छुट-पुट

उन्मुक्त पर मेरे विचार, छुट-पुट पर इधर उधर

नशा, चिट्ठा लिखने का

यह तो चिट्ठा-नशे की हद हो गयी।

अमेरिकी न्यायलय के न्यायालय की जूरी के फोरमैन मुकदमे के बारे में चिट्ठे लिखने गये। पर क्या इससे अभियुक्त को न्याय नहीं मिल पाया? एक ऐसे मामले में न्यू हैम्शायर के सर्वोच न्यायालय के मुताबिक तो सजा बरकरार रहेगी। इसे  यहां पढ़िये। इसके साथ यह भी पढ़िये कि किस तरह से जूरी भी कोर्टरूम के अन्दर से चिट्ठे लिखने में मशगूल हैं।

क्या इससे न्याय प्रणाली प्रभावित हो रही है?

चलिये देखते हैं कि कब कोई ज़ज साहब कोर्टरूम से चिट्ठा प्रकाशित करते हैं।

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

October 10, 2006 - Posted by उन्मुक्त | कानून, हिन्दी | | 1 Comment

1 Comment »

  1. Room nahi to Campus hi sahi.. ho to raha hai
    :-)

    Comment by राम चन्द्र मिश्र | October 12, 2006


Leave a comment