मुझे लिनेक्स से क्यों प्यार है
जनवरी 9, 2009 4s टिप्पणियाँ

इसमें शक नहीं कि चित्र हजार शब्दों से बेहतर किसी बात को कह सकता है। यह चित्र इसका प्रमाण है।
(यह चित्र मेरा नहीं है। मैंने इसे यहां से लिया है।
Hi, I work on Linux and blog in Hind. I often write about open source. I am using your picture for non-profit purpose to express your point in Hindi. If you have any objection then I will remove it).
मैंने जिस चिट्ठी से यह चित्र लिया है उस पर टिप्पणी भी की है। मेरी टिप्पणी के पहले यहां १८४ टिप्पणी थीं। मेरे विचार में यह अंग्रेज़ी चिट्ठाजगत की परिपक्कवता को दर्शाता है।
मेरी इस तरह की चिट्ठियों पर अक्सर एक भी टिप्पणी नहीं होती है। उन्हें चिट्ठाचर्चा पर भी जगह नहीं मिलती। चिट्ठा चर्चा करने वाले धन्यवाद के पात्र हैं। वे अपने विचार के अलावा दूसरे के बारे में भी लिख रहे हैं पर यदि हिन्दी जगत में विविधता देखना चाहते हैं, इसे परिपक्कव करना चाहते हैं तो चिट्ठाचर्चा का स्वरूप बदलना चाहिये।
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।
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आपके सुझावों के कारण मैंने भी प्रायोगिक रूप से लिनक्स का प्रयोग शुरू कर दिया है. अभी तो हम इसमें बस ओपिन आफिस और गिम्प का प्रयोग कर रहे हैं.
ओपिन आफिस हम विन्डोज बेस्ड पीसी में भी करते हैं लेकिन लिनक्स में यह विन्डोज की अपेक्षा अधिक तेजी से चलता है.
“…यदि हिन्दी जगत में विविधता देखना चाहते हैं, इसे परिपक्कव करना चाहते हैं तो चिट्ठाचर्चा का स्वरूप बदलना चाहिये।…”
आपका कहना वाजिब है. बिलकुल वाजिब. पर, मुझे लगता है कि ऐसे चर्चाकारों की भी दरकार है. आप भी बहुत पढ़ते हैं, बहुत लिखते हैं. और सभी काम की. चिट्ठाचर्चा में आप एक सहयोगी के रूप में जुड़ें तो हम सभी को खुशी होगी, और चिट्ठाचर्चा परिपक्वता की ओर एक कदम और आगे बढ़ाएगा…
रवी जी, आपकी बात ठीक है। मैंने इस बारे में सोचा भी – पर हर की कुछ न कुछ विवश्ता होती है और हर का अलग अलग महत्व भी होता है। मैं चाहूं तो भी नारद, या फिर ब्लॉगवाणी या चिट्टाजगत जैसा काम नहीं कर सकता। उनके चलाने वालों का महत्व एकदम अलग है। मैं इस समय चिट्ठकारी ही करूं या नहीं – यही मुश्किल सी बात लगती है। यह भी करूं कि नहीं अपने में एक सवाल है। मेरा भला चाहने वालों का यही कहना है कि मुझे यह छोड़ देना चाहिये। उनके मुताबिक, मेरी जरूरत कहीं और है और मेरा समय किसी अन्य काम के लिये होना चाहिये। शायद इसे इस लिये नहीं छोड़ पाता कि मुझे भी हिन्दी से बेहद प्यार है और मैं हिन्दी चिट्ठाजगत में वह सब भी देखना चाहता हूं जिससे मुझे लगाव है। यही कारण है कि मैं विवादों से दूर रहता हूं पर जब लगता है कि हिन्दी चिट्ठजगत रास्ता भटक रहा है तो ही कुछ लिखने का प्रयास करता हूं – उन्मुक्त।
bahut acchi jaankaari…….hamne bhi Linux main kaam kiya hua hai…..
पिछले पन्द्रह दिनों से उबुन्टू लिनक्स इस्तेमाल कर रहा हूँ इससे पहले इससे वाकिफ भी नही था अंकुर गुप्ता के हिन्दी ब्लॉग से पहली बार उबुन्टू लिनक्स के बारे में पता चला , उबुन्टू की फ्री सी.डी भी अनुरोध के पांचवे दिन ही घर बैठे मिल गई | जब से लिनक्स इस्तेमाल करना शुरू किया बहुत ही सुखी हूँ विण्डो में अक्सर वायरस आने दुखी ही रहता था पिछले एक साल में ६ बार विण्डो वायरस से करप्ट हो जाने के कारण दुबारा इंस्टाल करनी पड़ी ! अब उबुन्टू इस्तेमाल करने के बाद विण्डो चलने का मन ही नही करता | कोरल ड्रा व फ्लैश आदि के लिनक्स में चलने वाले कुछ सोफ्टवेयर मिलने के बाद तो विण्डो को घर से निकल दूंगा |
लिनक्स को बढ़ावा देने के लिए आभार !