कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के तीन महारथी हैं: स्टीव जॉबस् (Steve Jobs), बिल गेटस् (Bill Gates), और लिनुस टोरवाल्डस् (Linus Torvalds)। विकिकोट से इन लोगों के उद्धरण लेकर, यहां पोस्ट किया गया है। इसमें से कुछ उद्धरण मेरी इस चिट्ठी में है। वहीं पर, इन तीनो लोगों के चित्र वकिमीडिया कॉमनस् से लेकर एक साथ पोस्ट किये गये हैं जहां से मैंने इसे, अपनी इस चिट्ठी के लिये लिया है।
स्टीव जॉबस् (Steve Jobs)
१९९१:
What a computer is to me is the most remarkable tool that we have ever come up with. It’s the equivalent of a bicycle for our minds.
मनुष्यों के द्वारा बनाये गये उपकरणों में, कंप्यूटर सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। यह हमारे दिमाग की साईकिल की तरह है।
१९९७ में ऐप्पल उत्पादों के बारे में:
The products suck! There’s no sex in them anymore!
यह उत्पाद बेकार हैं, इनमें सेक्स नहीं है।
बिल गेटस् (Bill Gates)
१९८०:
There’s nobody getting rich writing software that I know of.
मैं किसी को नहीं जानता जो सॉफ्टवेयर बना कर अमीर बन रहे हैं।
१९९१:
If people had understood how patents would be granted when most of today’s ideas were invented, and had taken out patents, the industry would be at a complete standstill today.
जब आज के विचार जन्म ले रहे थे तब यदि लोगों को समझ में आता कि पेटेंट कैसे मिलते हैं तो वे जरूर पेटेंट ले लेते और कंप्यूटर जगत की प्रगति एकदम रुक जाती।
अमेरिका में रहने वाले मेरे मित्र, अपने बच्चों को डाक्टर बनाना चाहते हैं। कारण – वे कभी नौकरी से हाथ नहीं धोते और पैसा भी अच्छा कमाते हैं।
ऑरनल्ड किम का चित्र जे पॉल ने खींचा है और न्यू यॉर्क टाइमस् से है
ऑर्नल्ड किम डाक्टर हैं और उनके पिता भी पेशे से डाक्टर हैं। ऑर्नल्ड मैकरुमरस् डाट कॉम नामक चिट्ठा चलाते हैं। वे इसमें, ऐप्पल कम्पनी के बारे में अफ़वाहें, खबरें, और तथ्य लिखते हैं। इस महीने उन्होंने डाक्टरी छोड़ दी है। अब, वे चिट्टाकारी ही करेंगे।
‘अरे, वे पैसा कैसे कमायेंगे?’
और कैसे, चिट्ठाकारी कर के। उनकी वेब-साइट में हर महीने ४-४.५ करोड़ लोग आते हैं (मेरी वेबसाउट में तो ४ हजार भी नहीं आते)। ऑर्नल्ड का कहना है,
‘अंतरजाल में लोगों के आने का अर्थ है शक्ति और शक्ति बदलती है पैसों में।’
आज सुबह अन्तरजाल में विचरण करते समय मुझे यह भजन सुनने को मिला – दिल को छू गया, कई बार सुना।
आप भगवान पर विश्वास करते हों या नहीं। आप हिन्दू हों या मुसलमान, ईसाई हों या फिर किसी और धर्म के अनुयायी – यह भजन आपको पसन्द आयेगा।
यह भजन दिल के उन तारों को छूता है जो शायद कोई और नहीं।
इस भजन को सुनते समय मुझे पुरानी चिट्ठियों की याद आयी – याद आयी अनुगूंज १८ की।
संजय जी ने, अनुगूंज १८ ‘मेरे जीवन में धर्म का महत्व‘ नाम से आयोजित की थी। मैंने इसके लिये एक चिट्ठी इसी नाम से पोस्ट की थी। दो साल पहले रचना जी के द्वारा टैग किये जाने पर पांच सवालों का जवाब ‘एक अनमोल तोहफ़ा‘ चिट्ठी में दिया था। उस समय, अपनी लिखी चिट्ठियों में मुझे अनुगूंज १८ के लिये लिखी गयी यही चिट्ठी सबसे अच्छी लगी थी। अपनी लिखी चिट्ठियों में, मुझे यह चिट्ठी, आज भी सबसे अच्छी लगती है। शक नहीं, यह चिट्ठी मेरी लिखी चिट्ठियों में हमेशा सबसे अच्छी चिट्ठी रहेगी, क्योंकि यह मेरे दिल के सबसे पास है।
इस भजन का संगीत हमराज़ फिल्म के इस गाने की धुन पर है – इसे भी सुनिये।
यह भी कर्णप्रिय है
मैं इस चिट्ठी से एक बात और भी कहना चाहता हूं। चिट्ठे पर लिखिये वही – जो आपके दिल को छूता हो, जो आपके दिल के सबसे पास हो। क्योंकि वह आपकी सबसे अच्छी अभिव्यक्ति है।
मैंने अपने उन्मुक्त चिट्ठे में ‘ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके’ नामक श्रंखला लिखी है। इसकी चिट्ठी ‘राशियां Signs of Zodiac‘ में राशियों (signs of zodiac) के बारे में बताया था,
‘यदि पृथ्वी, सूरज के केन्द्र और पृथ्वी की परिक्रमा के तल को चारो तरफ ब्रम्हाण्ड में फैलायें, तो यह ब्रम्हाण्ड में एक तरह की पेटी सी बना लेगा। इस पेटी को हम १२ बराबर भागों में बांटें तो हम देखेंगे कि इन १२ भागों में कोई न कोई तारा समूह आता है। हमारी पृथ्वी और ग्रह, सूरज के चारों तरफ घूमते हैं। या इसको इस तरह से कहें कि सूरज और सारे ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष इन १२ तारा समूहों से गुजरते हैं। यह किसी अन्य तारा समूह के साथ नहीं होता है इसलिये यह १२ महत्वपूर्ण हो गये हैं। इस तारा समूह को हमारे पूर्वजों ने कोई न कोई आकृति दे दी और इन्हे राशियां कहा जाने लगा।’
राशि के चिन्ह - विकिपीडिया के सौजन्य से और उसी की शर्तों में
‘साल के शुरु होते समय (जनवरी माह में) सूरज दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है और वहां से उत्तरी गोलार्द्ध जाता है। साल के समाप्त होने (दिसम्बर माह) तक सूरज उत्तरी गोलार्द्ध से होकर पुनः दक्षिणी गोलार्द्ध पहुचं जाता है। इस तरह से सूरज साल में दो बार भू-मध्य रेखा के ऊपर से गुजरता है। इस समय को विषुव (equinox) कहते हैं। यह इसलिये कि, तब दिन और रात बराबर होते हैं। यह सिद्धानतः है पर वास्तविकता में नहीं … आजकल यह समय लगभग 20 मार्च तथा 23 सितम्बर को आता है। जब यह मार्च में आता है तो हम (उत्तरी गोलार्द्ध में रहने वाले) इसे महा/बसंत विषुव (Vernal/Spring Equinox) कहते हैं तथा जब सितम्बर में आता है तो इसे जल/शरद विषुव (fall/ Autumnal Equinox) कहते हैं। यह उत्तरी गोलार्द्ध में इन ऋतुओं के आने की सूचना देता है।’
विषुव भी खिसक रहा है। इसे विषुव अयन (precession of equinoxes) कहते हैं। इसका कारण कुछ इस प्रकार है,
‘पृथ्वी अपनी धुरी पर २४ घन्टे में एक बार घूमती है। इस कारण दिन और रात होते हैं। पृथ्वी की धुरी भी घूम रही है और यह धुरी २५,७०० साल में एक बार घूमती है। यदि आप किसी लट्टू को नाचते हुये उस समय देखें जब वह धीमा हो रहा हो, तो आप देख सकते हैं कि वह अपनी धुरी पर भी घूम रहा है और उसकी धुरी भी नाच रही है। विषुव का समय धुरी के घूमने के कारण बदल रहा है। इसी लिये pole star भी बदल रहा है। आजकल ध्रुव तारा पृथ्वी की धुरी पर है और दूसरे तारों की तरह नहीं घूमता। इसी लिये pole star कहलाता है। समय के साथ यह बदल जायगा और तब कोई और तारा pole star बन जायगा।’
सारी सभ्यताओं में जब ज्योतिष शुरू हुई उस समय सूर्य मेक्ष राशि में रहता है। इसीलिये राशिफल मेष राशि से शुरू होता हैं। इसी श्रंखला की चिट्ठी ‘ज्योतिष या अन्धविश्वास‘ में मैंने यह भी बताया था कि विषुव अयन के कारण क्यों ज्योतिष अपने तर्क पर गलत है।
‘ज्योतिष/ खगोलशास्त्र के शुरु होने के समय, विषुव अप्रैल के माह में आता था, इसीलिये राशि चक्र मेष से शुरु होता है। अब यह मार्च के महीने में आ गया है यानी कि मीन राशि में आ गया है। यदि ज्योतिष का ही तर्क लगायें तो जो गुण ज्योतिषों ने मेष राशि में पैदा होने वाले लोगों को दिये थे वह अब मीन राशि में पैदा होने वाले व्यक्ति को दिये जाने चाहिये। यानी कि, हम सबका राशि फल एक राशि पहले का हो जाना चाहिये पर ज्योतिषाचार्य तो अभी भी वही गुण उसी राशि वालों को दे रहे हैं।’
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