छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

  • Can Not See Hindi or Want to read this Blog/ Post in another Script

    If you can not see Hindi the set your view or character encoding to Unicode UTF-8.

    If you wish read the post in any other Indian or Roman script then please go here.
  • Fill up the post address;
  • Tick the script in which you wish to read; and
  • Click on the button 'Transliterate (I have read the disclaimer)'.
  • RSS बकबक पर नयी प्रविष्टियां

    • The file 'वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम' was added by unmukt
      वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम.ogg यह हिन्दी पॉडकास्ट अमेरिका के प्रसिद्ध वकील लाइबोविट्ज़ और उसकी जीवनी कोर्टरूम के बारे में है। यह ऑग फॉरमैट में है इन फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, VLC media player, या Firefox में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi is about famou […]
    • The file 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' was added by unmukt
      बुलबुल मारने पर दोष लगता है.ogg यह पॉडकास्ट इसी नाम से मेरी नयी श्रंखला की भूमिका है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, एवं VLC media player में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This podcast in Hindi is introduction of my new series. It is in ogg format. […]
    • The file 'यू हैव किल्ड गॉड, सर' was added by unmukt
      यू हैव किल्ड गॉड, सर.ogg इस पॉडकास्ट में, अमेरिका के लूज़िआना राज्य के साइंस एजूकेशन ऐक्ट, ब्रिटानी फिल्म क्रिएशन और इस श्रंखला के निष्कर्ष की चर्चा है। यह ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप, Audacity, Mplayer, एवं VLC media player में सुन सकते हैं। फाईल को डाउनलोड कर उक्त प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को डिफॉल्ट में कर लें। This post is about […]
  • बकबक पर पॉडकास्ट कैसे सुने

    बकबक पर अधिकतर ऑडियो क्लिपें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

    * Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;

    * Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और

    * Mac-OX पर कम से कम Audacity में,

    सुन सकते हैं। ऑडियो क्लिप पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्राम को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। मैंने इसे ogg फॉरमैट में क्यों रखा है यह आप मेरे उन्मुक्त चिट्ठे की पापा, क्या आप उलझन में हैं चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं। यदि इसे mp3 फॉरमैट में सुनना चाहें तो यहां चटका लगायें।
  • मेरे पॉडकास्ट बकबक की फीड

    मेरे पॉडकास्ट बकबक की RSS फीड यह और फीड बर्नर से फीड है यह है।
  • RSS लेख पर नयी प्रविष्टियां

  • RSS उन्मुक्त पर नयी प्रविष्टियां

  • RSS मुन्ने के बापू पर नयी प्रविष्टियां

  • Archive for August, 2007

    हिन्दी कैसे सिखायी जाय

    Posted by उन्मुक्त on August 28, 2007

    सलाह और सिखाने वाली कई वेबसाइट हैं। जो वेबसाइटें हिन्दी में जो यह काम करती हैं उनकी सूची यहां है। इनमें से कई हिन्दी भी सिखाती हैं पर हिन्दी सिखाने वाली यह वेबसाइट तो मुझे अनूठी लगती है।

    hindi-study-1.jpg

    हांलाकि मैं यह नहीं समझ पाया कि यह किस भाषा वालों को हिन्दी सिखा रही है।

    hindi-study-2.jpg

    मैंने इस पर टिप्पणी करने का प्रयत्न किया पर सफल नहीं रहा। इसे योगेश जी चलाते हैं।

    योगेश जी, यदि आप मेरे यह चिट्ठी पढ़ रहें हों तो कृपया कुछ ऐसा करें कि जिस भाषा के लोगों के लिये लिख रहें हैं उस भषा को हम हन्दी भाषी भी और अच्छा समझ सकें और सीख सकें तो अच्छा हो।

    Posted in hindi, हिन्दी | 5 Comments »

    चिट्ठाकार बन्धु – कमर कसिये, लिखिये, और पैसा कमाईये

    Posted by उन्मुक्त on August 18, 2007

    कमर कसने का समय आ गया है। कंपनियां पेशेवर चिट्ठाकारों की तलाश में हैं जो कि उनके उत्पाद पर लिख सकें। १८ अगस्त का इकोनॉमिक्स टाईमस् की खबर तो यही कह रही है। मालुम नहीं अंग्रेजी चिट्ठाकारों के लिये है या फिर हिन्दी चिट्ठाकारों के दिन भी फिरेंगे।

    जहां तक मुझे मालुम है कि निरमा पहली कंपनी थी जो प्रादेशिक पत्रिकाओं और अखबारों में विज्ञापन देने लगी। यह उसके बढ़ने में बहुत बड़ा कारण बना। यही बात चिट्ठाकारी के बारे में भी सच होनी चाहिये।

    मैं हमेशा स्वदेशी कंपनी की वस्तु खरीदता हूं। यदि स्वदेशी न हो और बहु-राष्ट्रीय कंपनी की हो तो कम से कम उसकी उत्पाद की फैक्टरी हिंदुस्तान में होनी चाहिये। आज से एक नियम और – उस उत्पाद को भी खरीदने की सोचूंगा, जिसके बारे में हिन्दी चिट्ठाजगत में लिखा जा रहा है और कंपनी उस लिखने वाले को पैसा दे रही है।

    ‘उन्मुक्त जी, फिर तो आप बेवकूफी करते हैं, घटिया माल लेते हैं। आपको यह नहीं करना चाहिये’

    हो सकता है आप सही हैं और मैं बेवकूफी में घटिया माल खरीद रहा हूं। इन सब का कुछ कारण है। मैं ऐसा क्यों करता हूं, क्या कारण है, क्यों मैं ओपेन सोर्स की बात करता हूं – यह सब मिले जुले सवाल हैं। ज्लद ही लिखूंगा।

    Posted in सूचना, हिन्दी | 14 Comments »

    चिट्ठे और पॉडकास्ट के लिये सहयोग

    Posted by उन्मुक्त on August 15, 2007

    मैंने कुछ दिनो पहले हिन्दी चिट्ठों की प्रविष्टियों का उन्मुक्त फीड एग्रेगेटर बनाया था। यह उन्मुक्त इसलिये है क्योंकि यहां सबका स्वागत हैं। यह बिना भेदभाव करे सारी चिट्ठियों की सूचना देता है। इसका नाम देवनागरी चिट्ठे रखा था क्योंकि यह केवल चिट्ठों की नयी प्रविष्टियों को बताता था। मैंने इसमें कुछ सुधार किया है। यह पॉडकास्ट की भी प्रविष्टियों को बताता है। इसलिये, इसका नाम बदल कर अब ‘चिट्ठे और पॉडकास्ट‘ कर दिया है। इसी के लिये कुछ सहयोग की आवश्यकता है।

    chitte.jpg

    खबराइये नहीं – कोई आर्थिक सहयोग नहीं चाहिये :-) इसमें न केवल कोई धेला खर्च हुआ है, न ही तकनीक के किसी ज्ञान की जरूरत है। मैं केवल यह सहयोग चाहता हूं कि जब आप हिन्दी (देवनागरी लिपि) में लिखे या हिन्दी में पॉडकास्ट करें तो कुछ देर बाद देख लें कि क्या यह आपकी प्रवष्टि बता रहा है कि नहीं। यदि नहीं बताता है तो उस प्रविष्टि के साथ मुझे ईमेल पर सूचना दे दें या यहीं पर टिप्पणी कर दें।

    मैंने यह क्यों बनाया, कैसे बनाया, यह सब कुछ आप मेरी चिट्ठी ‘अंतरजाल पर हिन्दी कैसे बढ़े‘ पर पढ़ सकते हैं।

    चलते, चलते, कुछ खास खबरेंः

    • फोर्बस् पत्रिका के अनुसार एस.सी.ओ. के मुकदमें में निर्णय के बाद लिनेक्स का प्रयोग बढेगा। नॉवल के शेयरों मे २०% बढ़ोत्तरी आयी है है और एस.सी.ओ. के शेयरों और गिर कर केवल ४३ सेन्ट के ही रह गये हैं। अब देरी किस बात की है आप क्यों नही लिनेक्स स्थापित करते। क्या कहा, समझ में नहीं आता कि कैसे करें। लिनेक्स स्थापित करने का आसान विडियों यहां देखिये।
    • जापान ने इस साल जुलाई में मुक्त  फॉरमैट स्वीकार कर लिया।  संयक्त राष्ट्र भी इसे स्वीकार करने की वकालत कर रहा है। मलेशिया सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है।

    मैं पहले ogg फॉरमैट पर पॉडकास्ट कर रहा था। मैंने फिर इसे mp3 पर करना शुरू किया। यह सब पढ़ने के बाद लग रहा है कि मैंने गलती की – मुझे ogg फॉरमैट पर पॉडकास्ट करना चाहिये न कि mp3 में। आगे से अब पुनः ogg फॉरमैट पर ही पॉडकास्ट करूंगा क्योंकि यह मुक्त है mp3 तो मालिकाना है। आईपॉड, आज नहीं तो कल, ogg फॉरमैट का समर्थन करेंगे।

    Posted in सूचना | 3 Comments »

    हम सुन्दरता की देवी पर पहुंच रहे हैं

    Posted by उन्मुक्त on August 10, 2007

    मैंने कुछ दिन पहले एक चिट्ठी ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है‘ नाम की लिखी थी। जिसमें माइक्रोसॉफ्ट के जनरल मैनेजर, बिल हिफ, के बयान का उल्लेख किया था कि माइक्रोसॉफ्ट अपने शेएर्ड लाइसेंसेस् को ओपेन सोर्स इनिशिएटिव के सामने रख रहा है ताकि उस लाइसेंस के अन्दर प्रकाशित सॉफ्टवेर को ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर माना जा सके।माइक्रोसॉफ्ट एक मालिकाना सॉफ्टवेर की कम्पनी है और उसके द्वारा यह कदम, सूरज के पश्चिम से उगने के समान है। इसीलिये उस चिट्ठी का शीर्षक ‘क्या सूरज पश्चिम से उगा है’ दिया था। आज अंतरजाल पर विचरण करते ग्लिन मूडी की यह चिट्ठी भी पढ़ने को मिली कि माइक्रोसॉफ्ट ओपेन सोर्स को क्यों अपना रहा है।

    ‘उंह हूं, सुन्दरता की देवी का इन सबसे क्या संबन्ध – यह तो हिटस् पाने का चक्कर लगता है।’

    शुक्र ग्रह

    मूडी ने पांच साल पहले ही कह दिया था कि माइक्रोसॉफ्ट के वेबसाइट पर Open Source at Microsoft नाम का पेज होगा जो कि इस समय है। इनके अनुसार माइक्रोसॉफ्ट कई कारणों से ओपेन सोर्स अपना रहा है।

    • माइक्रोसॉफ्ट को पहले लगता था कि यह मात्र एक फैशन है जो कि चला जायगा उसे यह लगने लागा है कि पर यह सच नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट के अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के मुताबिक Open source is neither an industry fad, nor a magic bullet;
    • माईक्रोसॉफ्ट तकनीक के नये तरीकों को अपनाना चाहता है क्योंकि उसके द्वारा पारम्परिक तरीकों से सॉफ्टवेर बनाने की अन्तिम तिथी कभी पूरी नहीं हो पा रही है;
    • ओपेन स्टैंडर्ड एक आंदोलन सा है जिसका फायदा माईक्रोसॉफ्ट लेना चाहता है।

    मूडी इसके अतिरिक्त कुछ और भी कारण बता रहें हैं आप उसे खुद पढ़ सकते हैं। वे सब बातों का यह निष्कर्ष निकालते हैं कि अन्त में माईक्रोसॉफ्ट पूरी तरह से ओपेन सोर्स को अपना लेगी। यानि कि सूरज पश्चिम से निकलने लगेगा।

    ‘इसका इस शीर्षक से क्या मतलब है। बस जिसे देखो वही किसी तरह से हिटस् के चक्कर में है।’

    वीनस सुन्दरता की देवी है। इसीलिये, आकाश में, सूरज डूबने के बाद, जो सबसे सुन्दर दिखायी पड़ता है उसका नाम वीनस है। इसको evening star और morning star भी कहा जाता है क्योंकि यह केवल शाम को या फिर सुबह ही दिखायी पड़ता है। यह तारा नहीं है पर हमारे सौर मंडल का सदस्य ग्रह है जिसे हिन्दी में शुक्र कहते हैं। यह सारे ग्रहों में अनोखा है। यह पश्चिम से पूरब नहीं घूमता जैसा कि हमारी पृथ्वी तथा अन्य ग्रह (यूरेनस ) को छोड़ कर घूमते हैं पर यह पूरब से पश्चिम घूमता है। इसलिये यहां सूरज पश्चिम से निकलता है।

    venus-clouds.jpg

    शुक्र ग्रह के वातावरण का अल्ट्रा वॉयलट से लिया गया एक चित्र

    मूडी की भविष्यवाणी – यह तो सूरज का पश्चिम से निकलना ही समझो। सूरज, पश्चिम से, वीनस -सुन्दरता की देवी – ग्रह पर ही निकलता है। इसलिये हम सुन्दरता की देवी पर पहुंच रहे हैं :-)

    planet-comparisons.jpg

    बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल का तुलनात्मक चित्र

    वीनस (शुक्र) को तो सुन्दरता की देवी कहा जाता है पर यदि कहीं नर्क है तो वह यहीं पर है। क्या आपको मालुम है कि यह ग्रह केवल शाम या सुबह को ही क्यों दिखायी पड़ता है? यह आधी रात को क्यों नहीं दिखायी पड़ता? क्या आपने इस बारे में कभी सोचा है? यह सब फिर कभी।

    यह सारे चित्र विकीपीडिया से लिये गये है और ग्नू मुक्त प्रलेखन अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर प्रकाशित किये गये हैं।

    Posted in विज्ञान | Leave a Comment »

    अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा – पाँच बातें

    Posted by उन्मुक्त on August 6, 2007

    Akshargram Anugunj
    ५ अगस्त की रात को बैठ कर अनुगूंज का लेख पूरा किया। सोचा था ६ की सुबह पोस्ट कर दूंगा क्योंकि दुनिया में अभी भी बहुत जगह ५ अगस्त ही है। अनुगूंज का समय बढ़ गया है पर लेख तो लिख गया है, पोस्ट कर देता हूं।

    1. अपनी सभ्यता और बोली का महत्व नहीं समझ आयेगाः अपनी बोली, भाषा और सभ्यता का महत्व बाहर जा कर ही समझ में आता है। हिंदुस्तान में तो घर की मुर्गी, साग बराबर। सारे बाहर के लोग हिंदुस्तान वापस आ जायेंगे, बाहर कोई जायगा नहीं, तब लोगों को – अपनी सम्यता, बोली, भाषा, और योग का महत्व – कैसे पता चलेगा। सब लोग कलाकारों और गायकों की तरह गिटपिट अंग्रेजी में ही बात करेंगे। हिन्दी की लुटिया डूब जायगी।
    2. समारोह का मजा न ले पायेंगेः हिंदुस्तान में यदि कोई समारोह ८ बजे से हो तो साड़े नौ के पहले पहुंचना बेवकूफी है। यदि ठीक समय से पहुंच जाओ तो वहां उल्लू ही मिलते हैं। जब हम किसी समारोह में अपने हिंदुस्तानी समय से पहुंचेगे तब तक तो वह समाप्त हो चुका होगा और वहां उल्लू बोल रहें होंगे।
    3. इमारतें बदसूरत लगेंगीः हिंदुस्तान में सड़कों, सरकारी और सार्वजनिक इमारतें पर लाल रंग के तरह, तरह पान की पीक के निशान हमेशा देखे जा सकते हैं। यह उनकी सुन्दरता पर चार चांद लगाते हैं। यह सब बन्द हो जायेंगे। वे बदसूरत दिखने लगेंगी।
    4. हम न रहेंगेः अमेरीका का क्षेत्रफल हमारे क्षेत्रफल से चार गुना ज्यादा है और अबादी चार गुनी कम। हमारा क्षेत्रफल तो बढ़ नहीं सकता – हिन्दुस्तान अमेरिका बना तो जनसंख्या को ही सोलह गुना कम होना पड़ेगा। इसमें तो ज्यादा उम्र वाले ही लोग गायब होंगे। हिन्दी चिट्टाकारों में तो मेरी ही उम्र सबसे ज्यादा लगती है – जीवन के तीन चौथाई बसन्त तो देख ही चुका हूं। मैं ही सबसे पहले भगवान के पास पहुंचूगा।
    5. हम नकली बन जायेंगेः हिंदुस्तान की जो भी कमी हो, हम जैसे भी रद्दी सद्दी हों बनावटी तो नहीं – हमारे दिल में गर्माहट है, बड़ों को कम से कम दूसरी जगह नहीं छोड़ते अपने साथ रखते हैं। मां को साल में एक बार कहेंगे Happy mother’s day Mom. सब केवल बाहरी दिखावटी मुस्कराहट में बदल जायगा।

    ना बाबा ना, हम ऐसे ही भले हैं :-)
    टैगः ,

    Posted in हिन्दी | 15 Comments »