‘विकिपीडिया की रिहाई? अरे उन्मुक्त जी विकिपीडिया तो पहले से ही मुक्त है अब इसकी रिहाई करने की क्या जरूरत है? लगता है कि आप कुछ कन्फ्यूज़िया रहें हैं’

लगता है कि पांडे जी कह रहें हैं कन्फ्यूज़िया शब्द तो वही प्रयोग कर सकते हैं :-) अरे भाई, यह मैं थोड़ी कह रहा हूं, यह तो जिमी वेल्स, विकिपीडिया के जनक, कह रहें हैं।

‘जिमी वेल्स कह रहें हैं? अरे, वे ऐसा क्यों कह रहे हैं?’

पहले, इसी से संबन्धित कुछ बातें।

कुछ महीने पहले श्रीष जी का ईमेल आया था। वे विकिपीडिया की सामग्री को सर्वज्ञ की वेबसाइट पर डालने की बात कर रहे थे। मैंने उन्हें जवाब दिया कि ,

‘लाईसेन्स का झमेला कुछ मुश्किल है। अक्सर लाईसेन्स की शर्तों में विरोधाभास होता है। विकिपीडिया का लाइसेन्स आपको कॉपी और संशोधन करने की अनुमति देता है पर यह भी कहता है कि संशोधित सामग्री विकिपीडिया के ही लाईसेन्स में प्रकाशित की जायगी। इस विरोधाभास से बचने के लिये , यदि आप वीकिपीडिया से कुछ सामग्री लेते हैं तो वही लाईसेन्स प्रयोग करें जो विकिपीडिया में प्रयोग किया गया है।’

कुछ समय पहले शास्त्री जी का ईमेल मुन्ने की मां के पास यह पूछते हुऐ आया कि क्या ‘मुन्ने के बापू‘ चिट्ठे की सामग्री भी कॉपीलेफ्टेड हैं। उसका जवाब था।

‘मैं उन्मुक्त की पत्नी हूं। यह चिट्टा मेरा है। मैंने अपने चिट्ठे पर कॉपीलेफ्टेड नहीं लिखा है क्योंकि मैं नहीं समझती हूं कि कोई मेरी चिट्ठियों का भी प्रयोग करना चाहेगा। पर आपको और जो भी इसका प्रयोग करना चाहे उसे इसकी स्वतंत्रता है।’

उसके बाद उसे लगा कि उसे लिखना चाहिये कि उसके चिट्ठे की सामग्री प्रकाशित करने की क्या शर्तें हैं। उसने इस बारे में चिट्ठी प्रकाशित करते हुऐ लिखा,

‘मैंने इसे पहले क्रिऐटिव कॉमनस् ३.० की लाइसेंस के अन्दर कर दिया था। इनका कहना था कि विकीपीडिया ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस के अन्दर है और मैं अपने चिट्ठे की प्रकाशित सामग्री इसी के अन्दर करूं। यदि ऐसा नहीं होगा तो यदि कोई मेरे चिट्ठे की सामग्री को हिन्दी विकीपीडिया पर डालना चाहेगा तो भी यह नहीं कर पायेगा क्योंकि इन दोनो लाइसेंसों में विरोधाभास है। इन्होने विरोधाभास को समझाया भी, पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे यह इस पर लिखने की बात कर रहे थे। कब लिखेंगे…???
क्रिऐटिव कॉमनस् के लाइसेंस तो आसान भाषा में हैं - समझ में आते हैं। ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस - यह तो मेरे बिलकुल समझ में नहीं आया। मालुम नहीं वकील लोगों को इस तरह की कानूनी भाषा लिखने में क्या मजा आता है। मैंने इनसे अपनी बात बतायी तो इन्होने मेरी बातों को आसान भाषा में लिख दिया है। यह इस प्रकार है।”आपको इस इस चिट्ठे में प्रकाशित सामग्री को - चिट्ठे का आभार प्रकट करते हुऐ अथवा उस चिट्ठी से लिंक देते हुऐ - इसी प्रकार अथवा संशोधन कर बांटने, या अपने चिट्ठे अथवा विकीपीडिया पर डालने की अनुमति है।”

मुन्ने की मां के चिट्ठे की सारी सामग्री इन्हीं शर्तों के अन्दर है। उसने ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस की शर्तें न समझने की जो बात कही है वह सही है। बहुत से लोग इसे नहीं समझ पाते हैं। सच यह है कि ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस सॉफ्टवेयर के लिये लिखा गया था न कि किसी अन्य कॉपीराईटेड सामग्री - जैसे लेख या चित्र के लिये। विकिपीडिया के लिये, इसका चयन करने का निर्णय सही नहीं था।

विकिपीडिया के जनक जिमी वेल्स भी ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस की मुश्किल को समझते हैं पर जब उन्होने विकिपीडिया का निर्माण किया तब क्रिएटिव लाइसेन्स नहीं था। उस समय उन्हें, ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस के अलवा, कुछ सूझा नहीं - इसीलिये इसके अन्दर प्रकाशित कर दिया।

जिमी वेल्स ने यह घोषणा ३०, नवम्बर २००७ को, आईकॉमनस् (icommons) की दावत में की।

विकिपीडिया, विकिमीडिया का एक कार्य है। विकिमीडिया इस तरह के कई कार्य करती है। इसके सारे कार्य - विकिन्यूस् को छोड़ कर - ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस की शर्तें के अन्दर हैं। केवल, विकिन्यूस् ही क्रिऐटिव कॉमनस् के लाइसेंस २.५ के अन्दर हैं। इस दावत पर जिमी वेल्स ने कहा कि,

‘What I’m happy to announce tonight is that just yesterday the Wikimedia Foundation board voted to approve a deal beetween the FSF and CC and Wikimedia. We’re going to change the GFDL in such a way that Wikipedia will be able to become licensed under the Creative Commons Attribution-ShareAlike license.
So this is not as some people speculated on facebook my 58 birthday party … this is the party to celebrate the liberation of Wikipedia.’
मुझे यह बताते हुऐ बहुत खुशी हो रही है कि हम … विकिमीडिया में प्रकाशित सामग्री का ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस को इस प्रकार से बदल देंगे कि इसकी सामग्री क्रिऐटिव कॉमनस् के लाइसेंस के अन्दर भी प्रकाशित की जा सके।
यह वह नहीं है जिसे कुछ लोगों ने मेरी ५८वीं जन्मदिन दावत पर सोचा था … यह दावत है विकिपीडिया के रिहाई।


इस बारे में आधिकारिक प्रस्ताव यहां देखें।

लॉरेन्स लेसिंगस् (Lawrence Lessig) सटैनफोर्ड विश्विद्यालय में कानून के प्रोफेसर हैं। वे मुक्त दर्शन बहुत बड़े समर्थक हैं। इस विषय पर उनका बहुत नाम है। इस घोषणा पर वे कहते हैं कि,

‘So there are 3 great things that happened to my life. Two of them coming from my wife, this is the 3rd greatest thing that ever happened to my life, Jimmy. I’m grateful to your visit, thank you very much, you are just welcomed, thank you.’
मेरे जीवन में तीन बड़ी घटनायें हुई हैं। इसमें से दो के मेरी पत्नी से मुझे मिली हैं [उनके दो पुत्र हैं।] और यह तीसरी है, जिमी तुम्हें धन्यवाद। मुझे बहुत प्रसन्नता है कि तुम इस दावत में आये।

लेसिंगस् और जिमी का यह चित्र विकिपडिया से है और ग्नू मुक्त प्रलेखन लाइसेंस की शर्तों के अन्दर प्रकाशित है।

यह कार्य कब तक हो पायेगा, शायद बहुत ज्लद ही - १५ दिसम्बर को क्रिऐटिव कॉमनस् की ५वीं जन्मदिन दावत है। इंतजार कीजिये इस दिन का।

मैं जानता हूं इस पर सागर जी या फिर संजय जी की टिप्पणी आयेगी कि कृपया इसे हिन्दी में बतायें। इसलिये जितना हो सका पहले ही मैं कर दिया, बाकी वे ही टिप्पणी कर लिखें।

विकिपीडिया के बारे में मेरे अन्य लेख

  1. हिन्दी विकिपीडिया-१
  2. हिन्दी विकिपीडिया-२
  3. हिन्दी विकिपीडिया-३
  4. हिन्दी विकिपीडिया और कॉपीलेफ्टिंग – फायदा चिट्ठाकारों का
  5. विकिपीडिया के बढ़ते कदम
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  1. संजय बेंगाणी

    मुक्तस्रोत और विकि पर आपके लेखो ने जिज्ञासाएं जगायी हैं। कुछ बाते मेल की जा रही हैं।

    मेल अभी तक मिली नहीं - उन्मुक्त

  2. Shastri JC Philip

    नू लाईसेंस वाकई में समझने में आसान है. अत: उन्मुक्त जी ने जो किया है वह सबसे अच्छा है — साफ कह दिया कि जिसे उनके लेख के साथ जो कुछ करना है वह करे. उनका यह सोचना भी बहुत महान बात है कि विचार आगे बढने चाहिये.
    जो उतने उदार नहीं हो पाते उनके लिये क्रियेटव कामन्स अच्छा रहेगा.
    हां यदि उन्मुक्त जी भाभी जी को अभी तक ब्रेनवाशन नहीं कर पाये तो क्या इसका मतलब है कि भाभी जी से मैदान हार गये !!!

    – शास्त्री
    पुनश्च: हिन्दीजगत में कापीराईट के मामले में उनुम्क्त जी मेरे हीरो हैं !!!

    सम्मान के लिये धन्यवाद। पत्नियों से हार में ही जीत है :-) - उन्मुक्त

  3. सागर चन्द नाहर

    बिल्कुल पहुँच गये सर, :)
    आज तो सब समझ में आ गया, बहुत बहुत धन्यवाद ।

  4. Gyan Dutt Pandey

    यह तो विषय ही मेरे लिये नया है। कभी इन मुद्दों को ध्यान में रख कर लिखा नहीं। पर लगता है इस विषय पर सोचना और राय बना लेनी चाहिये।
    मन में बीज डालने के लिये धन्यवाद।

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