Posted by उन्मुक्त on December 30, 2006
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Posted by उन्मुक्त on December 29, 2006
क्या कहा, चिट्ठेकारों को घूस को मिल रही है? अरे, क्या मिल रही है? कहां मिल रही है? और कौन कह रहा है?
इतने सारे सवाल एक साथ – एक एक करके भाई (बहना भी), इतनी ज्लदी में नहीं।
सुुना है कि लैपटॉप मिल रहा है – एकदम मुफ्त। वह भी विन्डोस़ वीसटा के साथ, पहले से डली हुई। यह भी एकदम मुफ्त है।
क्या कहा – चोरी की विन्डोस़ वीसटा। किसने कहा? यह तो एकदम असली है।
कैसे मालुम की असली है? अरे, जब यह सब माईक्रोसॉफ्ट दे रहा है तो चोरी की कैसे हो सकती है। यह हुई न कुछ बात।
मैं नहीं कह रहा हूं यह सब। यह तो बता रहें हैं जोएल मियां। खुद ही यहां पढ़ लीजये। जब से पढ़ा है तब से यही सोच रहा हूं कि क्या कभी इस तरह की भेंट हिन्दी चिट्ठेकारों को भी मिलेगी? मिले तो, विन्डोस़ पर भी काम कर के देखा जाय। देखूं कि जो जोएल मियां, विन्डोस़ वीसटा के बारे में बता रहें हैं वह सच है कि नहीं। यदि आप विन्डोस़ वीसटा खरीदने की सोचते हैं तो इस बारे में जोएल मियां के विचार भी वहीं पढ़ लीजयेगा।
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Posted by उन्मुक्त on December 17, 2006
औपरेटिंग सिस्टम वह सॉफ्टवेर होता है जो कि किसी कंप्यूटर को चलाता है, जैसा कि विन्डोस़। अन्य सॉफ्टवेर किसी भी कंप्यूटर में दूसरे कार्य करते हैं जैसे कि एम.एस. वर्ड एक वर्ड प्रोसेसर है इसकी सहायता से आप लिखते हैं। वेब ब्रॉउसर जैसे किइन्टरनेट एक्सप्लोरर या फायरफौक्स। इसके द्वारा आप इन्टरनेट पर जा कर चिट्ठे वगैरह पढ़ते हैंं।
लिनेक्स भी एक तरह का औपरेटिंग सिस्टम है और इसकी सहायता से आप कंप्यूटर चलाते हैं पर यह FUD का शिकार है। FUD!! अरे भाई यह FUD – यह क्या होता है?
Fear, Uncertainity, और Doubt को छोटा कर दें तो यह बन जाता है FUD. यह विरोधी खेमे की खासियत है – धीरे से आपके उत्पाद के बारे में लोगो के बीच इसे फैला दिया, इसके बाद और कुछ करने की जरूरत नहीं है। अक्सर यदि आप किसी के बारे में नहीं जानते हों तो यह और भी आसान होता है।
ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर के बारे में लोगों को लोगों को कम जानकारी रहती है इसलिये यह FUD का शिकार रहता है। लिनेक्स भी एक तरह का ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर है और ओपेन सोर्स सॉफ्टवेर का सबसे अच्छा उदाहरण है। इसके बारेके बारे में अक्सर गलतफहमी रहती है। इसकी कुछ गलतफहमी दूर कर रही है यह चिट्ठी।
यदि इसके अतिरिक्त आप,
- हरिवंश राय बच्चन के इमेरजेंसी के बारे में विचार जानना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं; और
- अंक विद्या के बारे में जानना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं; और
- काम ज्यादा महत्वपूर्ण है या उसे करना तो यहां पढ़ सकते हैं; और
- पेटेंट पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता की प्रस्तावना के बारे में पढ़ना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं।
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Posted by उन्मुक्त on December 6, 2006
न्यू यॉर्क टाईम्स में एक लेख A College Education Without Job Prospects के नाम से निकला है। पढ़ कर लगा कि शायद ठीक ही कहता है। अपने देश में इम्तिहान में नम्बरों पर कुछ कर ज्यादा ही जोर रहता है और व्यक्तित्व के विकास पर कम।
कुछ साल पहले, आई.आई.टी. कानपुर की दीक्षान्त समारोह में रहने का मौका मिला था। वहां पर उस मौके पर बांटे जाने वाली पत्रिका भी देखने को मिली थी। इसमें,
- वहां पर हर साल दाखिला लेने वाले उस लड़के का नाम जिसे जे.ई.ई. में सबसे अच्छी रैंकिंग मिली थी;
- पास होने वाले लड़को में से प्रेसीडेन्ट का पुरुस्कार पाने वाले लड़के का नाम; और
- २५ साल बाद सबसे अच्छे पुरातन छात्र का पुरुस्कार पाने वाले का नाम था।
२५ साल बाद सबसे अच्छे पुरातन छात्र का पुरुस्कार प्राप्त करने वाला छात्र पहले वाले श्रेणियों वाला छात्र नहीं था।
केवल इम्तिहान में रट कर अच्छे नम्बर ले आना ही जीवन को सफल नहीं बना सकता – शायद यही हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी है।
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