आप कब डेस्कटॉप पर लिनेक्स डाल रहें हैं?

किम ब्रेबाक (Kim Brebach) अस्ट्रेलियन तकनीकी बाजार सलाहकार (Australian technology marketing consultant)  हैं। कुछ दिन पहले उन्होने १३ कारण बताये कि क्यों लिनेक्स (Linux) आपके बगल के डेस्कटॉप पर नहीं होगा। इसका मुख्य कारण वे यह देते हैं कि लिनेक्स न तो दुकानों में मिलता है न ही इसका विज्ञापन होता है।


कुछ दिन पहले उन्होने पुनः १३ कारण लिखें हैं कि क्यों लिनेक्स आपके डेस्कटॉप पर होना चाहिये। इसमें मुख्य कारण यह हैंः

  • पिछले साल विंडोज़ पर ४८,००० वायरस (virus) आये हैं जब कि लिनेक्स में केवल ४०;
  • यह मुफ्त है;
  • इसमें ड्यूल बूट (dual boot) करना बहुत आसान है;
  • यह सारे सॉफ्टवेरों को एक साथ अपने आप अपडेट करता है जब कि विंडोज़ केवल विंडोज़ को और बाकी सॉफ्टवेरों अलग अलग अपडेट करना पड़ता है;
  • लिनेक्स को उतने ही संसाधन चाहिये जितने की विंडोज़ एक्स पी (Windos XP)को पर विंडोज़ विस्टा (Windows vista) तो लालची है। उसके लिये तो संसाधनों की कोई सीमा नहीं।

विस्टा लालची है और इसके लिये बहुत सारे संसाधन चाहिये बात की पुष्टि तो मुन्ने की मां भी करती है। उसे पढ़ाने की जगह से नया लैपटॉप मिला है। उसके संसाधन मेरे लैपटॉप से बेहतर हैं। मेरे में लिनेक्स है उसके में विंडोज़ विस्टा। जिस दिन से आया है कूड़े की तरह कोने में पड़ा है। उसने छुआ नहीं है। कहती है कि प्रोग्राम चला कर झपकी लेनी पड़ती है तब जा कर कहीं प्रोग्राम लोड होता है। न केवल वह पर उसके सारे सहयोगी परेशान है कि क्या किया जाये। वे कंपनी से बात कर रहें हैं कि उन्हे लिनेक्स दे दिया जाय या फिर विंडोज़ एक्स पी।

अब आप कब शिफ्ट कर रहे हैं मुक्त सॉफ्टवेर पर – चन्द्र शेखर नायर जी, अरे वही जय जवान जय किसान वाले ने तो शिफ्ट कर लिया है।

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के बारे में उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

11 Responses to आप कब डेस्कटॉप पर लिनेक्स डाल रहें हैं?

  1. आइये आप लोग भी मुफ्त सोफ्टवेर पर।

  2. kakesh says:

    हम तो अभी द्वि-बूटी सिस्टम का प्रयोग करते हैं. आप कौन सा लिनक्स प्रयोग करते हैं।

    काकेश जी, मेरे लैपटॉप में रेडहैट एंटरप्राइस-५ है। डेस्टॉप में बदलता रहता है। फिलहाल इस समय फिडोरा-७ है – उन्मुक्त

  3. रवि says:

    न केवल वह पर उसके सारे सहयोगी परेशान है कि क्या किया जाये। वे कंपनी से बात कर रहें हैं कि उन्हे लिनेक्स दे दिया जाय या फिर विंडोज़ एक्स पी।

    मेरे लॅपटॉप में भी विस्टा प्रीलोडेड आया था. उसमें मेरे बहुत से हार्डवेयर जैसे कि स्कैनर इत्यादि तथा सॉफ़्टवेयर – बहुत से हिन्दी के नहीं चले. तो उसे मिटाकर मैंने एक्सपी व लिनक्स सबायो डाल लिया है. विस्टा सुरक्षा के लिहाज से भले ही उत्तम हो, परंतु इस्तेमाल के लिहाज से एकदम कूड़ा ही है – खासकर तब तक जब तक कि उसका एक दो सर्विस पैक नहीं आ जाता.

    रवी जी, मुश्किल इस बात की थी कि कम्पनी (एच. पी.) वाले मना कर रहे थे कि वे कानून विंडोज़ एक्स पी नहीं डाल सकते हैं क्योंकि माईक्रोसॉफ्ट डाउनग्रेड करने की अनुमति नहीं देता है। यह बात पहले सही थी। मैं न तो पैसा और खर्चा करना चाह रहा था न ही गैरकानूनी करना चाह रहा था। कुछ दिन पहले मैंने अंतरजाल पर पढ़ा कि माईक्रोसॉफ्ट वालों ने यह अनुमति विस्टा की दुर्गति देखते हुऐ दे दी है। मैंने जब उन्हे बताया तो वे मान तो गये हैं पर कुछ टाल मटोल कर रहे हैं। कुछ करना पड़ेगा कि आराम से यह हो जाय। - उन्मुक्त

  4. Anunad Singh says:

    जिस तरह सब लोग मिलकर लिनक्स के कोड और उसकी कार्यक्षमता को आगे बढ़ाते रहते हैं, उसी प्रकार सबको इसका प्रचार भी करना पड़ेगा। प्रचार के महत्व को नजरांदाज करना अशुभ होगा।

    आपको साधुवाद जो इस दिशा में लगातार हम सबको जगाये रहते हैं।

  5. सिरिल गुप्त says:

    माइक्रोसोफ्ट सिर्फ कम्प्युटर वेन्डर्स ही को कोई आपरेटिंग सिस्टम डालने से रोक सकता है. किसी एन्ड-यूज़र को बाध्य नहीं किया जा सकता, बशर्ते वो एक्सपी की लीगल कापी इस्तेमाल करे.

    उसने कम्प्युटर विक्रेताओं को विस्ता डालने पर मजबूर किया, लेकिन जब वह नहीं चली तो अब एक्सपी के लिये डाउनग्रेड करने कि सुविधा दे दी है. मैं पिछले कुछ महीनों से विस्ता का उपयोग कर रहा हूं. लेकिन अब देशी भाषा में कहुं तो पक गया हूं.

    पहली फुर्सत मिलते ही वापस जाना है एक्सपी पर.

  6. आलोक says:

    डाल दिया।

  7. एक लीक पर एक्स पी पर चला जा रहा हूँ, दायें बायें होने की हिम्मत नहीं होती. :) आप की लगन देख कर डर भी लगता है कि कहीं किसी दिन बदल ही न दूँ. :)

  8. इसमें ड्यूल बूट (dual boot) करना बहुत आसान है

    उन्मुक्त जी कोई एक साल हो गया, जब भी आप लिनक्स की बात करते हैं, मैं सोचता हूँ कि बताऊँ कि मैंने लिनक्स को शुरु करते ही बन्द क्यों किया।

    अब मैं लिनक्स दोबारा शुरु करना चाहता हूँ लेकिन सबसे बड़ी समस्या ऊपर ड्यूल बूट वाली ही है। मैं अतीत में भुगत चुका हूँ। एक बार ड्यूल बूट सिस्टम बिगड़ जाए तो उसे सुधारना बहुत मुश्किल हो जाता है।

    मेरे पीसी में तीन OS थे, Windows ME, Windows XP, Redhat Linux, एक दो बार मास्टर बूट रिकॉर्ड गड़बड़ा गया तो बूट लोडर करप्ट हो गया। उसे दोबारा सही करने में मुझे पसीना आ गया। विण्डोज के दोनों विकल्प तो आ गए, पर लिनक्स नहीं आया फिर। बस वहीं से लिनक्स छूट गया मुझसे।

    क्या इसका कोई हल है कि कभी बूट लोडर करप्ट हो जाने पर क्या किया जाए?

    श्रीष जी, मैं तकनीक से जुड़ा नहीं हूं इसलिये आप की समस्या का निदान अपने गुरू से पूछ कर बताऊंगा पर आप ट्रिप्ल बूट की बात कर रहें हैं। यह अपने में मुश्किल है। मैं एक बार सोलरिस, विंडोज़, और लिनेक्स तीनो एक साथ करना चाह रहा था पर यह न हो सका। ड्यूल बूट केवल विंडोज़ (इसका आप जो भी संस्करण ले लें) और लिनेक्स का करें। मैं इस तरह का ड्यूल बूट पिछले नौ साल से चला रहा हूं आज तक कभी कोई मुश्किल नहीं आयी। आप ऐसे ही करें। आप लिनेक्स की हिन्दी में काम कर विंडोज़ पर हिन्दी में काम करना पसन्द नहीं करेंगे। एक बात का ख्याल रखिये कि डाटा की फाइलें विंडोज़ पार्टीशन में रखें। लिनेक्स से विंडोज़ पार्टिशन की फाइलों पर काम करना आसान है पर विंडोज़ से लिनेक्स पर नहीं। डिफॉल्ट में कुछ दिन के लिये लिनेक्स कर लें। कुछ दिन बाद आप विंडोज़ को भूल जायेंगे। – उन्मुक्त

  9. लिनक्स में सबसे बड़ी समस्या — इसके विविध अवतार हैं। भले ही कर्नल समान हो, लेकिन इनमें आपस में कोई तालमेल या मानकीकरण नहीं होने के कारण अपनी खिचड़ी अलग पकाकर विविधता और विसंगतियाँ ही हैं। लिनक्स के विभिन्न फ्लेवर्स (रेडहैट, बॉस, उबंटु, स्लैकवेयर, पीसीक्वेस्ट, .. इत्यादि) के बीच एकरूपता तथा मानकीकरण के लिए एक संगठन बनाना तथा उन मानकों को कठोरता से लागू करना आवश्यक है।

  10. मैं एक मामूलि किसान कई महीने से ग्नू-लिनक्स की इस्तेमाल कर रहा हूँ। मुझे कोई कटिनाई नहिं मेहसूस हो रहा हैं। क्यों कि स्वतंत्र मलयाळं कंप्यूटिंग नाम के एक ग्रूप कई ऐटी प्रॊफषणल शामिल हैं। अगर मुझे कभी कोइ मदद का जरूरत पडने पर तुरंत ही किसी न किसी से हल हो जाता जाता हैं। अंग्रेजी में आप लोग भी उन से मेल मिलाप रख सकते हो। वह ग्रूप यह हैं

  11. पिंगबैक: आज का दिन महत्वपूर्ण है « छुट-पुट

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