छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

Archive for April, 2007

तूफानी-अंधेरी रात, बस स्टॉप और पहेलीबाज

Posted by उन्मुक्त on April 29, 2007

पहेली बूझना तो पहेलीबाज जी के जिम्मे था – मालुम नहीं कहां खो गये। क्या, किसी को, उनका पता मालुम है?

मुझे पहेलियों अच्छी लगती हैं, मैंने इस बारे में कुछ चिट्ठियां मार्टिन गार्डनर, मार्टिन गार्डनर की पुस्तकें, पहेली बाज ज़ज, और २ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान लिखी हैं। आज नितिन जी ने कुछ सवाल पूछ लिये इसी कारण मुझे भी सवाल/ पहेली पूछने का जोश आ गया। वैसे, कुछ महीने पहले, मैंने इसे दूसरे संदर्भ में इसे यहां पॉडकास्ट किया था।

एक तूफानी – अंधेरी रात है, आप स्पोर्टस् कार में जा रहे हैं। एक बस स्टॉप के सामने से जब गुजर रहे हैं तो बिजली कड़कती है। उसकी रोशनी में आप देखते हैं कि तीन लोग बस स्टॉप पर खड़े, बस का इन्तजार कर रहें हैं। इन तीनो कि अलग अलग मुश्किले हैं

  1. एक वृद्ध बीमार महिला है जो अस्पताल जाने के लिये बस का इन्तजार कर रही हे। यदि वह अस्पताल नहीं पहुंची तो मर सकती है;
  2. आपका एक खास मित्र जिसने न केवल आपके लिये कई उपकार किये हैं, न केवल आप उसके एहसानो से दबे हैं पर इसने आपको अपनी कार में बैठा कर कई बार सैर करवायी है। आज इसके पास कार नहीं है और उसे बस पकड़ कर शहर जाना है। उसका वहां साक्षात्कार होना है। यदि वह समय से न पहुचां तो उसे वह नौकरी न मिलगी और वह बेरोजगार रह जायगा;
  3. एक युवती/ यूवक जो कि आपकी/ आपका आर्दश जीवन साथी बन सकती/ सकता है। यदि उसे आज आपने छोड़ दिया तो वह फिर कभी आपको नहीं मिलेगी/ मिलेगा।

आपको मालुम है कि तूफान के कारण बस सर्विस रोक दी गयी है, कोई बस नहीं आयेगी। स्पोर्टस् कार में केवल दो ही लोग बैठ सकते हैं। आपके पास इतना समय नहीं है कि आप दो ट्रिप कर सकें, आप किसे लिफ्ट देंगे,

  • मानवता के नाते, वृद्ध बीमार महिला को – क्योंकि यदि वह अस्पताल न पहुंची तो मर जायगी। मित्र को तो दूसरा साक्षात्कार का मौका मिल सकता है; कोई जरूरी नहीं कि उसे नौकरी मिल ही जाये। आर्दश जीवन साथी तो फिर भी मिल सकता है; या
  • मित्रता के नाते, मित्र को – क्योंकि आप उसका ऐहसान से दबे हैं और उसे उतारना चाहते हैं। महिला तो वृद्ध है, उसे तो मरना ही है। जीवन में कोई आदर्श साथी नहीं होता है, यह तो बनाना पड़ता है; या
  • अपने लिये, आर्दश जीवन साथी को – क्योंकि वह फिर नहीं मिलेगी या मिलेगा। आप अपना जीवन सुखी देखना चाहते हैं। ; या
  • आप वहां नहीं रुकेंगे – क्योंकि यह मुश्किल सवाल है आप वहां पर रुक कर इस उलझन में नहीं पड़ना चाहते।

आप क्या करेंगे? ऊपर लिखे विकल्प में किस को चुनेगे? या फिर कुछ और करेंगे।

आप इसका जवाब बताइये और तब तक मैं लिखता हूं, हमने जानी है जमाने में रमती खुशबू की दूसरी कड़ी। इसकी पहली कड़ी तो यहां है। वह तो पढ़ी है न आपने।

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हिन्दी चिट्ठाकार बन्धु ध्यान दें

Posted by उन्मुक्त on April 19, 2007

क्या आप बता सकते हैं कि फायरफॉक्स सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर है कि नहीं।

‘अरे, उन्मुक्त भाई, यह क्या करते हो। शीर्षक है, हिन्दी चिट्ठाकार बन्धुवों के लिये और बात फायरफॉक्स की। यह तो गलत बात हुई न – माफी मांगो’

फायरफॉक्स इस समय तो सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर नहीं है पर आने वाले कल में यह सबसे लोकप्रिय होगा। वेब ब्रॉउसर के बारे में आंकड़े यहां देखिये। इससे यह पता चलता है कि इसका प्रयोग हर महीने बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर होगा।

फायरफॉक्स सबसे लोकप्रिय वेब ब्रॉउसर इसलिये नहीं होगा कि यह ओपेन सोर्स है, या सब ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है पर यह सबसे लोकप्रिय इसलिये होगा कि यह सबसे अच्छा वेब ब्रॉउसर है – तकनीक की दृष्टि उत्तम। यदि आपने कभी इसे चला कर न देखा हो तो इसे यहां से मुफ्त में डाउनलोड कर अपने कंप्यूटर में अपलोड कर प्रयोग कर देखें। यदि इसके इतिहास के बारे में कुछ पढ़ना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं।

‘यह तो हद्द हो गयी। कल ही तो भटिया जी ने हिट्स पाने के बीस तरीके बतायें हैं लगता है कि यह इक्कीसवां तरीका है।’

चलिये हम आज के शीर्षक पर बात करते हैं। मैं, लिनेक्स पर काम करता हूं और अंतरजाल पर फायरफॉक्स की सहायता से जाता हूं पर बहुत से हिन्दी चिट्ठाकार बन्धुवों की चिट्ठियां नहीं पढ़ पाता हूं। वे फैली फैली सी लगती हैं। मेरा सबसे अनुरोध है कि हिन्दी में चिट्ठियों के text को justify न करें पर उसे left align कर प्रकाशित करें। इससे आपकी चिट्ठी का text फैला फैला नहीं नजर आयेगा और फायरफॉक्स पर पढ़ने में सुविधा रहेगी। जहां तक मैं जानता हूं यदि आप text को justify करके प्रकाशित करेंगे तो वह IE में भी फैला, फैला दिखायी पड़ेगा पर यह मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता क्यों कि मैं IE का प्रयोग नहीं करता हूं।

हिन्दी के चिट्ठे, अलग अलग वेब ब्रॉउसर में अलग अलग तरह से दिखते हैं। आप, कभी कभी अपने चिट्ठे को फायरफॉक्स में भी देख लें। कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपका चिट्ठा फायरफॉक्स में कम सुन्दर दिखायी पड़ता हो और लोग उसे देखने में कम सुन्दर पायें। ऐसा तो नहीं होना चाहिये, बस इसीलिये आपको ध्यान देने की बात की थी।

फायरफॉक्स पर कभी, कभी हिन्दी की मात्रा ठीक से दिखायी नहीं पड़ती। इसके जवाब के लिये आप अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: हिन्दी और कंप्यूटर पर प्रश्न नम्बर ६ का जवाब देखें। यहां पर इस संबन्ध में अन्य अक्सर पूछे जाने वाले सवालों का जवाब भी है।

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ब्लॉग पॉर्टमेन्टो शब्द है

Posted by उन्मुक्त on April 10, 2007

पॉर्टमेन्टो (portmanteau): एक ऐसा चमड़े के सूटकेस, जिसके दो भाग हों। इसी कारण, दो शब्दों से मिल कर बने एक शब्द को पॉर्टमेन्टो कहा जाने लगा। इस तरह के शब्दों में दोनो शब्दों का अर्थ मिला रहता है। आजकल ऐसे शब्दों को blend भी कहते हैं। ऐसे शब्दों के लिये यह कोई जरूरी नहीं है कि पहले शब्द के पहले तथा दूसरे शब्द का अन्तिम भाग को लिया जाय पर दोनो का कुछ न कुछ भाग लिया जाना जरूरी है।

ल्यूस कैरल (Lewis Carroll) एक गणितज्ञ्य थे पर उन्होने शायद अंग्रेजी साहित्य की लोकप्रिय पुस्तकें Alice in wonderland और Looking through the glass लिखी। इसके बारे में मैंने यहां कुछ लिखा है। यह दोनो पुस्तकें गणित से सम्बन्धित नहीं हैं और साधारण लोगों के लिये ही हैं। यह दोनो पढ़ने योग्य हैं।

ल्यूस कैरल ने इन दोनो पुस्तकों में इस तरह के शब्दों का प्रयोग किया। यदि उन्हें, पॉर्टमेन्टो शब्दों का जनक न भी माना जाया तो यह सच है कि इस तरह के शब्दों को बढ़ावा उन्हीं ने दिया। उन्हीं के कारण इस तरह के शब्दों का प्रचलन शुरु हुआ। पॉर्टमेन्टो शब्द और ल्यूस कैरल के इस तरह के शब्दों के प्रयोग के बारे में आप यहां और यहां पढ़ सकते हैं।

अरुणा जी का दूसरा सवाल है कि

‘ब्लॉग, पॉडकास्ट, और विडियोकास्ट क्या होता है और इसमें क्या अन्तर है?’

ब्लॉग, पॉडकास्ट और विडियोकास्ट पॉर्टमेन्टो शब्द हैं और निम्न दो शब्दों से बने हैं।

  • blog = web + log
  • podcast = ipod + broadcast
  • videocast = video + broadcast

इनके बारे में, आप मेरे विचार बकबक पर यहां सुन सकते हैं। इनके बारे में आप यहां, यहां, और यहां पढ़ भी सकते हैं। पॉडकास्ट के बारे में अरुणा जी के भी विचारों हैं। इसके बारे में मैंने यहां बताया है।

मैंने इस पॉडकास्ट में अंग्रेजी के दो शब्दों portmanteau या blend और gizmo का प्रयोग किया है। मुझे इनके लिये हिन्दी का शब्द नहीं मालुम है यदि आपको मालुम हो तो टिप्पणी कर के ही बतायें – इमेल से न बताये। इसका एक खास कारण है।

आजकल शशी जी ने प्रति दिन चिट्ठियों की रेटिंग यहां शुरु की है। इसमें सबसे ज्यादा अंक तो टिप्पणियों के हैं। जिस दिन समीर जी, या फिर अनूप जी चिट्ठी लिखेंगे तो कोई और पहले या दूसरे नम्बर पर नहीं हो सकता। सब टिप्पणियां तो उन्ही के झोले में जांयगी। क्या करें ये दोनो लिखते ही ऐसा बढ़िया हैं – भगवान ने हमको क्यों नहीं ऐसी लेखनी दी। मुझे तो सबसे कम टिप्पणियां मिलने का रिकॉर्ड है :-( मैं तो कभी भी, इस रेटिंग के आखरी नम्बर पर भी नहीं आ सकता। टिप्पणी करके अर्थ बतायेंगे, तो शायद मेरी चिट्ठी का आखरी नम्बर लग जाये :-)

मैंने कुछ दिन पहले कई कड़ियों में ‘पेटेंट और पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता ‘ नाम की सिरीस लिखी थी। यदि इसे आप एक जगह पढ़ना चाहें तो इसे मेरे लेख चिट्टे पर यहां पढ़ सकते हैं। यदि आप यह जानना चाहें कि गोवा में पर्यटन के अलावा आय का क्या साधन है तो इसे आप यहां पढ़ सकते हैं और यदि आप हिन्दी की लेखिका मालती जोशी से मिलना चाहें तो मुन्ने की मां के चिट्टे पर यहां पढ़ सकते हैं।

बकबक चिट्ठे की सारी ऑडियो क्लिपें, ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

  • Windows पर कम से कम Audacity एवं Winamp में;
  • Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity में,

सुन सकते हैं।

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हैकरगॉचिस् और जिम्प

Posted by उन्मुक्त on April 5, 2007

अक्सर चिट्ठाकार, केवल अपने सिर का चित्र बना कर जिसमें गले के नीचे कुछ नहीं होता है, अवतार के लिये या फिर परिचय के लिये, अपने चिट्ठा पर डालते हैं। कभी, कभी केवल पूरा शरीर भी होता है। इसे हैकरगॉचिस् कहते हैं।

GNU Image Manipulation Programme (GIMP) जिम्प के द्वारा आप चित्रों को ठीक कर सकते हैं, उनकी रिटचिंग उसी तरह से कर सकते हैं जैसे कि फोटोशॉप में कर सकते हैं। यह जीपीएल के अंतरगत प्रकाशित ओपेन सोर्स प्रोग्राम है। यह न केवल मुफ्त है पर मुक्त भी। यह सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में (विंडोज़ में भी) चलता है। मैं इसी का प्रयोग करता हूं। यह बहुत अच्छा प्रोग्राम है। यह वह सब काम कर सकता है जिसकी किसी भी सधारण व्यक्ति को कंप्यूटर पर काम करने में जरूरत होती है। इस पर भी काम करके देखिये।

यदि आप, जिम्प के द्वारा, अपनी हैकरगॉचिस् बना कर अपने चिट्ठे पर डालना चाहें तो उसकी विधि यहां और यहां बतायी गयी है। कुछ हैकरगॉचिस् के उदाहरण यहां दिखाये गये हैं

यह भी विचार करने की बात है कि,

यदि मुक्त सोर्स का प्रोग्राम उतना ही अच्छा काम करे जितना कि मालिकाना प्रोग्राम, तो फिर मुक्त सॉफ्टवेर में ही क्यों न काम किया जाय?

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ऑडियो फाइल सम्पादक और अरुणा जी का दूसरा सवाल

Posted by उन्मुक्त on April 1, 2007

अरुणा जी के पहले सवाल का जवाब पॉडकास्ट से देने के बाद उनका ईमेल आया,

‘मैं तो सोचती थी कि मेरी आवाज भी पॉडकास्ट में रहेगी।’

यह प्रयोग अब और रोचक हो चला। मैंने उनकी आवाज शामिल करने के तरीकों पर विचार करना शुरू किया। मुझे इसके तीन तरीके संभव लगे,

  1. रिकॉर्डिंग एक जगह की जाय। यह तो संभव है नहीं, अरुणा जी हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली में रहती हैं और मैं एक छोटे से कसबे में;
  2. उनकी आवाज फोन से रिकॉर्ड की जाय। मुझे फोन या चैट से एलर्जी है – ईमेल ही पसन्द आती है;
  3. अरुणा जी अपनी आवाज रिकॉर्ड कर ईमेल से भेजें और मैं उसे पॉडकास्ट में शामिल करूं।

मुझे तीसरा तरीका ही पसन्द आया। इसके लिये मुझे एक ऑडियो फाइल सम्पादक की जरूरत पड़ी। इसको ढ़ूढ़ने पर मुझे लगा कि इसका सबसे अच्छा प्रोग्राम ऑडेसिटी है। इस प्रोग्राम में कई अच्छी बातें हैं,

  • यह सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में चलता है यानि कि विंडोज़, लिनेक्स, और मैक तीनो में;
  • यह न केवल मुफ्त है पर मुक्त भी यानि की ओपेन सोर्स है;
  • यह न केवल ऑडियो प्लेयर है पर यह ऑडियो फाइल सम्पादक भी है। इसमें ऑडियो फाइल उसी तरह से सम्पादित की जा सकती हैं जैसे कि आप वर्ड प्रोसेसर में अपना दस्तावेज सम्पादित करते हैं, यानि कि कट-पेस्ट या फिर कॉपी-पेस्ट चलता है;
  • यह हर तरह के फॉरमैट की फाइल बजा लेता है, यानि कि ogg फॉरमैट की भी। विंडो मीडिया प्लेयर जो कि विंडोज़ का डिफॉल्ट प्लेयर है वह ogg फॉरमैट की फाइलें नहीं बजा पाता। ogg फॉरमैट महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मुक्त है ओपेन सोर्स है जब कि wav या फिर mp3 फॉरमैट मालिकाना है। मैं न केवल मुक्त फॉरमैट में ही काम करना चाहता हूं पर यह भी विश्वास करता हूं कि यह बेहतरफॉरमैट है। इस फॉरमैट के बारे में आप मेरी इस चिट्ठी में पढ़ सकते हैं;
  • यह एक फॉरमैट से दूसरे फॉरमैट में बदलने की सुविधा भी देता है। अरुणा जी ने क्लिप wav फॉरमैट में भेजी जिसे मैंने ogg फॉरमैट में बदल कर पॉडकास्ट में रखा।

अरुणा जी का दूसरा सवाल है कि

‘ब्लॉग, पॉडकास्ट, और विडियोकास्ट क्या होता है और इसमें क्या अन्तर है?’

पॉडकास्ट क्या होता है इस पर उनके विचार भी हैं। इन विचारों से मुझे पॉडकास्ट का नया आयाम समझ में आया।

‘उन्मुक्त जी, आपको क्या नया आयाम समझ में आया, जरा हमें भी तो बताइये।’

अरे मैं क्यों बताऊं, आप यहां जा कर स्वयं अरुणा जी की मीठी आवाज में सुन लीजये।

अरुणा जी की आवाज सुनते समय कुछ ध्वनि की प्रबलता बढ़ानी पड़ेगी। उनकी आवाज की रिकॉर्डिंग में कुछ खरखराहट भी है। मैं कुछ नहीं कर सकता था, अरुणा जी के द्वारा भेजी रिकॉर्डिंग ही ऐसी थी। मेरे लिनेक्स गुरु का कहना है कि,

‘यह विंडोज़ में रिकॉर्ड करने के कारण है :-)

मुझे नहीं मालुम कि विंडोज़ में आवाज रिकॉर्ड करने का क्या अच्छा तरीका है ताकि उसमें खरखराहट न रहे। यदि आपको मालुम है तो टिप्पणी कर बतायें ताकि अरुणा जी उसी तरह से आवाज रिकॉर्ड कर भेजें।

आप सोचेंगे कि कितना अजीब सवाल है कि कोई विंडोज़ पर काम करने के तरीके को पूछे। यह इसलिये है कि मैं लिनेक्स में ही काम करता हूं। ओपेन सोर्स कुछ मुश्किल नहीं है बस मन बनाने की बता है। जहां चाह वहां राह।

अगले पॉडकास्ट पर मैं अरुणा जी के सवाल पर अपने विचार रखूंगा।

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