ओपेन सोर्स  से ओपेन कोर्सवेर तक

ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर आंदोलन न केवल सॉफ्टवेर के क्षेत्र में नये आयाम खोल रहा है पर उच्च शिक्षा के दरवाजों पर भी दस्तक दे रहा है। मैसाचुसैटस् इन्सटिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (एम.आई.टी.) दुनिया के सबसे अच्छे विश्वविद्यालय में से एक है। उसने १ नवम्बर २००६ तक, १५५० विषयों की कोर्स-साम्रगी एम.आई.टी. वेबसाईट में डाल रखी है। वे इसे ओपेन कोर्स वेर का नाम देते हैं। यह क्रिऐटिव कौमनस् के ऐट्रीब्यूशन नौन कौमर्शियल शेयर अलाईक लाईसेनस २.५ (Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 2.5) के अन्दर प्रकाशित किया गया है। यानि कि आपको इसे, प्रयोग करने, बांटने, संशोधन करने की स्वतंत्रता है पर ,

  • आप इसे ऐसे ही या संशोधन करने के बाद, इसी लाईसेन्स के अन्दर ही प्रकाशित या बांट सकते हैं;
  • आप इसे मुख्यतः व्यापार के फायदे के लिये नहीं प्रयोग कर सकते हैं;
  • आपको इसका श्रेय एम.आई.टी. को देना होगा।

देखना है कि आने वाले समय में, उच्च शिक्षा में यह नया प्रयोग क्या नये आयाम खोलता है और ओपेन सोर्स आंदोलन किस प्रकार से हमारे जीवन में परिवर्तन लाता है।

परिचय उन्मुक्त
मैं हूं उन्मुक्त - हिन्दुस्तान के एक कोने से एक आम भारतीय। मैं हिन्दी मे तीन चिट्ठे लिखता हूं - उन्मुक्त, ' छुट-पुट', और ' लेख'। मैं एक पॉडकास्ट भी ' बकबक' नाम से करता हूं। मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ' मुन्ने के बापू' के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है। कुछ समय पहले,  १९ नवम्बर २००६ में, 'द टेलीग्राफ' समाचारपत्र में 'Hitchhiking through a non-English language blog galaxy' नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उद्देश्य है। मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं। मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें। मुझसे समपर्क का पता यह है।

5 Responses to ओपेन सोर्स  से ओपेन कोर्सवेर तक

  1. अनंत संभवानायें हैं और भविष्य उज्जवल. जानकारी के लिये शुक्रिया.

  2. एम आई टी वाले तो आपका अनुशरण करते दिख रहे हैं। जो बात आपने अपने ब्लाग की सामग्री के लिये कही वही वे अपने मसाले के लिये कह रहे हैं- उपयोग के लिये स्वतंत्र हैं, हो सके तो उल्लेख कर दो!

  3. Shrish says:

    उन्मुक्त जी, यह क्रिएटिव कॉमन के लाइसेन्स बारे जरा विस्तार से सरल भाषा में समझा सकते हैं क्या। वह क्या होता है, क्या नियम हैं तथा उसका क्या प्रयोग होता है।

  4. अनुनाद सिंह says:

    ‘ओपेन सोर्स’ और ‘ओपेन कोर्स’ के अलावा ‘ओपेन हार्डवेयर’ और ‘ओपेन डिजाइन’ भी प्रचलन में हैं।

    1) Open Design – Wikipedia
    http://en.wikipedia.org/wiki/Open_design

    2) Open Design Circuits
    http://www.opencollector.org/history/OpenDesignCircuits/reinoud_index.html

    3) Open Design dot ORG
    http://www.opendesign.org/

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