Posted by उन्मुक्त on October 20, 2007
किम ब्रेबाक (Kim Brebach) अस्ट्रेलियन तकनीकी बाजार सलाहकार (Australian technology marketing consultant) हैं। कुछ दिन पहले उन्होने १३ कारण बताये कि क्यों लिनेक्स (Linux) आपके बगल के डेस्कटॉप पर नहीं होगा। इसका मुख्य कारण वे यह देते हैं कि लिनेक्स न तो दुकानों में मिलता है न ही इसका विज्ञापन होता है।
कुछ दिन पहले उन्होने पुनः १३ कारण लिखें हैं कि क्यों लिनेक्स आपके डेस्कटॉप पर होना चाहिये। इसमें मुख्य कारण यह हैंः
- पिछले साल विंडोज़ पर ४८,००० वायरस (virus) आये हैं जब कि लिनेक्स में केवल ४०;
- यह मुफ्त है;
- इसमें ड्यूल बूट (dual boot) करना बहुत आसान है;
- यह सारे सॉफ्टवेरों को एक साथ अपने आप अपडेट करता है जब कि विंडोज़ केवल विंडोज़ को और बाकी सॉफ्टवेरों अलग अलग अपडेट करना पड़ता है;
- लिनेक्स को उतने ही संसाधन चाहिये जितने की विंडोज़ एक्स पी (Windos XP)को पर विंडोज़ विस्टा (Windows vista) तो लालची है। उसके लिये तो संसाधनों की कोई सीमा नहीं।
विस्टा लालची है और इसके लिये बहुत सारे संसाधन चाहिये बात की पुष्टि तो मुन्ने की मां भी करती है। उसे पढ़ाने की जगह से नया लैपटॉप मिला है। उसके संसाधन मेरे लैपटॉप से बेहतर हैं। मेरे में लिनेक्स है उसके में विंडोज़ विस्टा। जिस दिन से आया है कूड़े की तरह कोने में पड़ा है। उसने छुआ नहीं है। कहती है कि प्रोग्राम चला कर झपकी लेनी पड़ती है तब जा कर कहीं प्रोग्राम लोड होता है। न केवल वह पर उसके सारे सहयोगी परेशान है कि क्या किया जाये। वे कंपनी से बात कर रहें हैं कि उन्हे लिनेक्स दे दिया जाय या फिर विंडोज़ एक्स पी।
अब आप कब शिफ्ट कर रहे हैं मुक्त सॉफ्टवेर पर – चन्द्र शेखर नायर जी, अरे वही जय जवान जय किसान वाले ने तो शिफ्ट कर लिया है।
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Posted by उन्मुक्त on October 16, 2007
कुछ समय पहले, मैंने ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है‘ चिट्ठी में बताया था कि माईक्रोसॉफ्ट ने अपने शेएर्ड लाइसेंसेस् को को ओपेन सोर्स इनिशिएटिव के समक्ष रख रहा है ताकि उस लाइसेंस के अन्दर प्रकाशित सॉफ्टवेर को ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर माना जा सके।
वीनस सुन्दरता की देवी है। इसीलिये, आकाश में, सूरज डूबने के बाद, जो सबसे सुन्दर दिखायी पड़ता है उसका नाम वीनस यानि कि बुद्ध ग्रह है। यहां पर सूरज पश्चिम से निकलता है। इसलिये दूसरी चिट्ठी ‘हम सुन्दरता की देवी पर पहुंच रहे हैं‘ नाम से लिखी थी।
यह सफर पूरा हुआ। ओपेन सोर्स इनिशिएटिव ने १२ अक्टूबर को इन लाइसेंसेस् को अपना अनुमोदन दे दिया। हांलाकि यह भारी बहुमत से हुआ पर सर्वसम्मत से नहीं।
क्या अब माईक्रोसॉफ्ट ओपेन सोर्स कंपनी हो जायगी?
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Posted by उन्मुक्त on October 2, 2007
कुछ समय पहले मैंने जूले वर्न के बारे में चिट्ठी पोस्ट की थी। इस चिट्ठी में उनकी कई और पुस्तकों का जिक्र किया था। यह सारी पुस्तकें तथा अंग्रेजी साहित्य एवं अन्य भाषाओं में लिखे प्रसिद्ध उपन्यास, मैंने अपने बचपन में पढ़े थे। इसमें अधिकतर हिन्दी में ही थे।
जुले वर्न की पुस्तक अस्सी दिन में दुनिया की सैर वाली चिट्ठी पोस्ट करते समय मैंने इन पुस्तकों फिर से ढ़ूढ़ना शुरु किया। मुझे यह फिर से मिली और मैंने इनका पूरा सेट फिर से खरीद लिया। यह पुस्तके हैं,
- 20,000 Leagues Under the Sea समुद्री दुनिया की रोमांचकारी यात्राएं
- Aesop’s Fables ईसप की कहानियां
- Alice in Wonderland जादूनगरी
- Anderson’s Fairy Tales बर्फ की रानी
- Around the World in 80 Days अस्सी दिन में दुनिया की सैर
- Black Beauty काला घोड़ा
- Black Tulip काला फूल
- Call of the Wild जंगल की कहानी
- Coral Island मूंगे का द्वीप

- Count of Monte Christo कैदी की करामात
- David Copperfield डेविड कापरफील्ड

- Don Quiote तीसमार खां
- Grimm’s Fairy Tales परियों की कहानियां

- Gulliver’s Travels गुलिवर की यात्राएं
- Ivanhoe वीर सिपाही
- Kidnapped चांदी का बटन
- Moby Dick मोबी डिक
- Pinnochio कठपुतला

- Robinhood राबिनहुड
- Robinson Crusoe राबिन्सन क्रूसो
- Stories from Arabian Nights जादू का दीपक
- Swiss Family Robinson अद्भुत द्वीप
- Talisman चमत्कारी ताबीज
- The Seven Voyages of Sindbad सिंदबाद की सात यात्राएं

- Three Musketeers तीन तिलंगे
- Tom Sawyer बहादुर टाम
- Treasure Island खजाने की खोज में
यह पुस्तकें, किशोरों के लिये, सरल हिन्दी में, शिक्षा भारती, मदरसा रोड कश्मीरी गेट, दिल्ली-६ ने प्रकाशित की हैं। यह पुस्तकें बहुत सस्ती हैं – २५ रूपये में एक है। यदि आप सब साथ खरीदें तो कुछ छूट भी हैं। यदि आपके मुन्ने या मुन्नी (८ से १३ साल तक के हों) तो उनके लिये अवश्य खरीदिये।
मुझे तो इन पुस्तकों को फिर से पढ़ने में मजा आया। हो सकता है कि आप को भी आये।
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