा है। internet_dog

(Cartoon by Peter Steiner. The New Yorker, July 5, 1993
issue [Vol.69 no. 20] page 61 – taken from here.)

फ्रांस ने कुछ दिन पहले, अन्तरजाल पर कॉपीराइट का उल्लंघन रोकने के लिये थ्री स्ट्राईक कानून (three strike law) बनाया। मोटे तौर से, थ्री स्ट्राईक कानून उन कानूनों को कहा जाता है जो तीन बार या उससे अधिक बार कानून तोड़ने वालों के लिये कड़ी सजा का प्रावधान करते हैं। इन तरह के कानून को अभ्यस्त अपराधी कानून (Habbitual Offender Laws) भी कहा जाता है।

फ्रांस के कानून के अन्दर निम्न सजा देने का प्रावधान था:

  • पहली बार कॉपीराइट का उल्लंघन करने पर चेतावनी;
  • दूसरी बार उल्लंघन करने पर अन्तरजाल की सुविधा से निलंबन; और
  • तीसरी बार उल्लंघन करने पर अन्तरजाल की सुविधा से एक साल का प्रतिबंध,

इस कानून के अन्दर,

  • इस काम को अन्ज़ाम देने की ज़िम्मेदारी, हादोपी (La Haute Autorité pour la diffusion des œuvres et la protection des droits sur Internet, or HADOPI) नामक सरकारी संस्था को सौंपी गयी थी; और
  • आरोपी को सिद्ध करना था कि उसने उल्लंघन नहीं किया है।

कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल (Constitutional council) फ्रांस की सबसे ऊंची संस्था है जो सरकारी काम की वैधता देखती है। इसके सामने, थ्री स्ट्राईक कानून की वैधता को चुनौती दी गयी। इसके मुताबिक ,

यह चित्र कॉन्स्टित्यूसन काउंसिल की वेबसाइट से है।

  1. मानव एवं नागरिक अधिकार घोषणा १७८९ (Declaration on the Rights of Man and of the Citizen 1789) (घोषणा) का अनुच्छेद ११ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of communication and expression) देता है। अन्तरजाल का व्यापक विकास हुआ है और लोकतांत्रिक जीवन में भाग लेने के लिए एवं विचारों और राय की व्यक्त करने के लिये, इसका अपना महत्व है। इसलिये अन्तरजाल का प्रयोग, घोषणा के अन्दर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
  2. घोषणा का अनुच्छेद ९, आपराधिक मामलों व्यक्ति के बेगुनाही का सिद्धान्त (principle of presumption of innocence) स्थापित करता है। यह किसी को कसूरवार नहीं मानता। लेकिन थ्री स्ट्राईक कानून, आरोपित व्यक्ति कसूरवार मानता है और उसे ही अपने को बेगुनाह साबित करने की बात करता है।
  3. इन दो महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकारों को देखते हुऐ, इस तरह की शक्ति सरकारी संस्था हादोपी को नहीं दी जा सकती। इस तरह की शक्ति केवल न्यायालय को ही दी जा सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस फैसले को देते समय, कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल ने कहा कि अन्तरजाल का प्रयोग, घोषणा के अन्दर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। अथार्त यह मौलिक अधिकार है।

क्या अपने देश के न्यायालय भी इसी तरह का फैसला देगें? क्या अपने देश में भी,अन्तरजाल का प्रयोग, अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकारों के अन्दर है? देखिये, यदि यह सवाल अपने देश में उठता है तो न्यायलय का परला किस तरफ भारी होता है।

अंतरजाल की मायानगरी में

टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।।  वेब क्या होता है।। वेब २.०।। सॅमेंटिक वेब क्या है और विकिपीडिया का महत्व।। इंटरनेट (अन्तरजाल) का प्रयोग – मौलिक अधिकार है।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना – यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी – क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी – कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। गोलमाल है भाई गोलमाल।। गाना, विडियो अपलोड करने वालों – सावधान।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा।। कज़ा केस।। ग्रॉकस्टर केस।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।।

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