ओपेन सोर्स बिना पैसे के है हांलाकि सर्विस के लिये पैसा देना पड़ता है पर यह मालिकाना सॉफ्टवेर से कम है। इसको बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे स्कूल में अनिवार्य कर दिया जाय। आजकल सारे स्कूलों में मालिकाना सॉफ्टवेर चलता है। जिससे बच्चे उसी पर सीखते हैं और उन्हें आगे चल ओपेन सोर्स में काम करने में मुश्किल होती है।
रूस की सरकार ने फैसला लिया है कि २००८ तक, स्कूलों में, रूस में बना ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर ही प्रयोग किया जायगा। दुनिया के अन्य देश - जापान, मैकोडोनिया, लिबिया, नाइजीरिया, ब्राजील और अर्जंटीना - के स्कूलों में भी ओपेन सोर्स का महत्व बढ़ रहा है।
अपने देश में, इस तरफ सबसे पहला कदम केरल सरकार ने लिया है जहां २००८ में, ८वीं, ९वीं, और १०वीं के बोर्ड परीक्षा में ओपेन सोर्स के प्रोग्राम पर ही परीक्षा देनी होगी। इसके अतिरिक्त एक डिज़िटल चित्र प्रतियोगिता भी आयोजित की जायगी जिस पर ओपेन सोर्स के प्रोग्राम से ही चित्र बनाये जा सकते हैं।
दूसरा अच्छा तरीका तो बौद्धिक संपदा अधिकारों का कड़ाई से पालन करना है क्योंकि न केवल अपने देश में पर विदेश में अधिकतर लोग मालिकाना सॉफ्टवेर का प्रयोग गैर कानूनी तरीके से करते हैं। गोवा में मेरी मुलाकात जर्मन इंजीनियर से हुई थी उसके मुताबिक जर्मनी में यह लगभग ५०% है। मुझे बातने की जरूरत नहीं कि अपने देश में यह कितना है शायद शत…
यदि सब राज्य सरकार तथा केन्द्रीय सरकार स्कूलों में ओपेन सोर्स का प्रोग्राम अनिवार्य कर दे तो शायद दूसरे तरीके की जरूरत ही न पड़ेः सूचना प्रद्योकिकी से जुड़े लोग, अपने आप ही ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर में ही काम करना पसन्द करें।
यह कितनी आसान बात है, पैसे की बचत है पर फिर भी क्यों नहीं हो पा रहा है … सोचने का विषय है।
September 19, 2007 at 9:10 am
ज्यादातर स्कूलो में कमप्युटर शिक्षा ठेके पर चलती है, जहाँ पायरेटेड सॉफ्टवेर प्रयोग में आते है.
नीतिनिर्माताओं को ज्ञान ही कितना है. कोई कह दे अमरीका में यह हो रहा है तो अनुसरण जरूर कर लेंगे.
September 19, 2007 at 10:19 am
सोचने का विषय तो है ही.लेकिन ओपन सोर्स अभी भी आम आदमी के लिये टेढ़ी खीर ही है.
September 19, 2007 at 11:53 am
कम से कम भारत जैसे देश के लिए, ओपेनसोर्स तो एक वरदान की तरह है। यदि १/१० जनता(कम्पयूटर प्रयोग करने वाली) भी ओपेनसोर्स प्रयोग करने लगे और उनके १/१० भी इसके विकास के लिए आगे आएं तो आने वाली पीढियां हम पर फक्र करेंगी।
लेकिन सरकारी नीतिया ही कुछ ऐसी है कि जनता की गाढी कमाई, फालतू के साफ़्टवेयर खरीदकर फिर उन्हे जंग लगाने को ही कम्प्यूटराइजेशन मानती है।
September 19, 2007 at 2:11 pm
भारत के लिये ओपेन स्रोत का महत्व भारत के बुद्धिजीवियों एवं सरकार को न समझ आना अत्यन्त दुर्भाग्य की बात है।
इस पर इतना संक्षिप्त और सारगर्भित लेख लिखने के लिये साधुवाद!
ओपेन स्रोत के साथ-साथ भारत में स्कूलों एवं कालेजों के कम्प्यूटर पाठ्यक्रमों मे “भारतीय भाषा कम्प्यूटिंग” को भी स्थान दिया जाना जरूरी है।
September 19, 2007 at 6:24 pm
दरअसल मात्र पैसे के लिहाज से नहीँ, वरन इसलिये भी कि मुक्त स्रोत में आप मन माफिक फेर बदल कर सकते हैं (शर्तें लागू) - खासकर कुछ सीखने के लिये, कुछ बेहतर अथवा मिन्न बनाने के लिये आदि। विकासकर्त्ता को पूरा स्रोत मिलने से सीखने को भी बहुत मिलता है।
दूसरा पहलू क़ीमत का भी है जो कम महत्वपूर्ण नहीं है।
शायद यह कारण हों इनके सरकारी महकमॉं और जन सामान्य में भी न बढ़ पाने के
- सम्बन्धित व्यावसायिक सेवा-सहायता प्रदाताओं की कमी (अब बढ़ रही है)
- मुक्त स्रोत सॉफ्ट वेयर में कई बार विशेषज्ञों के आवश्यकता पड़ना।
- इसको बढ़ाने के लिये, प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये सरकारी महकमों में इसका समर्थन करवाने (?) आदि का खर्च वहन करने की क्षमता - कोई एक कम्पनी तो पीछे होती नहीँ, सेवा-समर्थन कम्पनियाँ उतना बोझ उठा नहीँ पातीं
September 19, 2007 at 6:33 pm
ओपन सोर्स के बारे मे जानकारी बाकई अच्छी है
बहुत बढ़िया !
September 19, 2007 at 7:12 pm
Jo log open source ka proyog karte hain aur usme naye naye anupryog bhi kartey hain vo kisi anivaryta hone ki vajah se nahin varan apni khushi se karte hain. Svatah prerit ho kar. Vo is baat ka intjaar nahin karte ki sarkar use anivarya banaye. Aap khud ko hi dekh lo kya aap karte ho ya sakar ki ise anivarya banane ka intezaar kar rahe ho.
मेरे अज्ञात मित्र, शायद यह बात सरकार पर ही है किसी व्यक्ति या स्कूल पर नहीं।
स्कूल में क्या पढ़ाया जायगा इस बात पर निर्भर है कि कोर्स में क्या है। जब कोर्स में मालिकाना सॉफ्टवेर के प्रोग्राम होंगे, ओपेन सोर्स के प्रोग्राम कोर्स में नहीं होंगे तो क्यों कोई स्कूल उसे पढ़ायेगा। इसी लिये पहल सरकार को करना है। केरल सरकार ने सही दिशा में कदम उठाया है। बाकी सरकारों को भी यही करना चाहिये। - उन्मुक्त
September 21, 2007 at 9:46 pm
दो-तीन महीने पहले रूस के सरकारी स्कूल में माक्रोसोफ्ट वालों ने छापा मारकर प्रिंसीपल को अन्दर कर दिया बाद में जुर्माना. क्योंकि विंडो चोरी की थी लेकिन कम्प्यूटर विंडो सहित सरकार ने दिया था.