छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

गुलाबी महिलाओं का गैंग

गुलाबी रंग तो प्रेम और रोमांस का रंग समझा जाता है। मैं भी इसे इसी तरह से लेता हूं पर बांदा की गुलाबी महिलाओं का रोमांस तो कुछ और ही है।

‘बांदा…? क्या इस नाम की कोई जगह है?’

उत्तर प्रदेश का शायद इसका सबसे पिछड़ा भाग बुन्देलखंड है। बांदा इसी का एक जिला है। यहां का मुख्य पेशा फौजदारी है। कुछ समय पहले वहां कुख्यात डाकू ददुवा का रहा करता था। बिना उससे आशिर्वाद लिये, वहां से, न तो कोई एम.एल.ए. बन सकता था, न ही एम.पी.। वह मारा गया है। अब यह ठोकिया का इलाका है। देखिये अगले चुनाव में क्या होता है।

बांदा की गुलाबी महिलायें – सरकार के भ्रष्ट, घूसखोर अफसरों और उजड्ड पुरुषों – के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। वे न तो गैर सरकारी संस्था पर विश्वास करती हैं, न ही अफसरशाही पर। उनके अनुसार या अफसरशाही घूस में व्यस्त है और गैर सरकारी संस्था पैसे कमाने में। वे अपनी लड़ाई स्वयं लड़ रही हैं और महिलाओं को न केवल सम्मान दिलवा रही हैं पर सबका सम्मान भी पा रही हैं।

मैंने कुछ दिन पहले आज की दुर्गा नाम से कई कड़ियों में एक श्रंखला अपने उन्मुक्त चिट्ठे पर लिखी थी, जिसकी पहली कड़ी यहां और अन्तिम यहां है। इसके बाद उसे सम्पादित कर ‘आज की दुर्गा नाम – महिला सशक्तिकरण‘ से अपने लेख चिट्ठे में रखी है। वास्तव में, महिला सशक्तिकरण तो बांदा कि यह गुलाबी महिलायें ही हैं।

‘यह सब तो ठीक है पर आप उन्हें गुलाबी महिलायें क्यों कह रह हैं?’

क्योंकि वे गुलाबी रंग की धोतियां पहनती हैं :-)

women-in-pink.jpg

(और अधिक जानकारी के लिये बीबीसी यह रिपोर्ट पढ़ें यह चित्र वहीं से है और उनके सौजन्य से है)

January 13, 2008 - Posted by उन्मुक्त | कानून, सूचना | , , | 4 Comments

4 Comments »

  1. उन्मुक्त जी, गुलाबी महिलायें उन उजड्ड पुरुषों (जिन में हम भी शामिल हैं) के मुहं पर तमचा है, जो अन्याय चुप चाप सहते हैं। आप ने लेख अच्छा लिखा है, इन महिलाओं को मेरा प्रणाम।

    Comment by Raj Bhatia | January 13, 2008

  2. बांदा की गुलाबी महिलायें – सरकार के भ्रष्ट, घूसखोर अफसरों और उजड्ड पुरुषों – के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और अधिकारों के लिए लड़ रही है, सराहनीय बात है। लोकतंत्र मे हर किसी को अपनी आवाज़ बुलंद करने का अधिकार दिया है, बांदा की गुलाबी महिलायें का समाजहित मे उठाया गया कदम की जितनी सराहना की जावे कम है | अच्छे समाचार और जानकारी देने के लिए धन्यवाद।

    Comment by mahendra mishra | January 13, 2008

  3. aur taareef ki baat ye hai ki itni himmati mahilaayen..aaj bhi ghuughant me baithii hain…pranaam hai inhey..aapki post mun bhaayi aabhaar

    Comment by parulk | January 13, 2008

  4. इस पोस्ट से ये साबित होता है कि महिलायें किसी से कम नही है पर पुरुष उसे हमेशा ही कम समझता है।

    Comment by mamta | January 13, 2008


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