छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

बचपन की प्रिय पुस्तकें

कुछ समय पहले मैंने जूले वर्न के बारे में चिट्ठी पोस्ट की थी। इस चिट्ठी में उनकी कई और पुस्तकों का जिक्र किया था। यह सारी पुस्तकें तथा अंग्रेजी साहित्य एवं अन्य भाषाओं में लिखे प्रसिद्ध उपन्यास, मैंने अपने बचपन में पढ़े थे। इसमें अधिकतर हिन्दी में ही थे।

जुले वर्न की पुस्तक अस्सी दिन में दुनिया की सैर वाली चिट्ठी पोस्ट करते समय मैंने इन पुस्तकों फिर से ढ़ूढ़ना शुरु किया। मुझे यह फिर से मिली और मैंने इनका पूरा सेट फिर से खरीद लिया। यह पुस्तके हैं,

  • 20,000 Leagues Under the Sea समुद्री दुनिया की रोमांचकारी यात्राएं
  • Aesop’s Fables ईसप की कहानियां
  • Alice in Wonderland जादूनगरी
  • Anderson’s Fairy Tales बर्फ की रानी
  • Around the World in 80 Days अस्सी दिन में दुनिया की सैर
  • Black Beauty काला घोड़ा
  • Black Tulip काला फूल
  • Call of the Wild जंगल की कहानी
  • Coral Island मूंगे का द्वीप



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  • Count of Monte Christo कैदी की करामात
  • David Copperfield डेविड कापरफील्ड

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  • Don Quiote तीसमार खां
  • Grimm’s Fairy Tales परियों की कहानियां

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  • Gulliver’s Travels गुलिवर की यात्राएं
  • Ivanhoe वीर सिपाही
  • Kidnapped चांदी का बटन
  • Moby Dick मोबी डिक
  • Pinnochio कठपुतला

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  • Robinhood राबिनहुड
  • Robinson Crusoe राबिन्सन क्रूसो
  • Stories from Arabian Nights जादू का दीपक
  • Swiss Family Robinson अद्भुत द्वीप
  • Talisman चमत्कारी ताबीज
  • The Seven Voyages of Sindbad सिंदबाद की सात यात्राएं

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  • Three Musketeers तीन तिलंगे
  • Tom Sawyer बहादुर टाम
  • Treasure Island खजाने की खोज में

यह पुस्तकें, किशोरों के लिये, सरल हिन्दी में, शिक्षा भारती, मदरसा रोड कश्मीरी गेट, दिल्ली-६ ने प्रकाशित की हैं। यह पुस्तकें बहुत सस्ती हैं – २५ रूपये में एक है। यदि आप सब साथ खरीदें तो कुछ छूट भी हैं। यदि आपके मुन्ने या मुन्नी (८ से १३ साल तक के हों) तो उनके लिये अवश्य खरीदिये।

मुझे तो इन पुस्तकों को फिर से पढ़ने में मजा आया। हो सकता है कि आप को भी आये।

October 2, 2007 - Posted by उन्मुक्त | पुस्तक समीक्षा, सूचना, हिन्दी | | 5 Comments

5 Comments »

  1. आभार इस जानकारी के लिये. बच्चों के जन्मदिन में उपहार भी दी जा सकती हैं. इस बार की यात्रा में कुछ बच्चों को देने के लिये अच्छा मार्ग सुझाया. वरना सोच ही रहा था कि उन्हें क्या दिया जाये.

    Comment by समीर लाल | October 2, 2007

  2. क्यों नही आएगा आप कहे और मजा न आए ऐसा भी क्या होता है

    Comment by दीपक श्रीवास्तव | October 3, 2007

  3. अरे वाह !क्या ख़ूब याद दिलाई इन पुस्तकों की। शुक्रिया।

    Comment by mamta | October 3, 2007

  4. दिन लौटा दिए आपने।

    Comment by Annapurna | October 6, 2007

  5. आपकी पोस्ट देखकर बहुत अच्छा लगा। आपने बचपन के दिनों की याद दिला कर एक दिल में प्रसन्नता की लहर दौडा दी। बधाई।

    Comment by जाकिर अली "रजनीश" | December 29, 2007


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